ओवरब्रिज की निर्माण सामग्री उठनी शुरू
खतौली। नेशनल हाईवे-58 भंगेला गांव व भैंसी कट पर ओवरब्रिज का निर्माण रुके हुए एक माह हो गया। अब यहां से ओवरब्रिज की निर्माण सामग्री उठनी शुरू हो गई है। यहां से ओवरब्रिज के पिलरों के जाल और अन्य सामान को मेरठ के मोदीपुरम भेजना शुरू कर दिया गया है। ऐसे में इन पुलों के निर्माण की संभावना धूमिल होने लगी है। नेशनल हाईवे पर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए गांव भंगेला में टबीटा मोड़ पर, गांव भैंसी के कट पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अक्टूबर, 2018 में शुरू किया गया था। इन ओवरब्रिज को छह माह में बनाने का लक्ष्य दिया गया। उक्त निर्माण कार्य धीमी गति से शुरू किया गया था। अभी तक ओवरब्रिज के बराबर में नालों का निर्माण किया गया और ओवरब्रिज के लिए भूमि को समतल किया गया। पिछले माह पिलरों का निर्माण शुरू किया जाना था। पिलर के लिए लोहे के बीम तैयार कर दिए गए थे। हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजे, मुआवजे की गणना में त्रुटि व कुछ अन्य समस्याओं को लेकर भाकियू ने दस जनवरी को हाईवे जाम कर धरना, प्रदर्शन दिया था। भाकियू ने किसानों की समस्याओं का निराकरण न होने तक निर्माण कार्य न होने देने की चेतावनी दी। एनएचएआइ के पीडी दिनेश चंद चतुर्वेदी ने अनेक समस्याओं के निराकरण के लिए 15 दिन का समय मांगा था। कुछ मुद्दों पर 14 जनवरी को भाकियू व एनएचएआइ के अधिकारियों के बीच हुई थी। वार्ता में अधिकारियों ने 15 दिन का समय और मांगा था। मुआवजे के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें निपटाने में कई माह लगेंगे। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने समस्याओं का निराकरण न होने तक काम चालू न होने देने की चेतावनी दी थी। तभी से ओवरब्रिज का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। हाल फिलहाल किसानों की समस्याओं के निराकरण होने की उम्मीद न होने के चलते ओवरब्रिज की निर्माण कंपनी ने अब यहां से निर्माण सामग्री उठानी शुरू कर दी। भंगेला से ओवरब्रिज के पिलरों के तीन बीम को मोदीपुरम भेज दिया गया। उक्त बीम अब मोदीपुरम चौराहे पर बनने वाले ओवरब्रिज के लिए प्रयोग किए जाएंगे। ऐसे हालात में ओवरब्रिज का निर्माण पूरा होने की उम्मीद नहीं है।
