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PM Modi की रूस यात्रा रद्द, शी जिनपिंग की मास्को एंट्री से बढ़ा तनाव! विजय दिवस परेड से किनारा, राजनाथ सिंह लेंगे कमान?

मॉस्को/नई दिल्ली – वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। PM Modi 9 मई को मॉस्को में आयोजित होने जा रहे भव्य विजय दिवस परेड में हिस्सा नहीं लेंगे। यह आयोजन द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिसकी तैयारी रूस में पूरे जोर-शोर से चल रही है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बुधवार को मीडिया को जानकारी दी कि भारत के प्रधानमंत्री की ओर से कोई हाई-प्रोफाइल उपस्थिति नहीं होगी, हालांकि भारत का प्रतिनिधित्व जरूर किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मॉस्को पहुंचने वाले हैं और उनकी उपस्थिति समारोह को कूटनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम मानी जा रही है।


राजनाथ सिंह संभाल सकते हैं भारत की कमान!

हालांकि PM Modi नहीं जा रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस की इस ऐतिहासिक परेड में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। भारत सरकार के करीबी सूत्रों ने रूसी मीडिया को यह जानकारी दी कि राजनाथ सिंह का मास्को दौरा लगभग तय है और वह रेड स्क्वायर पर आयोजित सैन्य परेड में शामिल होंगे।

इसके साथ ही यह भी चर्चाएं तेज हैं कि भारतीय सशस्त्र बलों की एक औपचारिक टुकड़ी परेड में भाग ले सकती है। यह भारत-रूस रक्षा संबंधों की मजबूती और वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य उपस्थिति को दर्शाने का एक प्रमुख अवसर होगा।


शी जिनपिंग की मास्को यात्रा और भारत की अनुपस्थिति – क्या बदल रही है वैश्विक ध्रुवीयता?

विजय दिवस परेड का यह संस्करण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह यूरोप में युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ है। ऐसे में चीन के राष्ट्रपति की उपस्थिति और भारत के शीर्ष नेता की अनुपस्थिति को वैश्विक कूटनीति में नए संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। पेसकोव ने कहा, “शी जिनपिंग का दौरा बहुत महत्वपूर्ण है और हम इसकी विशेष तैयारी कर रहे हैं।”

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस समय अपनी रणनीतिक संतुलन नीति के तहत रूस और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के रूस के खिलाफ कड़े रुख के चलते, भारत द्वारा हाई-प्रोफाइल उपस्थिति से बचना एक रणनीतिक कदम हो सकता है।


पुतिन का मोदी को न्योता, लेकिन 2025 में भारत आने की उम्मीद

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी को पहले भी मई 2020 में विजय दिवस की 75वीं वर्षगांठ पर आमंत्रित किया था, लेकिन तब भी कोविड-19 महामारी के चलते मोदी की यात्रा रद्द हो गई थी। अब, क्रेमलिन के वरिष्ठ सहयोगी यूरी उशाकोव ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पुतिन 2025 की शुरुआत में भारत यात्रा पर आ सकते हैं, जो भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की निरंतरता का हिस्सा होगी।

पुतिन की पिछली भारत यात्रा दिसंबर 2021 में हुई थी, जब वे नई दिल्ली में 21वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में शामिल हुए थे। अब अगली बैठक की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।


PM मोदी की पिछली रूस यात्राएं और द्विपक्षीय संबंधों की गर्माहट

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने दो बार रूस की हाई-प्रोफाइल यात्राएं की थीं — जुलाई में 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लेने और फिर अक्टूबर में कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में। दोनों यात्राओं ने भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था।

इसके अलावा भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, और तकनीक के क्षेत्रों में गहराते सहयोग को दुनिया भर में सराहा गया। लेकिन मौजूदा परिदृश्य में रूस-चीन की नजदीकी और भारत की कूटनीतिक चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।


रेड स्क्वायर पर भारतीय टुकड़ी की संभावित मौजूदगी – गर्व और रणनीति का संगम

अगर भारतीय सेना की टुकड़ी इस बार रेड स्क्वायर की परेड में हिस्सा लेती है, तो यह न केवल भारत के लिए गर्व की बात होगी बल्कि यह भारत-रूस सैन्य सहयोग का प्रतीक भी होगी। इस मंच पर भारत की उपस्थिति यह भी दिखाएगी कि भले ही प्रधानमंत्री स्तर पर प्रतिनिधित्व न हो, लेकिन भारत और रूस के बीच संबंधों की जड़ें गहरी हैं।


भारत-रूस-चीन त्रिकोण: शांति या शक्ति संघर्ष?

रूस, भारत और चीन — तीनों देश ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर साथ काम करते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में भारत-चीन तनाव और रूस-चीन समीपता ने इस त्रिकोण को जटिल बना दिया है। रूस यदि भारत और चीन दोनों को बराबर अहमियत देना चाहता है, तो उसे कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना होगा।


अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नई रणनीति?

प्रधानमंत्री मोदी का इस बार रूस न जाना यह संकेत देता है कि भारत अब कूटनीति में केवल परंपराओं पर नहीं, प्राकृतिक परिस्थितियों और वैश्विक समीकरणों पर आधारित रणनीति अपना रहा है। भारत हर मोर्चे पर अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और वैश्विक कूटनीतिक हितों की रक्षा के लिए सजग है।


निष्कर्ष नहीं, बल्कि अगली कड़ी की प्रतीक्षा…

क्या शी जिनपिंग की रूस यात्रा नई वैश्विक धुरी बनाएगी? क्या राजनाथ सिंह की मौजूदगी भारत का संतुलित संदेश दे पाएगी? क्या पुतिन की भारत यात्रा से कुछ नया मोड़ आएगा? आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है — भारत अब विश्व मंच पर अपनी उपस्थिति एक सोची-समझी रणनीति के तहत दर्ज करा रहा है।

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