विश्व क्षय रोग दिवस : संगोष्ठी का हुआ आयोजन
मुजफ्फरनगर। जिला रेडक्रास भवन, जिला चिकित्सालय परिसर पर विश्व क्षय रोग दिवस 24 मार्च, 2019 के उपलक्ष्य में एक संगोष्ठी/सेमिनार का आयोजन मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय डा0 पी0एस0 मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मुजफ्फरनगर की अध्यक्षता में किया गया। डा0 लोकेश चन्द्र गुप्ता जिला क्षय रोग अधिकारी ने संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुये बताया कि 24 मार्च 1882 को रार्बट कॉक नामक वैज्ञानिक ने टी0बी0 रोग को फैलाने वाले बैक्टीरिया की खोज की थी तथा उसके सौ वर्श बाद 24 मार्च 1982 को यूनियन ऑफ चेस्ट एण्ड लंग्स डिजीज ने 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस घोशित किया गया तब से यह दिन प्रतिवर्श विश्व क्षय रोग दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी मुजफ्फरनगर ने टी0बी0 रोग की व्यापकता के बारे मे बताया कि उन्होने यह भी बताया कि भारत में प्रतिदिन लगभग 5000 व्यक्ति टी0बी0 रोग के शिकार होते है एवं 1000 व्यक्तियो की प्रतिदिन टी0बी रोग मृत्यु होती है।डा0 लोकेश चन्द्र गुप्ता जिला क्षय रोग अधिकारी ने टीबी0 के लक्षणों के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय से लगातार खॉसी व बलगम आना, षाम के समय बुखार, सीने में दर्द, भूख न लगना, वजन में अचानक कमी, बलगम में खून का आना। पिछले एक माह में छाती में दर्द आदि हैं। उन्होंने बताया कि टी0बी0 के रोगी के बलगम की दो जॉच की जाती है।
वह यह एक मात्र तरीका है तथा इसमे रोगी के बलगम में टी0बी0 के कीटाणुओ की जॉच की जाती है। टी0बी0 की जॉच में एक्स-रे, अल्ट्रासाउण्ड, सीबीनैट तथा अन्य सभी जॉच सहायक जॉच होती है। डा0 मिश्रा ने बताया कि समय जनपद में 12 टी0बी0 यूनिट, 27 माइक्रोस्कोपिक सेन्टर एवं 54 पी0एच0आई0 आरएनटीसीपी कार्यक्रम से जुडे है जिसमें बलगम की जॉच एवं उपचार प्रदान किया जा रहा है।इसी क्रम में डा0 पी0एस0 मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने विस्तृत जानकारी देते हुये बताया कि टी0बी0 एक सक्रांमक रोग है जो माइकाबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस द्वारा फैलता है यह रोग लगभग 85 प्रतिशत रोगियो में फैफड़ो के तथा 15 रोगियो में मस्तिश्क, जननांग, आँत, हृदय, स्नायुतन्त्र, मूत्रांग एवं हड्डियो को प्रभावित करता है।
जनपद मुजफ्फरनगर ने टी0बी0 रोग के उपचार एवं बचाव के बारे में प्रकाश डालते हुये बताया कि टी0बी के रोगियो के उपचार हेतु वर्तमान में एफ0डी0सी0 दी जा रही है जो माह अक्टूबर 2018 से जनपद में प्रारम्भ की जा चुकी है, इसकरा नियमानुसार उपचार लेने पर रोगी पूर्णतया रोग मुक्त हो जाता है। डा0 पी0एस0 मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने टी0बी0 से बचाव के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि रोगी को खॉसते छीकते समय मुॅह पर कपडा अवश्य रखना चाहिये। रोगी इधर-उधर न थूके। रोगी अपने घर के से समस्त सहयोग की टीबी रोग के लिए जॉच कराये। रोगी नियमित रूप से पूरा इलाज कराये। बीडी, सिगरेट, तम्बाकू, षराब आदि बुरे व्यसनों से दूर रहे।
उन्होंने बताया कि टी.बी. के ऐसे रोगी जो अपना इलाज पूर्ण नही करते है उन रोगियो में एम0डी0आर0 रोगी होने की सम्भावना बढ़ जाती है। एमडीआर टी0बी0 रोगी की बलगम की जॉच कल्चर एवं ड्रग सेन्टीविटी टेस्ट विधि द्वारा डीआरटीबी सेन्टर पर की जाती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 पी0एस0 मिश्रा ने कहा कि टीबी रोग का उपचार एक कारगर उपचार है यह रोग पूर्णतया ठीक हो जाता है, बलगम की जॉच एवं उपचार की सुविधा समस्त स्वास्थ्य केन्द्रो पर निःशुल्क उपलब्ध है। सीबीनैट द्वारा जांच सुविधा जिला क्षय रोग केन्द्र पर उपलब्ध है।
