Ghazipur विनीत राय हत्याकांड: लापरवाही पर तत्कालीन कोतवाल और उपनिरीक्षक निलंबित, डीआईजी ने दिए विभागीय जांच के आदेश
Ghazipur Vineet Rai Murder Case में पुलिस प्रशासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए घटना से पहले मिली शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई न करने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) वैभव कृष्ण ने शहर कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक दीनदयाल पांडेय और तत्कालीन हल्का प्रभारी उपनिरीक्षक चंद्रशंकर मिश्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं।
इसके साथ ही दोनों पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि घटना से पहले कटरा गैंग की गतिविधियों को लेकर कई बार पुलिस को अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
लापरवाही के आरोप में हुई कार्रवाई
डीआईजी कार्यालय की ओर से की गई कार्रवाई में कहा गया कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शिकायतों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई।
आरोप है कि यदि समय रहते आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती, तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि शिकायतों पर पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी और कहीं सेवा संबंधी दायित्वों के निर्वहन में कोई लापरवाही तो नहीं हुई।
क्या है विनीत राय हत्याकांड?
यह मामला गाजीपुर के शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित अष्टभुजी कॉलोनी का है।
जानकारी के अनुसार होटल व्यवसायी आलोक राय के पुत्र और युवा कारोबारी विनीत राय की 29 मई की रात हत्या कर दी गई थी।
पुलिस के अनुसार इस मामले में शंकर पांडेय, आलोक दुबे सहित अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। घटना के बाद शहर कोतवाली में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुरानी रंजिश से जुड़ा बताया गया मामला
पुलिस जांच में सामने आया कि यह विवाद कथित रूप से 8 दिसंबर 2023 से चली आ रही आपसी रंजिश से जुड़ा हुआ था।
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि घटना तक पहुंचने वाले विवाद की पृष्ठभूमि क्या थी और किन परिस्थितियों में यह गंभीर आपराधिक घटना हुई।
मामले की आपराधिक जांच पहले से ही संबंधित एजेंसियों द्वारा जारी है।
मृतक के पिता ने डीआईजी से की थी शिकायत
मृतक विनीत राय के पिता आलोक राय ने 15 जुलाई को वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी को प्रार्थना पत्र सौंपा था।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- कटरा गैंग की गतिविधियों को लेकर कई बार पुलिस को लिखित शिकायतें दी गई थीं।
- स्थानीय पुलिस को संभावित खतरे से अवगत कराया गया था।
- इसके बावजूद कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
- इसी कारण आरोपियों का मनोबल बढ़ा और बाद में गंभीर घटना घटित हुई।
इन्हीं आरोपों के आधार पर मामले की समीक्षा की गई, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई।
विभागीय जांच में तय होगी जिम्मेदारी
निलंबन के साथ ही दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि—
- प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड क्या था।
- उन पर किस प्रकार की कार्रवाई की गई।
- क्या निर्धारित पुलिस प्रक्रिया का पालन किया गया।
- यदि कहीं लापरवाही या कर्तव्य में चूक पाई जाती है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जवाबदेही पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस की जवाबदेही और समय पर कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संभावित आपराधिक गतिविधियों की शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाए, तो कई गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है।
हालांकि, इस मामले में पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मामले की जांच जारी
विनीत राय हत्याकांड की आपराधिक जांच पहले से जारी है, जबकि अब पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर अलग से विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
प्रशासन का कहना है कि दोनों प्रक्रियाएं नियमानुसार आगे बढ़ेंगी और उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

