दिल से

Pulwama में शहीद वीरो को नमन करता हूँ, और उनकी वीरता के सामने नतमस्तक हूँ

मैं होलियो पर आऊंगा, दिवालियो पर आऊंगा,
आऊंगा मैं इस तरह , फिर दूर ही ना जाऊँगा।

द्वार बन्द स्नेह के, वो खोल कर चला गया,
आऊंगा मैं लौट कर, ये बोल कर चला गया ।।
….
पुकारते उसको यूँ, सोलह श्रृंगार थक गया,
नैन भी पथरा गये, किसी का प्यार थक गया,

मेहंदी के रंग को, आंसुओ में तोलकर चला गया,
आऊंगा मैं लौट कर, ये बोल कर चला गया ।

पिता को तन्हा छोड़कर, बहन को भुला गया,
जगाकर यूँ दिलो को, वो खुद को सुला गया,

माँ के मिलन की आस, वो तोड़कर चला गया,
आऊंगा मैं लौट कर, ये बोल कर चला गया ।।

कुछ तो बस अधूरी रही, कुछ जिम्मेदारी निभा गया,
तोड़कर सारी रिश्तेदारी, वतन से यारी निभा गया,

आस ना की कफन की, तिरंगा ओढ़कर चला गया,
आऊंगा मैं लौट कर, ये बोल कर चला गया ।।Pulwama

 

दीपांशु सैनी

इं0 दीपांशु सैनी (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) उभरते हुए कवि और लेखक हैं। जीवन के यथार्थ को परिलक्षित करती उनकी रचनाएँ अत्यन्त सराही जा रही हैं। (सम्पर्क: 7409570957)

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