उत्तर प्रदेश

Kannauj में सनसनी: वाहन चेकिंग के दौरान ‘विधायक कैलाश सिंह राजपूत’ नाम सुनते ही पुलिस ने युवक पर बरसाईं लाठियां, हालत गंभीर!

Kannauj जिले में मंगलवार की रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक निर्दोष युवक को केवल उसके नाम के कारण बेरहमी से पीट दिया। युवक का नाम कैलाश सिंह राजपूत है — जो संयोगवश इलाके के विधायक का भी नाम है। पुलिसकर्मी यह सोच बैठे कि युवक कोई राजनीतिक मज़ाक उड़ा रहा है, और उसके बाद जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया।


घटना का पूरा सिलसिला: ‘नाम सुनते ही’ क्यों भड़क गई पुलिस?

जानकारी के मुताबिक, थाना सौरिख के खड़नी चौकी क्षेत्र में यह घटना हुई। ग्राम नगला गूड़ा निवासी कैलाश सिंह राजपूत, पिता सुरेश चंद, शाम 6:30 बजे बाजार से सामान लेकर घर लौट रहे थे।
नहर पुल के पास चौकी इंचार्ज अंकित यादव, सिपाही अरविंद यादव और विशाल मिश्रा वाहन चेकिंग में तैनात थे।

आरोप है कि जब युवक अपनी बाइक लेकर चेकिंग प्वाइंट से थोड़ा आगे निकल गया, तो पुलिस ने उसे रोकते हुए गालियां देनी शुरू कर दीं। बात यहीं तक रहती, लेकिन जैसे ही पुलिस ने नाम पूछा और युवक ने शांत स्वर में कहा— “कैलाश सिंह राजपूत,” वैसे ही पुलिसकर्मियों का पारा चढ़ गया।


‘तू विधायक बन गया?’ – पुलिस के ताने और फिर लाठीचार्ज

गवाहों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने युवक पर तंज कसते हुए कहा, “तू बड़ा नेता बन गया है क्या? विधायक का नाम बता रहा है!”
इसके बाद, बिना कुछ सोचे-समझे, तीनों पुलिसवालों ने डंडों से युवक पर ताबड़तोड़ वार शुरू कर दिए। जब तक आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक कैलाश सिंह राजपूत लहूलुहान होकर गिर चुके थे।

ग्रामवासियों ने तत्काल घटना की सूचना परिजनों और क्षेत्रीय विधायक कैलाश सिंह राजपूत को दी। मामला सुनते ही विधायक ने तुरंत थाने का रुख किया।


विधायक का थाने में गुस्सा फूटा: ‘जनता का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं’

विधायक कैलाश सिंह राजपूत स्वयं थाने पहुंचे और घायल युवक को साथ लेकर थाना प्रभारी निरीक्षक जयंती प्रसाद गंगवार से मिले।
विधायक ने वहां मौजूद अधिकारियों से कहा, “यह कैसी कानून व्यवस्था है, जहां नाम बताने पर किसी को पीट दिया जाता है?
थाने में मौजूद लोगों के सामने विधायक ने युवक के कपड़े उतरवाकर चोटों के निशान दिखाए, जिससे सब दंग रह गए।

विधायक ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार से शिकायत दर्ज कराई और दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।


घायल युवक की हालत गंभीर, भीड़ में उबाल

युवक को तत्काल सीएचसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई। जैसे ही घटना की खबर फैली, सैकड़ों ग्रामीण और समर्थक अस्पताल पहुंच गए।
भीड़ ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की और मांग की कि “जो वर्दी में हैं, वो कानून के रक्षक हैं, राक्षस नहीं।”

प्रभारी निरीक्षक जयंती प्रसाद गंगवार ने बताया कि मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और जांच शुरू कर दी गई है।


विधायक ने उठाया बड़ा सवाल: चौकी प्रभारी पर लगाया गंभीर आरोप

विधायक ने आरोप लगाया कि चौकी प्रभारी अंकित यादव ‘सपाई मानसिकता’ से काम कर रहे हैं, और क्षेत्र में आम जनता का उत्पीड़न कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मैं जनता का प्रतिनिधि हूं, अगर जनता असुरक्षित महसूस करेगी तो विकास कैसे होगा? ऐसे अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”

सूत्रों के अनुसार, विधायक की शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक ने आंतरिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं और इस घटना ने पूरे जिले के पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है।


लोगों में गुस्सा और भय: ‘नाम बताने पर भी खतरा!’

स्थानीय नागरिकों ने कहा कि अब लोग डरने लगे हैं कि कहीं अपना नाम बताने पर भी पुलिस न भड़क जाए।
एक दुकानदार ने कहा, “अगर नाम ही गुनाह बन जाए तो आम आदमी कहां जाएगा? पुलिस को जनता की रक्षा करनी चाहिए, न कि उन्हें पीटना।”

यह घटना केवल एक व्यक्ति की पिटाई नहीं, बल्कि जनता और पुलिस के बीच भरोसे पर गहरी चोट है।


प्रदेश में बढ़ते पुलिस अत्याचार पर उठे सवाल

यह कोई पहला मामला नहीं है जब कन्नौज या यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों।
पिछले कुछ महीनों में वाहन चेकिंग और हिरासत में पिटाई के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें निर्दोष लोगों को बेवजह प्रताड़ित किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोगों के मन में भय और असुरक्षा की भावना भी पैदा करती हैं।

कानूनविदों ने सुझाव दिया है कि हर ऐसी घटना में CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।


राजनीतिक हलचल और जनता की निगाहें जांच पर

जैसे-जैसे यह खबर फैल रही है, पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने भी इस घटना पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं – “नाम एक, लेकिन अपराध नहीं!
हर कोई जानना चाहता है कि क्या वाकई दोषी पुलिसकर्मियों को सजा मिलेगी या मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा।


जांच की मांग और प्रशासन की जिम्मेदारी

विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने साफ कहा कि वे इस मुद्दे को विधानसभा तक उठाएंगे और पीड़ित को न्याय दिलवाएंगे। उन्होंने कहा, “अगर जनता के बीच डर का माहौल बनता है, तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाएगा?”उधर, जिलाधिकारी कार्यालय से सूत्रों ने बताया कि जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया चल रही है, जो एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।


⚫ यह घटना केवल एक पुलिस-नागरिक टकराव नहीं, बल्कि एक गहरी चेतावनी है कि सत्ता और सुरक्षा बलों को जनता की सेवा के लिए संवेदनशील रहना होगा।
⚫ कन्नौज में हुई यह मारपीट अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है।
⚫ जनता अब प्रशासन से केवल एक जवाब चाहती है – क्या ‘नाम बताना’ भी अब अपराध है?

 

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