खेल जगत

अपना अर्जुन अवॉर्ड लौटा दिया Vinesh Phogat ने -विरोध जताते हुए कर्तव्य पथ पर ही छोड़ दिया

बृजभूषण सिंह मामले में विरोध जताते हुए महिला पहलवान Vinesh Phogat ने अपना अर्जुन अवॉर्ड लौटा दिया है. बजरंग पुनिया के बाद Vinesh Phogat दूसरी रेसलर हैं, जिसने अपना अवॉर्ड लौटाया है. दरअसल वह अपना अवॉर्ड PMO में वापस करने जा रहीं थीं, उसी समय उन्हें पुलिस ने रोक दिया. फिर विनेश ने विरोध जताते हुए अर्जुन अवॉर्ड को कर्तव्य पथ पर ही छोड़ दिया. इधर विनेश की अवॉर्ड वापसी पर बजरंग पूनिया ने एक्स पर पोस्ट किया और लिखा, यह दिन किसी खिलाड़ी के जीवन में न आए. देश की महिला पहलवान सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं.

विश्व चैम्पियनशिप की पदक विजेता Vinesh Phogat ने मंगलवार को अपना खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार प्रधानमंत्री को लौटाने का फैसला करते हुए पत्र लिखा था. उन्होंने सोशल मीडिया में लिखा था, उनकी जिंदगी सरकार के उन फैंसी विज्ञापनों जैसी नहीं है जिनमें महिला सशक्तिकरण और उनके उत्थान की बात की जाती है.

Vinesh Phogat ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में कहा था, मुझे मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार दिया गया था जिनका अब मेरी जिंदगी में कोई मतलब नहीं रह गया है. हर महिला सम्मान से जीना चाहती है. इसलिए प्रधानमंत्री सर, मैं अपना मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार आपको वापस करना चाहती हूं ताकि सम्मान से जीने की राह में ये पुरस्कार हमारे ऊपर बोझ न बन सकें.

Vinesh Phogat को 2020 में भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न से सम्मानित किया गया था. इससे पहले उन्हें 2016 में अर्जुन पुरस्कार मिला था. विनेश से पहले ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया और डेफलंपिक्स के चैंपियन वीरेंदर सिंह यादव ने अपने पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिए थे.

पहलवानों ने इससे पहले मांग की थी कि बृज भूषण का कोई भी करीबी डब्ल्यूएफआई प्रशासन में नहीं होना चाहिए. चुनाव के बाद रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक ने खेल से संन्यास लेने की घोषणा की थी. बृजभूषण मामले को लेकर ही पहलवान अवॉर्ड वापसी में उतर गए हैं.

संजय सिंह को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) का अध्यक्ष चुना गया था. बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय के गुट ने इन चुनाव में 15 में से 13 पद जीते थे. हालांकि खेल मंत्रालय ने फैसला करते समय अपने संविधान के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर नव निर्वाचित पैनल को निलंबित कर दिया था और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को कुश्ती के संचालन के लिए एक तदर्थ पैनल का गठन करने के लिए कहा था.

 

News-Desk

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