Hamas द्वारा इज़रायली बंधकों का रहस्यमय अपहरण: क्या ग़ाज़ा की भूमिगत सुरंगों में छिपा हुआ है सत्य?
7 अक्टूबर 2023 को Hamas ने दक्षिणी इज़रायल पर हमला किया और करीब 1200 इज़रायली नागरिकों और विदेशियों को मार डाला, इसके साथ ही 251 लोगों को बंधक बना लिया। ये बंधक इज़रायली और विदेशी नागरिकों का एक मिश्रण थे, जिनमें कई महिला और बच्चे भी शामिल थे। हमास का यह हमला न केवल सैन्य दृष्टिकोण से बेहद प्रभावशाली था, बल्कि इसकी रणनीति और उद्देश्य भी बेहद जटिल थे।
हमास ने इन बंधकों को दो साल से ज्यादा समय तक अपनी कैद में रखा है। हालांकि, अब तक 148 बंधक को रिहा किया जा चुका है, लेकिन लगभग 59 बंधक अब भी हमास के कब्जे में हैं। इनमें से कुछ बंधक शायद मारे जा चुके हों, लेकिन मोटे अनुमान के मुताबिक, करीब 30 बंधक अब भी जीवित हैं। इन्हें कहाँ रखा गया है? ये सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। मोसाद और सीआईए जैसी दुनिया की सबसे खतरनाक जासूसी एजेंसियां इन बंधकों का पता लगाने के लिए पूरी कोशिशें कर चुकी हैं, लेकिन वे भी इस रहस्य को नहीं सुलझा पाई हैं।
ग़ाज़ा के भूगोल और हमास की रणनीति
ग़ाज़ा पट्टी का क्षेत्रफल महज 365 वर्ग किलोमीटर है, जो दिल्ली शहर से भी छोटा है। इस छोटे से इलाके में 23 लाख लोग बसते हैं, और इसका हर हिस्सा संकरे रास्तों, घनी आबादी और विशेष सुरंग नेटवर्क से घिरा हुआ है। यही वजह है कि यहां के भूगोल ने इन बंधकों को छिपाने के लिए आदर्श स्थान बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन बंधकों को ग़ाज़ा की सुरंगों में छिपाकर रखा गया है, जिन्हें “ग़ाज़ा मेट्रो” कहा जाता है।
ह़मास की सुरंगें: एक गहरे सैन्य नेटवर्क की नींव
ग़ाज़ा की सुरंगों का नेटवर्क पूरी दुनिया में मशहूर है। इस नेटवर्क को हमास ने धीरे-धीरे कई सालों में बनाया है और यह 400-500 किलोमीटर लंबा है, जो लंदन मेट्रो से भी बड़ा है। इन सुरंगों का इस्तेमाल केवल हथियारों और तस्करी के लिए नहीं, बल्कि बंधकों को छिपाने के लिए भी किया जाता है। इन सुरंगों का विस्तार 20 से 40 मीटर तक होता है, और ये इतना गहरी हैं कि किसी भी प्रकार की बंकर-बस्टर बमबारी भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती।
सीआईए और मोसाद की नाकामी: क्या कारण हो सकता है?
मोसाद और सीआईए जैसी एजेंसियां दुनियाभर में जासूसी और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए जानी जाती हैं। इनके पास अत्याधुनिक तकनीक, सैटेलाइट निगरानी, और ड्रोन जैसे उपकरण हैं। फिर भी, ये दोनों एजेंसियां बंधकों का पता नहीं लगा पाई हैं। इसका मुख्य कारण ग़ाज़ा में मोसाद और सीआईए का सीमित नेटवर्क है। ग़ाज़ा एक बंद समाज है, जहां बाहरी दुनिया से सूचना मिलना बेहद कठिन है। स्थानीय लोग वहां के खुफिया नेटवर्क का हिस्सा बनने से कतराते हैं, क्योंकि ऐसा करने पर उनकी जान को खतरा हो सकता है।
ह़मास द्वारा बंधकों का उपयोग: एक जटिल कूटनीतिक रणनीति
हमास इन बंधकों को केवल एक कायरतापूर्ण सैन्य कदम के रूप में नहीं देखता। ये बंधक उसके लिए रणनीतिक हथियार बन गए हैं। हमास इन बंधकों के जरिए इज़रायल से युद्धविराम, कैदियों की रिहाई, और अन्य शर्तें मनवाने की कोशिश करता है। जब इज़रायल के हमले से बंधकों की जान को खतरा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय दबाव इज़रायल पर बढ़ता है और वह युद्धविराम के लिए बाध्य हो जाता है। बंधकों को उन स्थानों पर रखा जाता है, जिन्हें इज़रायल आसानी से निशाना नहीं बना सकता, जैसे अस्पताल और मस्जिद।
सुरंगों के भीतर की जटिलता और सुरक्षा
ग़ाज़ा में इन सुरंगों की जटिलता और उनके रणनीतिक महत्व को नजरअंदाज करना मुश्किल है। इन सुरंगों में न केवल बंधकों को रखा जाता है, बल्कि हमास की पूरी सैन्य रणनीति भी इन सुरंगों पर निर्भर है। अगर इज़रायल किसी सुरंग का रास्ता ढूंढ लेता है, तो हमास तुरंत बंधकों को दूसरी जगह शिफ्ट कर सकता है। इसके अलावा, सुरंगों में संचार लाइनें, वेंटिलेशन सिस्टम और बिजली की व्यवस्था भी मौजूद है, जिससे इनका पता लगाना और भी मुश्किल हो जाता है।
इन सुरंगों को बनाने में हमास ने कितना समय और संसाधन लगाया?
ग़ाज़ा की इन सुरंगों का निर्माण एक दिन में नहीं हुआ था। इसे बनाने में कई साल लगे, और हमास ने छोटे-छोटे हिस्सों को जोड़ते हुए इस नेटवर्क को आकार दिया। इन सुरंगों का निर्माण कठिन और महंगा काम था, जिसमें मजदूरों और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया। इन सुरंगों के निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों को इज़रायली सेना के ब्लॉकेड के बावजूद ग़ाज़ा में लाया गया।
क्या इज़रायल इन सुरंगों को नष्ट कर पाएगा?
इज़रायल ने कई बार इन सुरंगों को नष्ट करने की कोशिश की है, लेकिन कई बार यह प्रयास नाकाम रहे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि इन सुरंगों के कई प्रवेश द्वार नागरिक ढांचे के नीचे हैं, जैसे घरों, मस्जिदों और स्कूलों के नीचे। यह इज़रायल के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वह अपनी सेना को नागरिकों को नुकसान पहुंचाए बिना हमला करने में सक्षम होना चाहता है।
संक्षेप में, ग़ाज़ा की यह सुरंग नेटवर्क और हमास की रणनीति इज़रायल के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बंधकों के बारे में किसी भी सूचना का मिलना बेहद मुश्किल हो गया है। यह एक रणनीतिक युद्ध है, जहां एक तरफ इज़रायल अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर रहा है, तो दूसरी ओर हमास अपनी राजनीतिक शर्तों को मनवाने के लिए बंधकों को अपना हथियार बना चुका है।
यह घटना इज़रायल और हमास के बीच के तनाव को और भी बढ़ा देती है। ग़ाज़ा के भूगोल, सुरंगों और राजनीति के मिश्रण ने इस संकट को और जटिल बना दिया है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, बंधकों की स्थिति और भी अधिक गंभीर होती जा रही है। विश्व समुदाय को उम्मीद है कि किसी न किसी तरह से इस संकट का समाधान निकाला जाएगा, लेकिन यह एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य चुनौती है।

