Ek Ped Maa Ke Naam: एक पेड़ माँ के नाम 2.0: पीएम मोदी के नेट ज़ीरो लक्ष्य को मिलेगा जनआंदोलन का साथ
News-Desk
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Dharmendra Pradhan Green India, Eco Clubs Schools, ek ped maa ke naam, Environmental Campaign India, Indian Education Environment, mission life, Net Zero India 2070, Tree Plantation Campaign IndiaEk Ped Maa Ke Naam भारत की प्राचीन परंपराएं और सांस्कृतिक मूल्य सदैव से ही प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोच्च स्थान देते आए हैं। “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” अभियान उसी धरोहर को जीवित करते हुए एक राष्ट्रीय जनआंदोलन में तब्दील हो गया है। इस पहल के माध्यम से न केवल पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य भी और सशक्त रूप से सामने आ रहा है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया अभियान का शुभारंभ
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को “एक पेड़ माँ के नाम 2.0” का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विशेष मॉड्यूल्स और डिजिटल संसाधनों का लोकार्पण भी किया, जिनमें “मिशन लाइफ वेब पोर्टल” के लिए इको क्लब्स और इस अभियान की माइक्रोसाइट शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय शिक्षा को मुख्यधारा में लाना, आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बच्चों में बढ़ेगा पर्यावरणीय जागरूकता का भाव
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एनईपी 2020 के अंतर्गत शिक्षा मंत्रालय पर्यावरणीय शिक्षा को स्कूली स्तर पर बढ़ावा दे रहा है। स्कूलों में बनने वाले इको क्लब बच्चों में जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और सतत जीवनशैली को लेकर संवेदनशीलता पैदा करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यह अभियान छात्रों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और प्रेम को जाग्रत करेगा।
बीते साल लगे 5 करोड़ पेड़, इस बार 10 करोड़ का लक्ष्य
धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पिछले साल देश भर के शैक्षणिक संस्थानों द्वारा 5 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए गए, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस वर्ष इस आंकड़े को 10 करोड़ पेड़ तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने इस अभियान को एक जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता बताई और सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपनी मां के नाम एक पेड़ लगाएं और उस पेड़ के साथ सेल्फी खींच कर ecoclubs.education.gov.in पोर्टल पर अपलोड करें।
“मिशन लाइफ” से जुड़ेगा स्कूली शिक्षा का हर कोना
संजय कुमार ने बताए मिशन लाइफ के सात स्तंभ
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने मिशन लाइफ के सात विषयों की महत्ता पर प्रकाश डाला, जिनमें ऊर्जा की बचत, पानी का संरक्षण, सिंगल यूज़ प्लास्टिक से दूरी, और सतत परिवहन जैसे बिंदु शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग से स्थिरता को बढ़ावा देना ही मिशन का मूल मंत्र है।
देशभर में इको क्लब की स्थापना का आग्रह
संजय कुमार ने सभी शेष स्कूलों से आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द अपने विद्यालयों में इको क्लब स्थापित करें ताकि छात्रों को व्यवहारिक पर्यावरणीय ज्ञान मिल सके और वे इसे अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।
“भारतीय ज्ञान प्रणाली ने हमेशा प्रकृति को माता माना है”
डॉ सुकांत मजूमदार ने दिया सांस्कृतिक संदर्भ
शिक्षा राज्य मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के मंत्री डॉ सुकांत मजूमदार ने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता जहां प्रकृति को जीतने की कोशिश करती रही है, वहीं भारतीय ज्ञान प्रणाली हमेशा प्रकृति के तत्वों के साथ सामंजस्य पर बल देती रही है। उन्होंने कहा, “हम प्रकृति को मां मानते हैं — जो हमें पालती है, संवारती है और बिना शर्त देती है।”
“विश्व पर्यावरण दिवस केवल उत्सव नहीं, चेतावनी है”
आशीष सूद ने दी नई सोच की दिशा
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक उत्सव नहीं बल्कि यह हमारी जीवनशैली में बदलाव लाने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि चुनौती यह है कि धरती के बढ़ते तापमान को नियंत्रित किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों के सपनों की रक्षा की जा सके। अवसर यह है कि हम अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर इस लड़ाई को जीत सकते हैं।
“डिजिटल टूल्स से जनभागीदारी को मिल रहा बल”
माइक्रोसाइट और पोर्टल से बढ़ रही भागीदारी
इस अभियान को सफल बनाने के लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी का पूरा लाभ उठाया जा रहा है। माइक्रोसाइट और मिशन लाइफ वेब पोर्टल जैसे संसाधन न केवल बच्चों और शिक्षकों को जोड़ रहे हैं बल्कि उन्हें पर्यावरण योद्धा बना रहे हैं। पोर्टल पर लाखों छात्रों ने पेड़ लगाने के प्रमाण, तस्वीरें और अपनी कहानियां साझा की हैं, जिससे एक सकारात्मक ऊर्जा पूरे देश में फैल रही है।
“2024 से 2047: अमृतकाल में हर नागरिक बने प्रकृति का प्रहरी”
भारत सरकार का सपना है कि 2047 तक, जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, हर नागरिक एक “प्राकृतिक प्रहरी” के रूप में उभरे। इस दिशा में “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी पहलें अमृतकाल को सार्थक बना रही हैं। बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों से लेकर सरकारी संस्थाओं तक, सब इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के “नेट ज़ीरो 2070” लक्ष्य को साकार करने के लिए यह अभियान एक मजबूत नींव रख रहा है, और आने वाले वर्षों में यह देश की पर्यावरणीय सोच और कार्य संस्कृति का मूल स्तंभ बन सकता है।

