Trump के टैरिफ का बड़ा झटका: भारत और दुनिया के व्यापार पर 50% तक असर, कोर्ट ने लगाए कानूनी रोक
Trump Tariffs ने अगस्त 2025 से दुनिया के कई देशों पर अपनी प्रभावशाली छाया डाल दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने प्रशासन में कई आपातकालीन आदेशों का उपयोग करते हुए चीन, भारत, कनाडा, मेक्सिको और अन्य देशों पर 10% से लेकर 50% तक टैरिफ लगाया था। इन टैरिफ का मकसद था अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर विदेश से आने वाले उत्पादों पर नियंत्रण रखना।
हालांकि, अमेरिका की एक अपील कोर्ट ने हाल ही में ट्रम्प के इन ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रम्प ने टैरिफ लगाने के लिए इमरजेंसी पावर्स का दुरुपयोग किया, जबकि उनके पास ऐसी असीमित शक्ति नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि हर आयात पर टैरिफ लगाने का अधिकार कानून के दायरे में सीमित है।
अदालती निर्णय और ट्रम्प की प्रतिक्रिया
अपील कोर्ट के इस फैसले के बावजूद इसे अक्टूबर तक लागू नहीं किया गया ताकि ट्रम्प सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। ट्रम्प ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की और कहा कि अगर ये टैरिफ हटाए गए, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगेगा। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि “सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं और अंत में अमेरिका ही जीतेगा।”
ट्रम्प प्रशासन का तर्क था कि अगर कोर्ट के आदेश अनुसार टैरिफ हटाने पड़े, तो 159 अरब डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपए) की वसूली वापस करनी पड़ सकती है। यह अमेरिकी खजाने के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।
150 दिन तक 15% टैरिफ की सीमा
कोर्ट ने ट्रम्प को 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत 150 दिन के लिए 15% टैरिफ लगाने की अनुमति दी है, लेकिन इसके लिए ठोस और स्पष्ट कारण पेश करने होंगे। इसका मतलब यह है कि ट्रम्प प्रशासन अब बिना वजह बड़े पैमाने पर टैरिफ नहीं लगा सकता।
टैरिफ का असर भारत पर
भारत को ट्रम्प प्रशासन ने सबसे भारी टैरिफ झेलना पड़ा। 27 अगस्त 2025 से भारत के उत्पादों पर 50% टैरिफ लागू हो गया। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।
इस टैरिफ के कारण अमेरिका में बिकने वाले भारतीय कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर और सी-फूड महंगे हो जाएंगे। अनुमान है कि इनकी मांग में 70% तक गिरावट आ सकती है। इसके विपरीत, चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश अपने उत्पादों को सस्ते दाम में बेचकर अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।
रूसी तेल और व्यापार नीति का लिंक
टैरिफ लगाने का एक कारण रूस से तेल खरीद भी था। 6 अगस्त को रूस से तेल आयात पर जुर्माने के तौर पर टैरिफ का ऐलान किया गया, वहीं 7 अगस्त से भारत पर 25% टैरिफ लगाया गया। भारत चीन के बाद रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से केवल 0.2% तेल (68 हजार बैरल प्रतिदिन) इम्पोर्ट करता था, लेकिन मई 2023 तक यह बढ़कर 45% (20 लाख बैरल प्रतिदिन) हो गया। जनवरी से जुलाई 2025 तक भारत प्रतिदिन 17.8 लाख बैरल तेल रूस से खरीद रहा है।
पिछले दो साल से भारत हर साल 130 अरब डॉलर (11.33 लाख करोड़ रुपए) से ज्यादा का रूसी तेल खरीद रहा है। इस बढ़ती मांग और ट्रम्प के टैरिफ ने भारतीय उद्योगों के लिए भारी आर्थिक दबाव पैदा कर दिया है।
टैरिफ का व्यापक असर और भविष्य की संभावनाएँ
ट्रम्प के इन टैरिफ से केवल भारत ही प्रभावित नहीं हुआ। चीन, कनाडा, मेक्सिको, वियतनाम जैसे देशों पर भी भारी प्रभाव पड़ा है। छोटे व्यवसाय और स्थानीय उद्योग अपनी लागत बढ़ने के कारण परेशान हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बाद भी लागू होता है, तो अमेरिका के व्यापारिक नीतियों में बड़ा बदलाव आएगा। इससे न केवल अमेरिकी कंपनियों बल्कि वैश्विक व्यापारियों को भी रणनीति बदलनी पड़ेगी।
अमेरिका का तर्क और वैश्विक प्रतिक्रिया
ट्रम्प प्रशासन ने बार-बार कहा कि अमेरिकी व्यापार घाटा ही राष्ट्रीय आपातकाल है। उन्होंने ड्रग्स और अवैध घुसपैठ रोकने के नाम पर भी टैरिफ लगाए। इस कदम के चलते वैश्विक व्यापार संगठन और कई देशों ने चिंता जताई है। भारत समेत कई विकासशील देशों को अपने निर्यात की कीमत और अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी पर नजर रखनी होगी।

