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कोरोनावायरस महामारी में मारे गए हर पीड़ित के परिवार को मुआवजा नहीं दे सकता केंद्र

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह कोरोनावायरस महामारी में मारे गए हर पीड़ित के परिवार को मुआवजा नहीं दे सकता, क्योंकि मुआवजा देने का प्रावधान सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं पर ही लागू होता है। इतना ही नहीं केंद्र ने कोर्ट में शनिवार रात को दिए गए अपने 183 पन्ने के एफिडेविट में यह भी कहा है कि राज्य हर पीड़ित को चार लाख रुपए देने की व्यवस्था नहीं कर पाएंगे, क्योंकि इस योजना का खर्च वहन नहीं किया जा पाएगा।

केंद्र ने कोर्ट से यह भी बताया है कि कोरोनावायरस में मुआवजा दिया गया तो अन्य बीमारियों में मुआवजा न देना एक तरह से अन्यायपूर्ण होगा। केंद्र ने बताया कि इस महामारी ने देशभर में 3.85 लाख लोगों की जान ले ली है। इस आंकड़े के अभी और बढ़ने के आसार हैं। ऐसे में राज्य, जो पहले ही वित्तीय दबाव से जूझ रहे हैं, वह हर किसी की मदद नहीं कर सकते। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में केंद्र और राज्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को चार लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में सोमवार को सुनवाई करेगा।

केंद्र ने एफिडेविट में आपदा प्रबंधन कानून का ब्योरा देते हुए कहा कि इस तरह के मुआवजे सिर्फ भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में दिए जाते हैं। लेकिन कोरोनावायरस एक बड़े स्तर की महामारी थी और इस पर मुआवजे के प्रावधान लगाना ठीक नहीं होगा। केंद्र ने कहा कि अगर एसडीआरएफ फंड को कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देने में खर्च किया जाता है तो इससे राज्यों की कोरोना के खिलाफ लड़ाई प्रभावित होगी और अन्य चिकित्सा आपूर्ति और आपदाओं की देखभाल के लिए पर्याप्त धन नहीं बचेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र ने एफिडेविट में सर्वोच्च न्यायालय को अपने पुराने फैसलों के बारे में भी याद दिलाया है, जिसके मुताबिक, कोर्ट कार्यपालिका की नीतियों से खुद को अलग रखेगी और न्यायपालिका केंद्र की और से फैसला नहीं दे सकती। इसके साथ ही केंद्र ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च और कम टैक्स जुटने की वजह से लाखों कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देना राज्यों के लिए मुश्किल होगा।

भारत में कोरोना से अब तक 3.86 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। इस महमारी से मरने वालों का आंकड़ा अब भी 2000 से 3000 के बीच बना हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार ने कोर्ट के सामने सीधे तौर पर मुआवजा देने में असमर्थता दिखा दी।

 

News Desk

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