राष्ट्रपति भवन में भारत-यूरोप डिनर डिप्लोमेसी: Ursula von der Leyen का बड़ा बयान—“भारत ग्लोबल राजनीति के टॉप पर”, रणनीतिक साझेदारी को मिली नई रफ्तार
India Europe strategic partnership dinner—नई दिल्ली के ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में मंगलवार की शाम सिर्फ एक औपचारिक डिनर नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के रिश्तों में एक नया अध्याय लिखा गया। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट Ursula von der Leyen के सम्मान में आयोजित इस विशेष समारोह ने कूटनीति, रणनीति और सांस्कृतिक सौहार्द का ऐसा संगम पेश किया, जिसने वैश्विक राजनीति में भारत-यूरोप साझेदारी की बढ़ती भूमिका को एक बार फिर केंद्र में ला दिया।
कार्यक्रम के दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन का बयान—“भारत ग्लोबल राजनीति के टॉप पर पहुंच गया है”—कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। इसे यूरोप की ओर से भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और बढ़ते प्रभाव की औपचारिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।
🔴 राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश: साझा सोच, साझा जिम्मेदारी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में भारत और यूरोप की सोच और दृष्टिकोण एक जैसे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक अस्थिरता और तकनीकी बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना केवल सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने भारत और यूरोप को “मूल्यों पर आधारित साझेदार” बताते हुए कहा कि लोकतंत्र, कानून के शासन और बहुपक्षीय सहयोग जैसे सिद्धांत दोनों पक्षों को करीब लाते हैं। उनका यह संदेश स्पष्ट था कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक नेतृत्व के स्तर पर भी एक मजबूत उदाहरण बनेगी।
🔴 प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
इस डिनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कई वरिष्ठ मंत्री व राजनयिक शामिल हुए। यह उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि भारत इस साझेदारी को केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद हस्तियों के बीच अनौपचारिक बातचीत और विचार-विमर्श ने भी यह दिखाया कि भारत-यूरोप संबंध अब बहु-आयामी रूप ले चुके हैं—जहां राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और तकनीक एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।
🔴 Ursula von der Leyen का संदेश: भारत की वैश्विक भूमिका का स्वागत
यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत का वैश्विक राजनीति में शीर्ष पर पहुंचना एक ऐसा विकास है, जिसका यूरोप स्वागत करता है। उन्होंने भारत को एक “विश्वसनीय और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार” बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है।
उनके मुताबिक, भारत और यूरोप मिलकर वैश्विक स्थिरता, हरित ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन और मुक्त व्यापार जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व कर सकते हैं। यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यूरोप एशिया में भारत को एक प्रमुख रणनीतिक धुरी के रूप में देख रहा है।
🔴 एंटोनियो कोस्टा: शिखर सम्मेलन के नतीजों पर गर्व
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में भारत और यूरोप की रणनीतिक साझेदारी का बड़ा आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व है। उन्होंने कहा कि उन्हें उस दिन हुए शिखर सम्मेलन के नतीजों पर गर्व है।
कोस्टा के अनुसार, दोनों पक्षों ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, सुरक्षा और डिफेंस पार्टनरशिप तथा 2030 के लिए संयुक्त रणनीतिक एजेंडा पर ठोस प्रगति की है। उन्होंने इसे वैश्विक मुद्दों पर सहकारी नेतृत्व का एक उदाहरण बताया।
🔴 फ्री ट्रेड से लेकर डिफेंस तक: साझेदारी का विस्तार
भारत और यूरोप के बीच लंबे समय से प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर फिर से गति आती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक “गेम चेंजर” साबित हो सकता है, जिससे निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
डिफेंस और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी नई पहल की चर्चा हुई। साइबर सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों पर दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
🔴 राष्ट्रपति भवन का माहौल: कूटनीति और संस्कृति का संगम
राष्ट्रपति भवन की भव्यता और भारतीय परंपरा के साथ यूरोपीय मेहमानों का स्वागत एक खास माहौल रच रहा था। औपचारिक कूटनीति के बीच सांस्कृतिक संवाद भी देखने को मिला, जहां भारतीय और यूरोपीय प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे की परंपराओं और मूल्यों को करीब से समझा।
इस तरह के आयोजन केवल राजनीतिक समझौतों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों के बीच विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत करते हैं।
🔴 डिनर मेन्यू में हिमालयी स्वाद की झलक
इस विशेष डिनर का एक आकर्षण रहा इसका अनोखा मेन्यू, जिसमें हिमालयी व्यंजनों पर खास फोकस किया गया था। मेहमानों को जाखिया आलू के साथ हरी टमाटर की चटनी, मेआ लून और सफेद चॉकलेट के साथ झांगोरा की खीर जैसे व्यंजनों से स्वागत किया गया।
सूप कोर्स में सुंदरकला थिचोनी परोसी गई, जबकि मेन कोर्स में खसखस और भुने हुए टमाटर की चटनी के साथ हिमाचली स्वर्णु चावल और सोलन मशरूम शामिल थे। साथ में राई के पत्ते, कश्मीरी अखरोट और अखुनी से बनी तीन तरह की चटनियों ने स्वाद को और खास बना दिया।
🔴 डेजर्ट में कश्मीर और हिमालय की मिठास
डेजर्ट के तौर पर हिमालयी रागी और कश्मीरी सेब का केक परोसा गया, जिसमें तिमरू और सी बकथॉर्न क्रीम, खजूर और कच्चे कोको के साथ कॉफी कस्टर्ड और हिमालयी शहद से सजा परसिमन शामिल था।
इन व्यंजनों को मशहूर शेफ प्रतीक साधु और कमलेश नेगी के सहयोग से तैयार किया गया, जिन्होंने भारतीय पहाड़ी खानपान की विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दी।
🔴 भारत-यूरोप संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत और यूरोप के रिश्ते दशकों पुराने हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनमें नई ऊर्जा देखने को मिली है। जलवायु परिवर्तन, इंडो-पैसिफिक रणनीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के हित तेजी से एक-दूसरे के करीब आए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि बदलती वैश्विक शक्ति संरचना में यूरोप भारत को एशिया में एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहा है, जबकि भारत यूरोप को तकनीक, निवेश और वैश्विक कूटनीति में एक अहम सहयोगी मानता है।
🔴 2030 एजेंडा: साझा भविष्य की रूपरेखा
2030 के लिए संयुक्त रणनीतिक एजेंडा पर चर्चा इस डिनर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इसमें हरित ऊर्जा, डिजिटल इनोवेशन, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की योजना शामिल है।
इस एजेंडे का मकसद केवल सरकारी स्तर पर सहयोग नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों के बीच भी साझेदारी को बढ़ावा देना है।
🔴 वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
उर्सुला वॉन डेर लेयेन का “भारत ग्लोबल राजनीति के टॉप पर” वाला बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक नीति-निर्धारण में एक निर्णायक आवाज बन चुका है।
चाहे जी-20 की अध्यक्षता हो, जलवायु वार्ताएं हों या वैश्विक सप्लाई चेन का पुनर्गठन—भारत की भूमिका को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।
🔴 आगे की राह: साझेदारी से सह-नेतृत्व की ओर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और यूरोप का रिश्ता अब पारंपरिक “साझेदारी” से आगे बढ़कर “सह-नेतृत्व” की ओर जा सकता है। जहां दोनों मिलकर न केवल अपने हितों की रक्षा करेंगे, बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए दिशा भी तय करेंगे।
राष्ट्रपति भवन में हुआ यह डिनर इसी बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया—जहां मेज पर सिर्फ व्यंजन नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतियां और साझा सपने भी रखे गए।

