गली क्रिकेट से एशिया कप फाइनल तक: इंटरनेशनल अंपायर Ahmad Shah Pakteen का अविश्वसनीय सफर, IND-PAK मैचों के दबाव पर बड़ा खुलासा
News-Desk
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Afghanistan umpire journey, Ahmad Shah Pakteen, Ahmad Shah Pakteen interview, Asia Cup Final 2025, Asia Cup umpire, cricket umpiring story, high-voltage matches, IND-PAK match pressure, India Pakistan cricket controversy, refugee camp to cricket, umpiring challengesक्रिकेट की दुनिया में कई सितारे खिलाड़ी बनकर चमकते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं जो हलचल के बीच शांत खड़े रहते हैं—मैच के प्रवाह को नियंत्रित करते हुए, दबाव को अपने ऊपर लेने की क्षमता रखते हुए। अफगानिस्तान के इंटरनेशनल अंपायर Ahmad Shah Pakteen उन्हीं चेहरों में से एक हैं।
एशिया कप 2025 के फाइनल में उनकी अंपायरिंग ने दुनिया भर का ध्यान खींचा। पर असल कहानी इससे भी अधिक दिलचस्प है—उनका सफर, उनकी मेहनत, और उनका जज्बा।
पकतीन बताते हैं—
“भारत-पाकिस्तान के मैचों पर हमेशा ज्यादा दबाव रहता है। लेकिन ऐसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में बार-बार अंपायरिंग मिलना किसी भी अंपायर के लिए सम्मान की बात है।”
शुरुआत रिफ्यूजी कैम्प से—युद्ध के साए में जन्मी एक क्रिकेट यात्रा
अहमद शाह पकतीन की कहानी आसान नहीं थी।
रूस- अफगानिस्तान संघर्ष के बाद 1982 में वे अपने परिवार के साथ रिफ्यूजी कैम्प में जा बसे। तब उनकी उम्र मात्र 5–6 साल थी।
पकतीन कहते हैं—
“हम पेशावर में रहे। वहीं पहली बार क्रिकेट देखा, खेलना शुरू किया और TV देखकर दिलचस्पी बढ़ती गई। शुरू में फुटबॉल खेलता था, लेकिन मोहल्लों में इतनी क्रिकेट होती थी कि फुटबॉल छोड़नी ही पड़ी।”
यहीं से क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा बन गया—बिना अंदाज़ा किए कि भविष्य में वही क्रिकेट उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मैचों तक ले जाएगा।
बचपन का पन्ना—‘हमेशा मैं ही अंपायर बनता था’
गली क्रिकेट के दिनों को याद करते हुए पकतीन हंसते हुए कहते हैं—
“जब मोहल्ले में टेनिस-बॉल मैच होते थे, तो ज्यादातर मैं ही अंपायर बनता था। अगर बैटिंग नहीं करनी होती, तो पूरा मैच खड़ा होकर मैं ही कराता था।”
शायद यह किस्मत का संकेत था कि आगे चलकर वे अफगानिस्तान के सबसे सफल इंटरनेशनल अंपायरों में से एक बनेंगे।
खिलाड़ी बनने का सपना क्यों टूटा? और अंपायरिंग क्यों चुनी?
पकतीन बताते हैं कि 2001 के बाद अफगानिस्तान में क्रिकेट का ढांचा खड़ा होना शुरू हुआ।
लेकिन उस समय तक उनकी उम्र ऐसी हो चुकी थी कि प्रोफेशनल खिलाड़ी बन पाना मुश्किल था।
तभी उन्होंने सोचा—
“खेल के मैदान से जुड़े रहने का एक ही तरीका था—अंपायरिंग। मैंने टारगेट रखा कि पहला अफगान इंटरनेशनल अंपायर बनूंगा… और वही हुआ।”
महत्वाकांक्षा, दृढ़ता और स्पष्ट लक्ष्य—यही उनकी सफलता की नींव बने।
बड़ी सीरीज और बड़े मैच—कैसे मिला मौका?
पकतीन बताते हैं—
“मेहनत, सीखने की भूख और लगातार बेहतर करने की इच्छा ने मुझे मौका दिलाया। टेस्ट, वनडे, टी20, लीग—हर फॉर्मेट में अंपायरिंग करने का मौका मिला। यह अफगान अंपायरिंग के लिए गर्व की बात है।”
उनकी अंपायरिंग शैली शांत, धैर्यपूर्ण और बेहद नियंत्रण में रहने वाली मानी जाती है—जो बड़े मैचों में बहुत काम आती है।
इंटरनेशनल करियर में अंग्रेज़ी क्यों जरूरी थी?
अंपायरिंग के नियम और संवाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सिर्फ इंग्लिश में होते हैं।
पकतीन बताते हैं—
“स्कूल में इंग्लिश पढ़ी थी, लेकिन 2000 के बाद खासतौर पर कई कोर्स किए ताकि इंटरनेशनल लेवल पर अंपायरिंग संभाल सकूं।”
उनकी यह तैयारी आज उन्हें दुनिया के सबसे भरोसेमंद अंपायरों में गिनती दिला चुकी है।
भारत में इंटरनेशनल डेब्यू—नोएडा से जुड़ी यादें
अहमद शाह पकतीन का इंटरनेशनल डेब्यू ग्रेटर नोएडा में हुआ।
वह याद करते हैं—
“नोएडा शांत, साफ और आरामदायक शहर है। वहां मेरा अनुभव बेहतरीन रहा।”
भारत में क्रिकेट के जुनून और वहां मिली सम्मान ने उनके करियर को नई दिशा दी।
एशिया कप 2025—अभिषेक शर्मा vs हारिस रऊफ विवाद कैसे संभाला?
सुपर-4 मुकाबले में भारत के अभिषेक शर्मा और पाकिस्तान के हारिस रऊफ के बीच गर्मागर्मी छिड़ गई थी।
माहौल तनावपूर्ण था।
अहमद शाह बताते हैं—
“मैच गर्म था, खिलाड़ी भी चार्ज थे। मैंने दोनों को कहा—‘बल्ले और गेंद से बात करो, मुंह से नहीं।’ कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ी पश्तो जानते थे, इसलिए बातचीत आसान रही।”
उनके हस्तक्षेप ने अहम क्षण में विवाद को शांत कर दिया।
IND–PAK फाइनल—दबाव का पहाड़ और अंपायर का धैर्य
पकतीन ने बताया—
“हर मैच में दबाव होता है, लेकिन भारत-पाकिस्तान फाइनल अलग स्तर का होता है। हमने खुद को मानसिक रूप से बहुत तैयार किया, पूरी फोकस के साथ मैच संभाला। अल्लाह का शुक्र कि मैच बिना विवाद के समाप्त हुआ।”
बाद में जब उन्होंने टीवी पर क्लिप देखी, तब समझ आया कि कितना बड़ा तनाव उस पल में था।
ट्रॉफी विवाद—अंपायर ने क्या कहा?
फाइनल के बाद ट्रॉफी को लेकर पाकिस्तान में बड़ा विवाद छिड़ा था।
भारतीय टीम ने इसे लेने से इनकार कर दिया था।
इस पर पकतीन ने कहा—
“हम मैच खत्म होने के बाद तुरंत निकल गए थे। बाद में पता चला। हमारी ड्यूटी थी मैच को निष्पक्षता से खत्म करना, और हमने वह किया।”
IND–PAK मैचों के अनुभव—यह हर अंपायर का सपना
पकतीन कहते हैं—
“भारत-पाकिस्तान मैचों का दबाव अलग होता है। लेकिन बार-बार ऐसे मैचों में मौका मिलना किसी भी अंपायर के करियर की पहचान है। मेहनत और फोकस से यह संभाला जा सकता है।”
एशिया कप विवाद—टूर्नामेंट के दौरान लगातार तनाव
2025 एशिया कप में विवादों की कमी नहीं रही—
भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से इनकार किया
पाकिस्तान ने “6-0 ऑपरेशन सिंदूर” का फर्जी दावा दोहराया
मैदान में तीखे इशारे
फाइनल के बाद ट्रॉफी विवाद
इन सबके बीच अंपायरिंग करना आसान नहीं था, लेकिन पकतीन और उनकी टीम ने स्थितियों को संभालकर मैचों को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया।
Ahmad Shah Pakteen interview का भविष्य—“और बड़े मैचों में मौका चाहता हूं”
अहमद शाह पकतीन का लक्ष्य बिल्कुल साफ है—
“मैं और बड़े मुकाबले करना चाहता हूं। खासकर भारत-पाकिस्तान जैसे हाई-प्रोफाइल मैच—क्योंकि इसमें अंपायरिंग करना गर्व की बात है।”
उनकी कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में जन्मा एक सपना भी दुनिया के सबसे बड़े मंच पर चमक सकता है।

