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कांवड़ यात्रा-2026 बनी पर्यावरण संरक्षण का मंच: मुजफ्फरनगर से शुरू हुई ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’, अब प्लास्टिक नहीं बनेगा कचरा बल्कि संसाधन-PET Bottle Recycling

श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा-2026 केवल आस्था और श्रद्धा का महापर्व ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। इसी उद्देश्य के साथ एसोसिएशन ऑफ पीईटी रीसाइक्लर्स भारत (APR Bharat) ने मुजफ्फरनगर से ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ नामक विशेष जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी (PET Bottle Recycling) बोतल केवल प्लास्टिक कचरा नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और संसाधनों के लिए एक मूल्यवान संपत्ति बन सकती है।

15 दिनों तक चलने वाले इस पायलट अभियान के तहत विशेष रूप से तैयार की गई एक जागरूकता वैन मुजफ्फरनगर और मेरठ में कांवड़ यात्रा मार्ग के प्रमुख स्थलों पर संचालित की जाएगी। इस दौरान श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को प्लास्टिक कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन तथा पीईटी बोतलों के पृथक संग्रह के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।


‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ से मिलेगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Bottle Ki Recycle Yatra का उद्देश्य केवल प्लास्टिक कचरा एकत्र करना नहीं, बल्कि लोगों की सोच में बदलाव लाना भी है। अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि प्लास्टिक का जिम्मेदारीपूर्वक संग्रह और वैज्ञानिक तरीके से पुनर्चक्रण किया जाए, तो वही प्लास्टिक दोबारा उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है।

आयोजकों का कहना है कि कांवड़ यात्रा जैसे विशाल धार्मिक आयोजन लाखों लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचाने का सर्वोत्तम अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण को धार्मिक आस्था से जोड़कर समाज में व्यापक जागरूकता पैदा की जा सकती है।


मुजफ्फरनगर और मेरठ के चार प्रमुख स्थलों पर चलेगा अभियान

15 दिनों के इस विशेष अभियान के तहत तैयार की गई जागरूकता वैन मुजफ्फरनगर और मेरठ में कांवड़ यात्रा मार्ग के चार प्रमुख स्थानों पर पहुंचेगी।

यह मोबाइल वैन लोगों को बताएगी कि पीईटी बोतलों को अन्य कचरे से अलग क्यों रखना चाहिए, उनका वैज्ञानिक निपटान कैसे किया जाता है और पुनर्चक्रण की पूरी प्रक्रिया किस प्रकार कार्य करती है।

अभियान के दौरान एकत्रित सभी पीईटी बोतलों को औपचारिक रीसाइक्लिंग प्रणाली तक पहुंचाया जाएगा, जहां उन्हें पुनः उपयोग योग्य सामग्री में परिवर्तित किया जाएगा।


पत्रकार वार्ता में गौतम जैन ने बताई अभियान की आवश्यकता

मुजफ्फरनगर के बालाजी चौक स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान एपीआर भारत के डायरेक्टर जनरल गौतम जैन ने अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भारत सरकार आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। ऐसे में रीसाइक्लिंग की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की संसाधन सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ी हुई है।


रीसाइक्ल्ड PET से घटेगी आयात पर निर्भरता

गौतम जैन के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले लगातार व्यवधानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल वर्जिन पॉलिमर पर निर्भर रहना भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने बताया कि रीसाइक्ल्ड पीईटी (R-PET) का व्यापक उपयोग देश की संसाधन सुरक्षा को मजबूत करेगा, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करेगा और घरेलू पैकेजिंग उद्योग को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर रीसाइक्लिंग अपनाने से पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं।


‘फेंकी गई बोतल अंत नहीं, नई शुरुआत है’

अभियान के दौरान गौतम जैन ने कहा कि ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ का मूल उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी बोतल अपनी यात्रा समाप्त नहीं करती, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत करती है।

उन्होंने कहा कि यदि बोतलों को अलग-अलग एकत्र कर औपचारिक रीसाइक्लिंग प्रणाली तक पहुंचाया जाए, तो उनसे नई बोतलें और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

उनके अनुसार, जिम्मेदार उपयोग के साथ-साथ जिम्मेदार निपटान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही सर्कुलर अर्थव्यवस्था की नींव है।


सरकार ने 2026-27 तक रखा है महत्वपूर्ण लक्ष्य

पत्रकार वार्ता के दौरान बताया गया कि सरकार ने वर्ष 2026-27 तक प्लास्टिक पैकेजिंग में 40 प्रतिशत रीसाइक्ल्ड सामग्री के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया है।

हालांकि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक होगी।

एपीआर भारत का मानना है कि ऐसे अभियान लोगों को व्यवहारिक रूप से रीसाइक्लिंग प्रक्रिया से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।


सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) का अर्थ है संसाधनों का अधिकतम उपयोग और पुनः उपयोग सुनिश्चित करना।

पीईटी बोतलों की रीसाइक्लिंग से न केवल प्लास्टिक कचरा कम होता है, बल्कि नए कच्चे माल की आवश्यकता भी घटती है। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाने में मदद मिलती है।

अभियान के दौरान लोगों को इन सभी पहलुओं की जानकारी सरल और व्यवहारिक तरीके से दी जाएगी।


मोबाइल सूचना एवं संग्रह केंद्र के रूप में काम करेगी जागरूकता वैन

अभियान के लिए तैयार की गई विशेष वैन केवल प्रचार वाहन नहीं होगी, बल्कि यह मोबाइल सूचना एवं संग्रह केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी।

यहां लोगों को बताया जाएगा कि पीईटी बोतलों को अन्य कचरे से अलग रखने के क्या लाभ हैं, वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग कैसे होती है और आम नागरिक इस प्रक्रिया में कैसे योगदान दे सकते हैं।

साथ ही अभियान के दौरान एकत्रित की गई सभी बोतलों को औपचारिक रीसाइक्लिंग श्रृंखला में भेजा जाएगा, जिससे लोगों को सर्कुलर इकोनॉमी का व्यावहारिक उदाहरण भी देखने को मिलेगा।


कांवड़ यात्रा के माध्यम से लाखों लोगों तक पहुंचेगा संदेश

हर वर्ष कांवड़ यात्रा में देशभर से लाखों श्रद्धालु मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं।

आयोजकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग का संदेश पहुंचाना इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

यदि श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपयोग के बाद पीईटी बोतलों का जिम्मेदारीपूर्वक निपटान करना शुरू करें, तो प्लास्टिक कचरे की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


 

मुजफ्फरनगर से शुरू हुई ‘बॉटल की रीसायकल यात्रा’ पर्यावरण संरक्षण, संसाधन सुरक्षा और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता पहल है। कांवड़ यात्रा-2026 जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के माध्यम से लाखों लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि उपयोग के बाद फेंकी गई पीईटी बोतल कचरा नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण के जरिए दोबारा उपयोग में आने वाला मूल्यवान संसाधन है। यदि नागरिक जिम्मेदारी के साथ प्लास्टिक का पृथक संग्रह और वैज्ञानिक निपटान अपनाएं, तो स्वच्छ भारत, हरित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिल सकता है।

 

Shashank Goel

शशांक गोयल शिक्षा की दृष्टि से मैकेनिकल इंजीनियर हैं लेकिन फिर भी एक संवेदनशील कवि, रचनात्मक कंटेंट राइटर और लोकप्रिय लेखक भी हैं। उनकी कविताएं, लेख और प्रेरक विचार प्रबुद्ध पाठकों और युवा वर्ग के बीच विशेष रूप से सराहे जाते हैं।

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