Yemen में युद्ध का नया मोर्चा: मुकल्ला पर हमले के बाद सऊदी-UAE में टकराव, सैनिक वापसी, आपातकाल और सत्ता संघर्ष तेज
News-Desk
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civil war, Middle East crisis, Mukalla Attack, saudi arabia, STC Yemen, uae, yemen newsYemen Mukalla attack के बाद पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यमन के रणनीतिक तटीय शहर मुकल्ला पर मंगलवार को हुए हवाई हमलों ने न केवल यमन के अंदर राजनीतिक-सैन्य संकट को गहरा किया, बल्कि लंबे समय से सहयोगी रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्तों में भी गंभीर दरार पैदा कर दी है।
🔴 मुकल्ला हमले के बाद सऊदी-UAE आमने-सामने
हमले के तुरंत बाद UAE ने घोषणा की कि वह सऊदी अरब से अपने सैनिकों को वापस बुलाएगा। यह फैसला उस समय आया जब सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि मुकल्ला पोर्ट पर पहुंचे एक जहाज के जरिए UAE से हथियार भेजे गए थे। सऊदी का दावा है कि यह हथियार यमन के दक्षिणी हिस्से में सक्रिय अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को दिए जाने थे।
सऊदी अरब का कहना है कि यह गतिविधि यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सीधा खतरा है।
🔴 UAE का पलटवार: हथियार नहीं, सैन्य वाहन थे
UAE ने सऊदी अरब के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मुकल्ला भेजी गई खेप में हथियार नहीं, बल्कि सैन्य वाहन थे। UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन वाहनों का इस्तेमाल यमन में मौजूद UAE के सैनिकों द्वारा किया जाना था।
UAE ने दोहराया कि वह यमन की संप्रभुता का सम्मान करता है और आतंकवाद से लड़ने तथा वैध सरकार की बहाली के पक्ष में है।
🔴 सैनिकों की वापसी का ऐलान, रणनीति में बदलाव
UAE के रक्षा मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि वह अपनी रणनीतिक जरूरतों के अनुसार यमन में मौजूद अपने बाकी सैनिकों को भी चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाएगा। मंत्रालय के अनुसार, यह फैसला आतंकवाद विरोधी अभियानों और क्षेत्रीय हालात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
UAE पहले भी कह चुका है कि यमन का भविष्य और उसकी सीमाएं यमन के लोग ही तय करेंगे।
🔴 मुकल्ला पोर्ट से बमबारी तक, घटनाक्रम ने बढ़ाया तनाव
मंगलवार को UAE के फुजैराह बंदरगाह से एक जहाज यमन के मुकल्ला पोर्ट पहुंचा। इसके कुछ ही समय बाद सऊदी अरब ने मुकल्ला पर बमबारी कर दी। इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने शहर में कई हवाई हमले किए।
इस कार्रवाई ने यमन में पहले से चल रहे राजनीतिक और सैन्य तनाव को विस्फोटक स्थिति में पहुंचा दिया।
🔴 यमन सरकार का बड़ा कदम: UAE से डिफेंस डील रद्द
Yemen Mukalla attack के बाद यमन सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ किया गया रक्षा समझौता रद्द कर दिया। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल‑अलीमी ने घोषणा की कि देश में मौजूद UAE की सेनाओं को 24 घंटे के भीतर यमन छोड़ना होगा।
इसके साथ ही यमन सरकार ने 72 घंटे के लिए हवाई, थल और समुद्री नाकाबंदी लागू करने और 90 दिनों के लिए आपातकाल घोषित करने का निर्णय लिया।
🔴 सऊदी को समर्थन, अलगाववाद पर सख्ती
हालांकि अल-अलीमी ने अलगाववादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सऊदी अरब के समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कदम यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता के हित में है।
🔴 सऊदी ने हमला क्यों किया? STC की भूमिका
सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) एक सशस्त्र अलगाववादी संगठन है, जिसे UAE का समर्थन प्राप्त माना जाता है। STC का उद्देश्य यमन को उत्तर और दक्षिण दो अलग देशों में बांटना और दक्षिणी यमन में अलग सरकार बनाना है।
यमन 1990 से पहले उत्तर और दक्षिण यमन के रूप में विभाजित था। एकीकरण के बाद भी दक्षिण में अलगाव की भावना बनी रही।
🔴 तेल-गैस इलाकों पर कब्जे से भड़का संघर्ष
पिछले एक महीने में STC ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए। इसके लड़ाकों ने हद्रामौत और अल‑मह्रा जैसे तेल-गैस समृद्ध क्षेत्रों पर नियंत्रण कर लिया। इससे यमन सरकार की सुरक्षा बलों और स्थानीय कबीलों को पीछे हटना पड़ा।
दिसंबर के मध्य तक STC ने कई अहम ऊर्जा क्षेत्रों पर कब्जे का दावा किया और दक्षिणी अबयान में नए सैन्य अभियान की घोषणा की।
🔴 सऊदी की चेतावनी और मुकल्ला हमला
STC की बढ़ती गतिविधियों के जवाब में सऊदी अरब ने हद्रामौत के वादी नहाब इलाके में चेतावनी स्वरूप हवाई हमले किए। सऊदी ने साफ कहा था कि यदि STC पीछे नहीं हटा, तो और कड़ी कार्रवाई होगी। मुकल्ला पोर्ट पर हमला उसी चेतावनी की अगली कड़ी माना जा रहा है।
🔴 यमन में सक्रिय प्रमुख ताकतें
हूती विद्रोही (अंसार अल्लाह) – ईरान समर्थित, उत्तरी यमन में प्रभावी
यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज – अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार समर्थक, सऊदी-UAE समर्थित
हदरामी एलीट फोर्सेज – UAE समर्थित, अल-कायदा विरोधी
सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) – दक्षिणी यमन की अलगाववादी ताकत
🔴 सऊदी-UAE रिश्तों में खटास क्यों बढ़ी?
यमन युद्ध के शुरुआती दौर में सऊदी अरब और UAE एक साथ थे। 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में सऊदी नेतृत्व में सैन्य गठबंधन बना, जिसमें UAE भी शामिल था।
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार समय के साथ UAE ने यमन में सऊदी से अलग अपनी रणनीति अपनाई। UAE की रुचि यमन के बंदरगाहों, समुद्री मार्गों और तटीय इलाकों में बढ़ी, जिससे टकराव गहराता गया।
🔴 गृह युद्ध की जड़ें और मानवीय संकट
यमन में 2014 से चल रहे गृह युद्ध ने देश को तबाही के कगार पर पहुंचा दिया है। इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए और आज यमन की करीब 80% आबादी मानवीय सहायता पर निर्भर है।
युद्ध की एक बड़ी वजह शिया-सुन्नी तनाव भी रहा है। आबादी में लगभग 35% शिया और 65% सुन्नी समुदाय हैं। 2011 की अरब क्रांति के बाद यह तनाव खुले गृह युद्ध में बदल गया।

