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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने Qatar की सुरक्षा का लिया ठोस कदम, कार्यकारी आदेश पर किए हस्ताक्षर-माफी भी मंगवाई नेतन्याहू से

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें Qatar को किसी भी प्रकार के हमले से बचाने का वचन दिया गया। आदेश में कहा गया है कि अगर कतर पर किसी भी प्रकार का हमला होता है तो अमेरिका उसे पूरी तरह से रक्षा करेगा, और इसे अमेरिका की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा। इसके अलावा, इस आदेश में यह भी जोड़ा गया है कि हमले की स्थिति में अमेरिका सभी उपाय करेगा, चाहे वो राजनयिक हों, आर्थिक हों या फिर जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी करनी पड़े।

इजराइली हमले का असर और ट्रम्प की प्रतिक्रिया
यह कदम इजराइल द्वारा 9 सितंबर को दोहा में किए गए हमले के बाद उठाया गया था, जिसमें हमास आतंकियों को निशाना बनाकर छह लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद कतर की सुरक्षा के लिए दबाव बढ़ा था, और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर कतर को सुरक्षा देने का दबाव था। 29 सितंबर को, ट्रम्प ने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी को फोन कराकर माफी भी मंगवाई थी। व्हाइट हाउस में नेतन्याहू के साथ बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी, और एक दिन बाद व्हाइट हाउस ने इसके साथ जुड़ी तस्वीरें भी साझा की।

कतर का अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर स्वागत
ट्रम्प के इस कार्यकारी आदेश पर कतर ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम बताया। कतर के प्रसिद्ध चैनल अल-जजीरा ने इसे इजराइली हमले के बाद अमेरिकी सुरक्षा गारंटी के रूप में देखा। इससे पहले, ट्रम्प ने कतर के शासक शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बातचीत की थी। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस बातचीत के विवरण को साझा नहीं किया, लेकिन कतर ने कहा कि दोनों नेताओं ने गाजा युद्ध में सीजफायर की कोशिशों पर चर्चा की थी।

कानूनी चुनौतियां और संसद की मंजूरी
न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ट्रम्प के कतर को सुरक्षा गारंटी देने के फैसले के बाद कुछ कानूनी सवाल भी उठे हैं। अमेरिका में सामान्य रूप से किसी भी रक्षा संधि को कानूनी रूप से मान्यता देने के लिए संसद की मंजूरी की जरूरत होती है। हालांकि, कई बार राष्ट्रपति खुद ऐसे समझौते कर लेते हैं, जैसे 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ परमाणु समझौता बिना संसद की मंजूरी के किया था। फिर भी, सैन्य कार्रवाई के फैसले में अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के हाथ में होते हैं। ट्रम्प के कार्यकाल में नाटो जैसे पुराने समझौतों पर सवाल उठे थे, जिससे इस फैसले को लेकर कुछ संदेह उत्पन्न हो रहे हैं।

ट्रम्प के फैसले पर आलोचना और समर्थन
ट्रम्प के इस फैसले की अमेरिका में आलोचना भी हुई है। उनकी करीबी और विवादित दक्षिणपंथी कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया, “मैं कतर के लिए मरना नहीं चाहती, क्या आप चाहते हैं?” वहीं, वॉल स्ट्रीट जर्नल के संपादकीय बोर्ड ने इसे बिना किसी सार्वजनिक बहस के अचानक लिया गया फैसला करार दिया। वहीं, ट्रम्प के इस कदम का समर्थन भी किया गया, विशेष रूप से उन कारणों के लिए जो दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को स्थापित करने में सहायक होंगे।

कतर की अहमियत ट्रम्प के लिए
अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए कतर की अहमियत को समझना बेहद जरूरी है। इसके पीछे कई कारण हैं:

  1. आर्थिक सौदा – ट्रम्प ने 2025 में दोहा दौरे के दौरान कतर से 243.5 बिलियन डॉलर (करीब 20 लाख करोड़ रुपये) की डील की थी, जिसमें कतर एयरवेज बोइंग से 160 विमान खरीदेगा।

  2. मिलिट्री बेस – कतर में स्थित अल उदीद एयर बेस मिडल ईस्ट में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है, जहां से अमेरिका की सेंट्रल कमांड कार्य करती है।

  3. शांति वार्ता में भूमिका – कतर गाजा में इजराइल और हमास के बीच शांति वार्ता का मध्यस्थ है, जो ट्रम्प की शांति योजना के लिए बेहद अहम है।

  4. गिफ्ट – कतर ने ट्रम्प को 400 मिलियन डॉलर (लगभग 3400 करोड़ रुपये) का बोइंग 747-8 विमान गिफ्ट दिया था।

अमेरिका और कतर के रिश्ते
अमेरिका और कतर के रिश्ते पहले से मजबूत रहे हैं। 2022 में, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कतर को ‘प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी’ का दर्जा दिया था, जो दोनों देशों के बीच रक्षा और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करता है।

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