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Indonesia में संसद भत्ते और बेरोजगारी पर बवाल: पुलिस पर मानवाधिकार उल्लंघन, राष्ट्रपति प्रबोवो ने चीन दौरा रद्द किया

इंडोनेशिया (Indonesia Protests) में संसद सदस्यों की सैलरी और भत्ते बढ़ाने के फैसले ने देशभर में आग लगा दी है। राजधानी जकार्ता (Jakarta) से लेकर कई अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (Prabowo Subianto) को अपना बहुप्रतीक्षित चीन दौरा रद्द करना पड़ा।


सांसदों के भत्ते पर जनता का गुस्सा

जनता का सबसे बड़ा आक्रोश सांसदों को मिलने वाले भारी-भरकम भत्तों को लेकर है। सरकार ने हाल ही में सांसदों के लिए लगभग 3,057 डॉलर (करीब 2.69 लाख रुपए) मासिक भत्ता तय किया है। यह राशि जकार्ता के न्यूनतम वेतन से लगभग 10 गुना अधिक है।
ऐसे हालात में जब देश में महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, आम जनता इसे सीधी नाइंसाफी मान रही है। लोग पूछ रहे हैं कि जब जनता रोजमर्रा के खर्चे पूरे करने के लिए जूझ रही है तो सांसदों को इतना अधिक वेतन और सुविधा क्यों दी जा रही है।


पुलिस पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप

प्रदर्शन तेज होते ही पुलिस ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी। लेकिन इस कार्रवाई ने हालात और बिगाड़ दिए। इंडोनेशिया की कानूनी सहायता संस्था (YLBHI) का दावा है कि जकार्ता में 600 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से कई को बिना किसी आरोप के थानों में रखा गया।
आरोप यह भी हैं कि पुलिस ने न केवल आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया बल्कि कुछ जगह गोलीबारी भी की। इससे मानवाधिकार उल्लंघन (Human Rights Abuse) के आरोप और गहरे हो गए हैं।


मकासर में संसद भवन जला, जकार्ता में बस स्टैंड राख

शुक्रवार रात मकासर शहर में प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय संसद भवन में आग लगा दी। वहीं राजधानी जकार्ता में प्रदर्शनकारियों ने एक बस स्टैंड को जला दिया। गुस्साई भीड़ ने कई जगहों पर पुलिस की गाड़ियों को पलट दिया और तोड़फोड़ की।


डिलीवरी बॉय की मौत से भड़की हिंसा

प्रदर्शनों की असली चिंगारी उस घटना से भड़की जब हाल ही में एक पुलिस वाहन ने मोटरसाइकिल से जा रहे डिलीवरी बॉय को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और मामला सिर्फ सांसदों की तनख्वाह तक सीमित नहीं रहा। अब प्रदर्शनकारी पुलिस विभाग के सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों को सजा देने की मांग कर रहे हैं।


राष्ट्रपति प्रबोवो का चीन दौरा रद्द

इन हालातों को देखते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने अपनी चीन यात्रा रद्द कर दी। वह 3 सितंबर को बीजिंग में आयोजित होने वाले विक्ट्री डे समारोह में शामिल होने वाले थे, जो द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर मनाया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि वे खुद देश की स्थिति पर नज़र रखना चाहते हैं और व्यक्तिगत रूप से इस संकट को संभालना चाहते हैं। उन्होंने चीन सरकार से माफी भी मांगी।


प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

  • आर्थिक मदद: सरकार आउटसोर्सिंग बंद करे, वेतन बढ़ाए, टैक्स सिस्टम में सुधार करे।

  • नौकरी सुरक्षा: बेरोजगारी और नौकरी कटौती पर रोक लगे।

  • सांसदों का भत्ता घटे: सांसदों के लिए तय किए गए नए वेतन और भत्ते तुरंत वापस लिए जाएं।

  • पुलिस सुधार: डिलीवरी बॉय की मौत के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।


मौतें, घायल और हिरासत

अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 3 लोगों की मौत हो चुकी है।

  • 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

  • 7 पुलिस अधिकारी हिरासत में लिए गए हैं।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने मृतक ड्राइवर के परिवार से मुलाकात की और जांच के आदेश दिए। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने की अपील भी की है।


जनता बनाम सत्ता: संघर्ष लंबा खिंच सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया में ये विरोध-प्रदर्शन केवल सांसदों की सैलरी का मामला नहीं है। ये असल में जनता की उस गहरी नाराजगी और असंतोष का परिणाम हैं, जो लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और असमानता से उपजी है।
लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने अब भी उनकी मांगें नहीं मानीं, तो यह संघर्ष और बड़ा हो सकता है।


इंडोनेशिया में भड़की यह आग सिर्फ आर्थिक असमानता का मामला नहीं है, बल्कि यह जनता और सत्ता के बीच भरोसे की गहरी खाई को उजागर करती है। सांसदों की सैलरी, पुलिस का रवैया और आम जनता की मुश्किलें अब मिलकर एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रपति प्रबोवो इस संकट से निपटने के लिए कौन से कदम उठाते हैं।

 

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