Kanpur: कारोबारी अमित हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुठभेड़ में गिरफ्तार, 58 मुकदमों वाले संजय ढाबा के अपराधों की लंबी फेहरिस्त
News-Desk
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Amit Kumar Murder, crime news, History-sheeter, Kakadev, kanpur, kanpur murder news, kanpur police, Police encounter, Sanjay Dhaba, sanjay singhKanpur के काकादेव इलाके में कारोबारी अमित कुमार की पीट-पीटकर हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने मामले में आरोपी और नवाबगंज थाने के हिस्ट्रीशीटर संजय सिंह चौहान उर्फ संजय ढाबा को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पनकी-सचेंडी बॉर्डर पर हुई कार्रवाई में पुलिस की गोली आरोपी के दोनों पैरों में लगी, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में पकड़ लिया गया।
पुलिस के मुताबिक संजय ढाबा कोई नया अपराधी नहीं है। उसके खिलाफ कानपुर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कुल 58 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस की जांच में उसके बारे में यह भी सामने आया है कि वह केवल मारपीट, लूट और अन्य आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि अवैध हथियारों के कारोबार से भी जुड़ा था।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, संजय सिंह पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ गुजैनी, कल्याणपुर, फजलगंज, नवाबगंज, काकादेव, बिठूर, कोतवाली, पनकी और स्वरूपनगर समेत कई थाना क्षेत्रों में मामले दर्ज हैं।
काकादेव में कारोबारी की हत्या से मचा था हड़कंप
काकादेव के ओम चौराहे पर कारोबारी अमित कुमार की हत्या के बाद इलाके में काफी आक्रोश था। आरोप है कि अमित को ईंट-पत्थर से बुरी तरह पीटा गया और सिर पर लगातार वार किए गए। घटना के बाद गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, नवीननगर पुरानी बस्ती निवासी अमित कुमार पांच सितंबर की रात करीब 11:30 बजे अपनी सुधा मार्केट के बाहर पानी पीने गए थे। इसी दौरान ओम चौराहे पर कुछ लोग शराब के नशे में गालीगलौज कर रहे थे।
आरोप है कि इनमें शास्त्रीनगर का हिस्ट्रीशीटर हितेंद्र श्रीवास्तव उर्फ मोनू नेता, कुशल श्रीवास्तव, संजय सिंह उर्फ संजय ढाबा और अश्विनी यादव शामिल थे।
बताया गया कि इसी दौरान एक आरोपी चौराहे के बीच पेशाब करने लगा। अमित कुमार ने इसका विरोध किया। इसके बाद विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने अमित को घसीटकर पीटना शुरू कर दिया। आरोप है कि ईंट-पत्थर से उनके सिर पर हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
पुलिस के मुताबिक अस्पताल में इलाज के दौरान घटना के दो दिन बाद अमित की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश तेज कर दी थी।
परिजनों ने निकाला था कैंडिल मार्च, आंदोलन की दी थी चेतावनी
अमित कुमार की हत्या के बाद परिवार में आक्रोश था। उनकी पत्नी शिवानी, बेटे रुद्र प्रताप और अर्पित ने पुलिस से मांग की थी कि मामले में शामिल सभी पेशेवर अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।
वारदात के तीसरे दिन परिजनों ने सैकड़ों लोगों के साथ कैंडिल मार्च भी निकाला था। परिवार की ओर से साफ कहा गया था कि यदि तीन दिन के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
ऐसे माहौल में पुलिस पर आरोपियों को जल्द पकड़ने का दबाव भी था। जांच टीमों ने अलग-अलग स्तर पर आरोपियों की तलाश शुरू की और सर्विलांस की मदद से संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
सर्विलांस से मिली लोकेशन, पनकी-सचेंडी बॉर्डर पर घेराबंदी
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार शाम सर्विलांस के जरिए संजय सिंह उर्फ संजय ढाबा की लोकेशन के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने पनकी-सचेंडी बॉर्डर के आसपास घेराबंदी की।
पुलिस के मुताबिक आरोपी को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान संजय ढाबा के दोनों पैरों में गोली लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा।
पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा। अब पुलिस उससे पूछताछ कर हत्याकांड से जुड़े अन्य पहलुओं और उसके साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
58 मुकदमों वाला है संजय ढाबा
संजय सिंह उर्फ संजय ढाबा का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ कुल 58 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। ये मुकदमे कानपुर के कई थाना क्षेत्रों में दर्ज हैं।
गुजैनी, कल्याणपुर, फजलगंज, नवाबगंज, काकादेव, बिठूर, कोतवाली, पनकी और स्वरूपनगर थाना क्षेत्रों में उसके खिलाफ मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस का कहना है कि वह लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहा है और पेशेवर अपराधी के रूप में उसकी पहचान रही है।
पुलिस की पूछताछ में उसके बारे में एक और अहम जानकारी सामने आई है। आरोप है कि संजय ढाबा अवैध हथियारों की सप्लाई से भी जुड़ा रहा है। इसके अलावा बिठूर, उन्नाव, शुक्लागंज और जाजमऊ क्षेत्र में अवैध सट्टे और जुए की बुक लगवाने की गतिविधियों से भी उसका संबंध बताया गया है।
लूटपाट की वारदातों में भी रहा नाम
पुलिस के मुताबिक संजय ढाबा का नेटवर्क केवल एक थाना क्षेत्र तक सीमित नहीं था। पनकी समेत कई अन्य थाना क्षेत्रों में लूटपाट की वारदातों में भी उसके शामिल होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
यही वजह है कि पुलिस उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच कर रही है। अमित कुमार हत्याकांड में उसकी गिरफ्तारी के बाद अब जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि घटना में शामिल अन्य आरोपियों से उसका संपर्क किस तरह था और वारदात से पहले तथा बाद में किस-किस व्यक्ति से उसकी बातचीत हुई।
गिरफ्तारी से बचने के लिए सोशल मीडिया का सहारा
पूछताछ के दौरान संजय ढाबा ने कथित तौर पर यह भी बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया था। पुलिस के अनुसार गैंगस्टर के आरोपी अवनीश दीक्षित की सलाह पर उसने खुद को निर्दोष बताते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया था।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि वीडियो के जरिए वह अपनी छवि ऐसी बनाने की कोशिश कर रहा था, जिससे पुलिस की जांच की दिशा प्रभावित हो और उस पर सीधे शक न जाए।
पुलिस के मुताबिक अवनीश दीक्षित ने उसे आगे भी संरक्षण देने का आश्वासन दिया था। अब इस बयान की भी जांच की जा रही है कि सोशल मीडिया वीडियो बनाने और उसे वायरल कराने के पीछे वास्तव में कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
पहले भी हो चुका है दो बार हाफ एनकाउंटर
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि संजय ढाबा का इससे पहले भी दो बार हाफ एनकाउंटर हो चुका है। इसके बावजूद वह लगातार आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहा।
इस बार पनकी-सचेंडी बॉर्डर पर हुई मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी। पुलिस अब उसके आपराधिक नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और सट्टा-जुआ गतिविधियों से जुड़े संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी है।
अब बाकी आरोपियों पर पुलिस की नजर
संजय ढाबा की गिरफ्तारी के बाद अमित कुमार हत्याकांड में शामिल बाकी आरोपियों पर पुलिस का शिकंजा और कसने की उम्मीद है। डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास जारी हैं।
परिवार पहले ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग कर चुका है। ऐसे में पुलिस के सामने अब सिर्फ संजय ढाबा की गिरफ्तारी तक मामला सीमित नहीं है, बल्कि घटना में शामिल प्रत्येक आरोपी की भूमिका स्पष्ट करना भी बड़ी चुनौती है।
अमित कुमार हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई से परिवार को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले में न्याय की प्रक्रिया अभी आगे जारी रहेगी। खास तौर पर 58 मुकदमों वाले इस हिस्ट्रीशीटर के पुराने आपराधिक नेटवर्क की जांच से पुलिस को कई और कड़ियां मिलने की संभावना है।

