कांवड़ यात्रा 2026: बरला Muzaffarnagar में भाकियू अराजनैतिक का भव्य सेवा शिविर शुरू, 24 घंटे शिवभक्तों के लिए भोजन, चिकित्सा और विश्राम की निशुल्क व्यवस्था
श्रावण मास की पावन कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों शिवभक्तों की सेवा और सुविधा के लिए सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी लगातार देखने को मिल रही है। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 स्थित Muzaffarnagar बरला में एक भव्य निःशुल्क कांवड़ सेवा शिविर का शुभारंभ किया है। श्रद्धालुओं की सेवा को समर्पित इस शिविर में भोजन, पेयजल, प्राथमिक उपचार, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है, ताकि लंबी पैदल यात्रा कर रहे कांवड़ियों को राहत और आराम मिल सके।
सेवा शिविर का उद्घाटन संजीव जावला ने फीता काटकर किया। उद्घाटन अवसर पर बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। शिविर शुरू होते ही बड़ी संख्या में कांवड़ियों ने यहां पहुंचकर व्यवस्थाओं का लाभ उठाया और आयोजकों की सेवा भावना की सराहना की।
कांवड़ सेवा शिविर में श्रद्धालुओं के लिए हर जरूरी सुविधा उपलब्ध
बरला स्थित इस सेवा शिविर में शिवभक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, गर्मागर्म चाय, ताजे फल और समय-समय पर पौष्टिक भोजन (भंडारा) उपलब्ध कराया जा रहा है।
आयोजकों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु लगातार कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। ऐसे में उन्हें समय पर भोजन और पेयजल मिलना अत्यंत आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से शिविर में दिन-रात भोजन और जलपान की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
शिविर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का स्वागत सेवा भाव के साथ किया जा रहा है, जिससे यहां का वातावरण पूरी तरह श्रद्धा, सहयोग और मानव सेवा की भावना से ओतप्रोत दिखाई देता है।
थके हुए कांवड़ियों के लिए चिकित्सा और फर्स्ट एड की विशेष व्यवस्था
लंबी दूरी की पैदल यात्रा के दौरान कांवड़ियों के पैरों में छाले पड़ना, शरीर में थकान, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामान्य रूप से देखने को मिलती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सेवा शिविर में योग्य डॉक्टरों की देखरेख में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की विशेष व्यवस्था की गई है।
आवश्यक दवाएं, पट्टियां और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखी गई है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को तत्काल राहत मिल सके। यदि किसी कांवड़िये को अधिक चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है तो उसे समय रहते संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं से भी जोड़ा जा रहा है।
आयोजकों का मानना है कि कांवड़ियों की सेवा केवल भोजन कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
विश्राम के लिए हवादार टेंट, पंखे और गद्देदार बिस्तरों की व्यवस्था
कांवड़ यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु लगातार कई घंटों तक पैदल चलते हैं। ऐसे में उन्हें कुछ समय विश्राम की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए शिविर में हवादार टेंट, पंखों और गद्देदार बिस्तरों की समुचित व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालु यहां कुछ समय विश्राम करने के बाद अपनी यात्रा पुनः प्रारंभ कर रहे हैं। विशेष रूप से दोपहर की गर्मी और रात के समय यह सुविधा कांवड़ियों के लिए काफी राहतभरी साबित हो रही है।
आयोजकों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विश्राम स्थल पर स्वच्छता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए, जिससे श्रद्धालुओं को स्वस्थ वातावरण मिल सके।
मोबाइल चार्जिंग की सुविधा भी बनी आकर्षण का केंद्र
आधुनिक समय में मोबाइल फोन यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। परिवार से संपर्क बनाए रखने और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए मोबाइल का चार्ज रहना जरूरी होता है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शिविर में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट भी स्थापित किए गए हैं। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां अपने मोबाइल फोन चार्ज कर रहे हैं, जिससे उनकी यात्रा और अधिक सुविधाजनक बन रही है।
श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसी सुविधाएं लंबी यात्राओं में काफी मददगार साबित होती हैं।
भाकियू अराजनैतिक ने बताया सेवा ही सबसे बड़ा धर्म
शिविर के शुभारंभ अवसर पर भाकियू अराजनैतिक के मंडल महासचिव विपिन त्यागी और जानसठ तहसील अध्यक्ष अंकित जावला ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, अनुशासन और सेवा का महापर्व है।
उन्होंने कहा कि किसानों की परंपरा सदैव राहगीरों, जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं की निःस्वार्थ सेवा करने की रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संगठन ने इस सेवा शिविर का आयोजन किया है, ताकि हर शिवभक्त बिना किसी असुविधा के अपनी यात्रा पूरी कर सके।
उन्होंने बताया कि यह सेवा शिविर कांवड़ यात्रा की समाप्ति तक 24 घंटे निरंतर संचालित रहेगा और प्रत्येक श्रद्धालु को पूरी निष्ठा के साथ सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कांवड़ियों ने की व्यवस्थाओं की सराहना, जताया आभार
शिविर में जलपान और विश्राम के लिए पहुंचे अनेक शिवभक्तों ने यहां उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की।
श्रद्धालुओं का कहना था कि लंबी पैदल यात्रा के दौरान इस प्रकार के सेवा शिविर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। भोजन, चिकित्सा, विश्राम और अन्य सुविधाएं मिलने से उनकी यात्रा अधिक सहज और सुरक्षित हो जाती है।
कई कांवड़ियों ने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा की यह भावना भारतीय संस्कृति की पहचान है और ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।
सामाजिक समरसता और सेवा भावना का बना उदाहरण
कांवड़ यात्रा के दौरान लगाए जाने वाले सेवा शिविर केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं होते, बल्कि सामाजिक समरसता, सहयोग और मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक होते हैं।
बरला स्थित यह सेवा शिविर भी इसी भावना को आगे बढ़ाता दिखाई दे रहा है। यहां संगठन के कार्यकर्ता बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक श्रद्धालु की सेवा में जुटे हुए हैं। भोजन वितरण से लेकर चिकित्सा सहायता और विश्राम व्यवस्था तक सभी कार्य पूरी निष्ठा के साथ किए जा रहे हैं।
ऐसे आयोजन यह संदेश देते हैं कि धार्मिक आयोजनों की सफलता केवल प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता और सेवा भावना पर भी निर्भर करती है।
इन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की रही सक्रिय मौजूदगी
सेवा शिविर के शुभारंभ अवसर पर संगठन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से रामदत्त शर्मा, सुधीर शर्मा, अब्दुल्ला त्यागी, कमलजीत, राजीव सहरावत, रविकांत त्यागी, आर्यन, नुक्कू, विभोर त्यागी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
आयोजकों ने बताया कि सभी स्वयंसेवक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

