Bulandshahr Gang Rape Case: 9 साल बाद दरिंदगी पर अदालत की मुहर, पांच दोषी करार, देश को झकझोर देने वाले अपराध पर सजा का इंतजार
Bulandshahr gang rape case एक बार फिर देश की चेतना को झकझोर रहा है। 28 जुलाई 2016 की वह भयावह रात, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था, अब 9 साल बाद न्याय के निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। बुलंदशहर के नेशनल हाईवे-91 पर गाजियाबाद के एक परिवार के साथ हुई वह हैवानियत आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। सोमवार को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने से पहले, कोर्ट ने इस जघन्य कांड में पांच आरोपियों को दोषी करार दे दिया है।
नेशनल हाईवे पर दरिंदगी: लूट से शुरू हुई, हैवानियत पर खत्म हुई रात
28 जुलाई 2016 की रात गाजियाबाद निवासी एक परिवार शाहजहांपुर में तेरहवीं संस्कार में शामिल होकर लौट रहा था।
जैसे ही कार बुलंदशहर के देहात कोतवाली क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास NH-91 पर पहुंची, बदमाशों ने लोहे की रॉड फेंककर कार को रोक दिया।
इसके बाद जो हुआ, वह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सभ्यता पर हमला था।
परिवार के छह सदस्यों को बंधक बनाकर बदमाश उन्हें सड़क के दूसरी ओर खेतों में ले गए।
पहले किशोरी, फिर मां… पिता की आंखों के सामने बर्बरता
आरोपियों ने पहले सभी पुरुषों के हाथ-पैर बांध दिए।
इसके बाद 14 वर्षीय किशोरी के साथ परिवार के सामने सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
जब पिता ने विरोध किया, तो उसे बेरहमी से पीटा गया।
इतना ही नहीं, हैवानियत यहीं नहीं रुकी।
किशोरी की मां के साथ भी उसी रात गैंगरेप किया गया।
ढाई घंटे तक चली इस दरिंदगी के दौरान पीड़ित परिवार ने सैकड़ों बार डायल-100 पर कॉल किया, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं पहुंची।
लूटपाट कर फरार हुए आरोपी, सिस्टम की नाकामी उजागर
गैंगरेप के बाद आरोपी परिवार से नकदी और कीमती सामान लूटकर फरार हो गए।
घटना के बाद स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
मामला सामने आने के बाद एसएसपी समेत 17 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई।
शुरुआत में बुलंदशहर पुलिस ने आनन-फानन में तीन निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जो बाद में गलत साबित हुआ।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप, जांच CBI को सौंपी गई
मामले की गंभीरता और पुलिस की लापरवाही को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केस की जांच CBI को सौंप दी।
CBI जांच में सामने आया कि पूरी वारदात बावरिया गिरोह द्वारा अंजाम दी गई थी।
CBI ने कुल छह आरोपियों — जुबैर, सलीम, साजिद, धर्मवीर, नरेश और सुनील के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
एक की जेल में मौत, दो एनकाउंटर में ढेर
लंबे ट्रायल के दौरान
आरोपी सलीम की करीब चार साल पहले जेल में बीमारी से मौत हो गई
दो आरोपी नोएडा और हरियाणा पुलिस के अलग-अलग एनकाउंटर में मारे गए
इस तरह केस अंततः पांच आरोपियों तक सीमित रह गया।
हरियाणा से पकड़े गए तीन आरोपी, पीड़िता ने की पहचान
घटना के कुछ महीनों बाद हरियाणा पुलिस ने एक गिरोह को पकड़ा, जिसमें
धर्मवीर, नरेश और सुनील शामिल थे।
पीड़िता के सामने परेड कराई गई, जहां उसने तीनों की स्पष्ट पहचान की।
इसके बाद CBI ने इनके खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की और
27 जुलाई 2018 को कोर्ट ने चार्ज फ्रेम कर दिए।
किन धाराओं में दोषी करार
कोर्ट ने सभी दोषियों को
IPC की धारा 394, 395, 397, 376D, 120B
और POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया है।
सोमवार को अदालत द्वारा सजा का ऐलान किया जाएगा।
अदालत परिसर में आरोपी की बेशर्मी, कैमरे में कैद
दोषी ठहराए जाने के बाद जब पुलिस कस्टडी में आरोपियों को कोर्ट से बाहर लाया जा रहा था,
तो आरोपी जुबैर ने मुस्कुराते हुए मीडिया से कहा—
“ठीक से वीडियो बनाना और फेमस कर दो।”
उसकी यह बेशर्मी और पछतावे की कमी कैमरे में कैद हो गई, जिसने समाज को और आक्रोशित कर दिया।
अन्य आरोपी भी बिना किसी ग्लानि के नजर आए।
9 साल बाद न्याय की उम्मीद, देश की नजर सजा पर
यह मामला वर्षों तक मीडिया, अदालत और समाज की चेतना में जीवित रहा।
आज, Bulandshahr gang rape case में दोष सिद्ध होने के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद बंधी है।
देशभर से यह आवाज़ उठ रही है कि
ऐसे जघन्य अपराध में कड़ी से कड़ी सजा दी जाए,
ताकि यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सख्त संदेश बन सके।

