उत्तर प्रदेश

Kannauj में अमानवीयता की हद! शराबी पिता ने दो साल के कुपोषित मासूम को तालाब किनारे मरने को छोड़ दिया—दो दिन तक सड़ता रहा घाव, कीड़े पड़े

Kannauj जिले के मानपुर क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। यहां एक शराबी और निर्मोही पिता ने अपने दो वर्ष के कुपोषित और घायल बेटे को मरने के लिए तालाब के किनारे छोड़ दिया।
बच्चे के सिर में गहरा घाव था, जिसमें दो दिन से कीड़े और मवाद भर चुके थे।

यह Kannauj child abandonment case इंसानियत के सबसे काले चेहरों में से एक समझा जा रहा है, क्योंकि दो दिनों तक सैकड़ों लोग वहां से गुजरते रहे, मगर किसी ने इस मासूम की मदद नहीं की।


दो दिन से तड़पता रहा मासूम—कीड़े रेंग रहे थे घाव में, लोग देखते रहे पर किसी का दिल नहीं पसीजा

स्थानीय लोगों के अनुसार बच्चा तालाब के किनारे दो दिनों से पड़ा था—

  • कुपोषित शरीर

  • सिर में गहरा घाव

  • मवाद और कीड़े

  • शरीर पर धूल और मिट्टी

  • चुपचाप पीड़ा में लेटा मासूम

लोग उसे देखते तो रहे, लेकिन कोई उसे उठाने तक नहीं आया।
यह संवेदनहीनता का चरम था—एक मासूम, जिसकी सांसें कमजोर थीं, और शरीर घावों से भरा था, बेजान-सा पड़ा था।

ग्रामीणों ने बताया कि बच्चे की मां किसी दूसरे के साथ भाग गई है, और उसके बाद से बच्चा पिता के पास ही रह रहा था।
लेकिन पिता इतना शराबी था कि बच्चे की देखभाल करना तो दूर, उसका इलाज भी नहीं कराया। जब चोट सड़ने लगी तो उसने मासूम को तालाब के किनारे मौत के लिए छोड़ दिया और खुद फरार हो गया।


एक स्वास्थ्यकर्मी की नजर पड़ते ही खुला राज—चाइल्ड लाइन को दी सूचना

यह मामला तब सामने आया जब मानपुर से गुजर रहे एक स्वास्थ्यकर्मी की नजर उस बच्चे पर पड़ी।
उसने पास जाकर देखा तो घाव से तेज बदबू और कीड़े निकलते देख दहल उठा।

जब उसने आसपास के लोगों से पूछा तो उन्हें बेहद शर्मनाक जवाब मिला—
“दो दिन से पड़ा है, कोई लेने नहीं आया… पिता शराबी है, मां भाग गई।”

स्वास्थ्यकर्मी ने एक पल भी देर नहीं की और तुरंत चाइल्ड लाइन को फोन किया।


चाइल्ड लाइन टीम पहुंची, बच्चा बेहद क्रिटिकल—तौसीफ वारसी और पूजा देवी ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलते ही चाइल्ड लाइन प्रभारी तौसीफ वारसी और टीम मेंबर पूजा देवी मौके पर पहुंची।
उन्होंने बच्चा उठाया तो वह दर्द से कराह भी न सका—इतना कमजोर और घायल हो चुका था।

टीम ने तुरंत उसे जिला अस्पताल के पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चा क्रिटिकल स्थिति में था—

  • शरीर में पोषण का बेहद अभाव

  • सिर का घाव बेहद संक्रमित

  • बच्चे को तेज बुखार

  • डिहाइड्रेशन की स्थिति

फिर भी डॉक्टरों ने लगातार निगरानी में रखकर उपचार शुरू किया।


NRC में चल रहा उपचार—डॉक्टरों ने बताया अब खतरे से बाहर

जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की हालत धीरे-धीरे सुधर रही है।

  • संक्रमण रोका जा चुका है

  • घाव की सफाई की गई

  • एंटीबायोटिक दी जा रही

  • पोषण आहार शुरू किया गया है

चाइल्ड लाइन अधिकारियों ने कहा कि यह Kannauj child abandonment case बेहद संवेदनशील है और बच्चे के भविष्य को लेकर सावधानीपूर्वक निर्णय लिया जाएगा।


पिता फरार—गांव के लोग जानते थे लेकिन किसी ने मदद नहीं की!

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि:

  • गांव के कई लोग जानते थे कि बच्चा दो दिन से वहीं पड़ा था

  • सभी जानते थे कि पिता ने बच्चे को छोड़ दिया है

  • फिर भी किसी ने बच्चे को अस्पताल नहीं पहुंचाया

  • किसी ने पुलिस या चाइल्ड लाइन को तत्काल सूचना नहीं दी

यह संवेदनहीनता उजागर करती है कि समाज में अभी भी कई जगहों पर बाल संरक्षण को गंभीरता से नहीं लिया जाता।


चाइल्ड लाइन का बयान—“बच्चा जैविक माता-पिता के ही सुपुर्द किया जाएगा, लेकिन इलाज पूरा होने के बाद”

चाइल्ड लाइन प्रभारी तौसीफ वारसी ने बयान दिया—

  • “बच्चा गंभीर हालत में मिला था।”

  • “अब उसे बेहतर इलाज मिल रहा है।”

  • “उसकी दादी अस्पताल पहुंची थीं।”

  • “लेकिन बच्चा तभी सुपुर्द किया जाएगा जब वह पूरी तरह स्वस्थ हो जाए।”

टीम का कहना है कि बच्चे की सुरक्षा और भविष्य दोनों पर ध्यान देते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


बाल संरक्षण विभाग सक्रिय—पिता के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी

प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि पिता ने—

  • जानबूझकर बच्चा छोड़कर अपराध किया

  • क्या वह मानसिक रूप से अस्थिर है

  • क्या वह बाल हिंसा (child cruelty) के आरोप में दोषी है

इस Kannauj child abandonment case में बाल संरक्षण से जुड़े कई नियम लागू हो सकते हैं।


कन्नौज का यह **Kannauj child abandonment case** न सिर्फ एक अपराध है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। एक दो साल का मासूम दो दिनों तक तड़पता रहा, और कोई उसे उठाने तक तैयार नहीं हुआ। सौभाग्य से स्वास्थ्यकर्मी की सजगता और चाइल्ड लाइन टीम के त्वरित हस्तक्षेप से बच्चा आज सुरक्षित है। लेकिन यह घटना चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति समाज को अधिक जागरूक और जिम्मेदार होना होगा, ताकि ऐसी भयावह घटनाएं दोबारा न हों।

 

News-Desk

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