Iran में उबाल, खामनेई पर संकट: 500 मौतों के बाद ‘प्लान बी’ तैयार, रूस भागने की अटकलों से तेहरान में हड़कंप
Iran protests Khamenei Russia plan की खबरें इन दिनों अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पश्चिम एशिया के इस अहम देश में पिछले दस दिनों से जारी उग्र प्रदर्शनों और सैकड़ों मौतों के बाद सत्ता के गलियारों में बेचैनी साफ दिखाई देने लगी है। तेहरान से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक यह सवाल गूंज रहा है कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई सचमुच देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, या यह सिर्फ सूचना युद्ध का हिस्सा है।
ईरान में इस समय जो हालात हैं, वे केवल सड़कों पर दिख रहे विरोध तक सीमित नहीं हैं। यह एक व्यापक असंतोष का प्रतीक बन चुका है, जिसमें आर्थिक बदहाली, महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक पाबंदियां और सख्त सरकारी नियंत्रण के खिलाफ गुस्सा उफान पर है। इसी माहौल में ब्रिटिश मीडिया की एक रिपोर्ट ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है।
🔴 ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट से मचा तूफान
जनवरी 2026 की शुरुआत में ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार द टाइम्स ने एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया कि अयातुल्लाह अली खामनेई ने “प्लान बी” तैयार कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर देश में हालात बेकाबू हो जाते हैं, सुरक्षा बल आदेश मानने से इनकार कर देते हैं या प्रदर्शनकारियों का साथ देने लगते हैं, तो खामनेई अपने परिवार और करीबी सहयोगियों के साथ रूस की राजधानी मॉस्को की ओर रुख कर सकते हैं।
इस रिपोर्ट के सामने आते ही ईरान की राजनीति में हलचल तेज हो गई। सरकारी प्रवक्ताओं ने इसे “जियोनिस्ट प्रोपगैंडा” करार दिया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषकों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया।
🔴 500 से ज्यादा मौतें, सड़कों पर आक्रोश
ईरान में जारी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। अलग-अलग शहरों में झड़पों, गोलीबारी और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं, जिससे सूचना का प्रवाह सीमित हो गया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है। इसी टकराव के बीच Iran protests Khamenei Russia plan की खबरें आग में घी डालने का काम कर रही हैं।
🔴 अकेले नहीं, 20 लोगों के साथ जाने की चर्चा
ब्रिटिश रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हालात बेहद खराब होते हैं तो खामनेई अकेले नहीं जाएंगे। उनके साथ करीब 20 लोगों का एक समूह होगा, जिसमें उनका बेटा और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामनेई, परिवार के अन्य सदस्य और सबसे भरोसेमंद सलाहकार शामिल बताए जा रहे हैं।
कहा जा रहा है कि यह समूह सिर्फ लोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारी मात्रा में संपत्ति और दस्तावेज भी साथ ले जाए जाएंगे। रिपोर्टों में खामनेई परिवार की संपत्ति लगभग 95 बिलियन डॉलर आंकी जा रही है, जो ईरान की ताकतवर संस्थाओं और आर्थिक संगठनों से जुड़ी हुई है।
🔴 रूस क्यों बना सबसे सुरक्षित ठिकाना
Iran protests Khamenei Russia plan की चर्चाओं में रूस का नाम सबसे ऊपर है। विश्लेषकों का मानना है कि खामनेई और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों ने सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर कई अहम समझौते किए हैं।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि खामनेई ईरानी और रूसी सांस्कृतिक मूल्यों में समानता देखते हैं, और उन्हें लगता है कि पश्चिमी देशों की तुलना में रूस एक सुरक्षित शरणस्थली हो सकता है। इससे पहले 2024 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद भी विद्रोह के बाद रूस चले गए थे, जिसे इस संदर्भ में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।
🔴 जेरूशलम पोस्ट और खुफिया सूत्रों का दावा
केवल ब्रिटिश मीडिया ही नहीं, बल्कि जेरूशलम पोस्ट और अन्य अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी इस तरह की रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। पूर्व इजरायली खुफिया अधिकारी बेनी सब्ती के हवाले से कहा गया कि “खामनेई के लिए रूस के अलावा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है।”
इन बयानों ने वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे को और हवा दी है, हालांकि ईरान की सरकार लगातार इन खबरों को अफवाह और राजनीतिक दुष्प्रचार बता रही है।
🔴 सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कई पोस्ट्स वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि खामनेई का परिवार पहले ही मॉस्को पहुंच चुका है या उनकी संपत्ति को विशेष विमानों के जरिए बाहर भेजा जा रहा है। हालांकि, ये सभी दावे अनकन्फर्म्ड हैं और अधिकतर विरोधी समूहों के अकाउंट्स से सामने आ रहे हैं।
मुख्यधारा मीडिया या किसी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अब तक इन अफवाहों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इन चर्चाओं ने जनता के बीच बेचैनी बढ़ा दी है।
🔴 क्या है खामनेई का ‘प्लान बी’
Britain के अखबार द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, खामनेई ने अपने सबसे भरोसेमंद सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर सुरक्षा बलों की वफादारी पर सवाल उठने लगें, तो तत्काल एक वैकल्पिक योजना लागू की जाए। इस “प्लान बी” में मॉस्को की ओर सुरक्षित मार्ग, विशेष विमानों की व्यवस्था और संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा शामिल बताई जा रही है।
हालांकि, ईरान के रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े कई लोग अब भी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की वफादारी पर भरोसा जता रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक यह बल सरकार के साथ खड़ा है, सत्ता की नींव मजबूत बनी रहेगी।
🔴 खामनेई परिवार और सत्ता का ताना-बाना
अयातुल्लाह खामनेई के परिवार का ईरान की सत्ता संरचना में खासा प्रभाव है। उनके चार बेटे—मोस्तफा, मोजतबा, मसूद और मैसम—और दो बेटियां—बशरी और होदा—ईरान के प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक परिवारों से जुड़े बताए जाते हैं।
मोजतबा खामनेई को लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। उनकी व्यक्तिगत संपत्ति और विदेशी निवेश को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में कई दावे किए गए हैं। परिवार के अन्य सदस्यों के भी बैंकिंग, रियल एस्टेट और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े आर्थिक हित बताए जाते हैं।
🔴 खामनेई का आर्थिक साम्राज्य
ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में खामनेई का नियंत्रण कई शक्तिशाली संगठनों पर है। इनमें से एक प्रमुख संस्था “सेतद” मानी जाती है, जिसके पास अरबों डॉलर की संपत्तियां और निवेश हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों के अनुसार, इस आर्थिक नेटवर्क का कुल मूल्य लगभग 95 अरब डॉलर तक आंका गया है।
हालांकि, यह सीधे तौर पर साबित नहीं हो पाया है कि यह पूरी संपत्ति खामनेई की निजी है, लेकिन यह जरूर कहा जाता है कि इस नेटवर्क से उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक शक्ति को जबरदस्त समर्थन मिलता है।
🔴 वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भागते राष्ट्रप्रमुखों की सूची
पिछले पांच वर्षों में दुनिया के कई देशों में सत्ता परिवर्तन और विद्रोह देखने को मिले हैं। अफगानिस्तान से अशरफ गनी, श्रीलंका से गोटाबाया राजपक्षे, सीरिया से बशर अल-असद और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जैसे नाम इस सूची में शामिल हैं, जिन्हें राजनीतिक उथल-पुथल के चलते देश छोड़ना पड़ा।
इन उदाहरणों के चलते Iran protests Khamenei Russia plan की खबरों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय गंभीरता से देख रहा है, क्योंकि ईरान पश्चिम एशिया की राजनीति में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है।
🔴 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक असर
ईरान में चल रही घटनाओं पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और मध्य पूर्व के कई देशों की नजर बनी हुई है। किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव का असर तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान में सत्ता अस्थिर होती है, तो इसका प्रभाव केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।

