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Taliban का नया आदेश: कुनार नदी पर डैम बनाने की तैयारी, पाकिस्तान के लिए जल संकट बढ़ने की आशंका-Hibatullah Akhundzada

Taliban के सर्वोच्च नेता मावलवी हिबतुल्लाह अखुंदजादा (Hibatullah Akhundzada) ने अफगानिस्तान में एक बड़ा निर्णय लिया है, जिसमें उन्होंने कुनार नदी पर जल्द से जल्द डैम बनाने का आदेश दिया है। इस फैसले से न केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ेगा, बल्कि इस कदम से अफगानिस्तान की ऊर्जा और सिंचाई संबंधी समस्याओं का समाधान भी हो सकता है। अफगानिस्तान ने यह फैसला पाकिस्तान के साथ हुए हालिया संघर्ष के बाद लिया है, जहां पाकिस्तानी हमलों में अफगान नागरिकों की मौत हुई थी और दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ था।

कुनार नदी पर डैम का निर्माण: अफगानिस्तान का महत्वाकांक्षी कदम

तालिबान सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह कुनार नदी पर डैम बनाने की योजना पर काम कर रही है। अफगान सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी साझा की। अफगानिस्तान का दावा है कि इस डैम से 45 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना है, साथ ही लगभग 1.5 लाख एकड़ जमीन को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इससे अफगानिस्तान में ऊर्जा संकट और खाद्य सुरक्षा को लेकर होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकेगा।

मंत्रालय के उपमंत्री मुहाजिर फराही ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए विदेशी कंपनियों का इंतजार नहीं किया जाएगा और इसे अफगानिस्तान की घरेलू कंपनियों के माध्यम से जल्द शुरू किया जाएगा। यह निर्णय हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद लिया गया, जिसमें अफगानिस्तान के 37 नागरिकों की मौत हुई और 425 घायल हुए थे।

कुनार नदी और पाकिस्तान: जल विवाद की गहरी जड़ें

कुनार नदी अफगानिस्तान से निकलकर पाकिस्तान में प्रवेश करती है, जहां यह चितराल नदी के रूप में बहती है और बाद में काबुल नदी में मिल जाती है। इस नदी का 70-80% पानी पाकिस्तान में जाता है। काबुल नदी फिर सिंधु नदी में मिल जाती है, जो पाकिस्तान के लिए जल आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है। यदि अफगानिस्तान कुनार नदी पर डैम बनाता है, तो पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में जल संकट उत्पन्न हो सकता है, क्योंकि यह नदी उन क्षेत्रों की खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, पाकिस्तान के चितराल जिले में चल रहे 20 से अधिक छोटे हाइडल प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो सकते हैं, जो नदी के बहाव से बिजली उत्पन्न करते हैं। इन प्रोजेक्ट्स का काम पूरी तरह से नदी के पानी पर निर्भर है। यदि अफगानिस्तान ने इस नदी का पानी रोक लिया, तो इन प्रोजेक्ट्स को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिससे पाकिस्तान के बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।

तालिबान का जल और ऊर्जा मंत्रालय और उसका दृष्टिकोण

तालिबान सरकार के जल और ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता मतीउल्लाह आबिद ने पहले कहा था कि इस डैम का सर्वेक्षण और डिज़ाइन तैयार हो चुका है। तालिबान का दावा है कि यह प्रोजेक्ट अफगानिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जो न केवल ऊर्जा संकट का समाधान करेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी मजबूती देगा। अफगानिस्तान में लगभग 80% लोग कृषि पर निर्भर हैं, और इस डैम से उन्हें सिंचाई के लिए जल मिलेगा, जिससे देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष और इसके प्रभाव

9 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चले संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को सीमा विवाद और हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया। इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तान का कहना था कि उसने केवल आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी।

इस संघर्ष के कारण तालिबान ने यह निर्णय लिया कि वह अब पाकिस्तान के खिलाफ जल सुरक्षा उपायों के रूप में कार्रवाई करेगा। इस प्रकार, तालिबान के डैम निर्माण के निर्णय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते और जटिल हो सकते हैं।

भारत और अफगानिस्तान: जल सहयोग की नई दिशा

भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान तीनों देशों के बीच जल विवाद एक पुरानी समस्या रही है, और इस क्षेत्र में जल के बंटवारे को लेकर कई समझौते और विवाद हुए हैं। भारत ने 1960 में सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत सिंधु नदी प्रणाली का पानी भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित किया गया था। इस समझौते के बाद भारत ने 2023 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया और पाकिस्तान की ओर जाने वाला पानी रोक दिया।

अफगानिस्तान का यह फैसला भारत के साथ जल सहयोग के संदर्भ में नई दिशा की ओर इशारा कर सकता है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा के बाद यह फैसला आया, और भारत ने हाइड्रो-इलेक्ट्रिक परियोजनाओं के लिए अफगानिस्तान के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई थी। भारत की ओर से अफगानिस्तान में साल्मा डैम और शाहतूत डैम जैसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जो भविष्य में जल आपूर्ति और ऊर्जा संकट का समाधान प्रदान कर सकती हैं।

अफगानिस्तान की जल नीति: भविष्य में क्या होगा?

अफगानिस्तान का यह निर्णय स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के लिए एक चुनौती बन सकता है, और यह भविष्य में जल विवादों को और बढ़ा सकता है। हालांकि, तालिबान के इस कदम से अफगानिस्तान में जल और ऊर्जा संकट का समाधान हो सकता है, लेकिन पाकिस्तान को यह कदम स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है।

समाप्ति: जल विवाद का नया अध्याय

इस समय यह देखना दिलचस्प होगा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान इस जल विवाद को किस प्रकार सुलझाते हैं। तालिबान के इस फैसले ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा दी है, और यह देखने योग्य होगा कि क्या इस विवाद का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकलता है या यह संघर्ष और बढ़ता है।

तालिबान का यह निर्णय पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, और इसे लेकर दोनों देशों के बीच जल विवाद और बढ़ सकते हैं। यह भविष्य में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों पर गहरा असर डाल सकता है।

News-Desk

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