Kanpur पूल कांड: ठेकेदार की रहस्यमयी मौत के बाद रिसॉर्ट सील, मालिक और बेटे पर केस दर्ज, उठे कई सवाल
News-Desk
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Contractor Drowns in Resort, FIR on Resort Owner, kanpur, Kanpur Pool Death, Kanpur Shikhar Singh Death, Police Sealed Resort Kanpur, Resort Sealed by Police, Swimming Pool Death, Water Box Resort KanpurKanpur का चर्चित पूल हादसा लगातार सुर्खियों में है। रविवार को चकेरी थानाक्षेत्र के सनिगवां स्थित ‘द वाटर बॉक्स रिसॉर्ट’ में आयोजित एक पूल पार्टी के दौरान नगर निगम के ठेकेदार शिखर सिंह की डूबकर मौत हो गई थी। इस रहस्यमयी हादसे ने न सिर्फ पुलिस को सतर्क कर दिया है, बल्कि अब इस मामले ने कानूनी और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है।
पूरा रिसॉर्ट सील, पुलिस की बड़ी कार्रवाई
शुरुआती जांच के बाद बुधवार सुबह पुलिस ने पूरे ‘द वाटर बॉक्स रिसॉर्ट’ को सील कर दिया। चकेरी थाना प्रभारी संतोष कुमार शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस टीम सुबह मौके पर पहुंची और रिसॉर्ट के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि जांच में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसलिए रिसॉर्ट को पूरी तरह से बंद करना जरूरी समझा गया।
स्विमिंग पूल में नहीं थे सुरक्षा उपकरण, मालिक और बेटे पर केस दर्ज
जांच में सामने आया कि जिस स्विमिंग पूल में शिखर सिंह की मौत हुई, वहां पर कोई भी सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं था। न लाइफ जैकेट, न लाइफ सेविंग रॉड और न ही कोई तैराकी की निगरानी के लिए स्टाफ तैनात था। इस गंभीर लापरवाही के चलते पुलिस ने रिसॉर्ट के मालिक नरेंद्र सिंह और उनके बेटे पृथ्वी सिंह चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304A (लापरवाही से मौत) और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
शिखर सिंह: एक होनहार ठेकेदार की दुखद अंत
शिखर सिंह, कानपुर नगर निगम के साथ लंबे समय से जुड़े एक प्रसिद्ध ठेकेदार थे। रविवार को वह अपने कुछ साथियों के साथ पूल पार्टी के लिए ‘द वाटर बॉक्स रिसॉर्ट’ आए थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जैसे ही वह पूल में उतरे, कुछ ही पलों में हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्हें अचानक दिखाई देना बंद हो गया और जब लोगों ने देखा कि वह पानी से बाहर नहीं आ रहे हैं, तब अफरा-तफरी मच गई। बाहर निकालने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पार्टी के दौरान लापरवाही की अनेकों परतें खुलीं
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के दौरान कोई लाइफ गार्ड तैनात नहीं था। सुरक्षा के नाम पर केवल कुछ सामान्य कर्मचारी मौजूद थे, जो पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं थे। साथ ही, रिसॉर्ट में शराब पार्टी की भी बात सामने आ रही है, जिसे लेकर जांच अधिकारी अब सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो खंगालने में जुटे हैं।
क्या यह सिर्फ हादसा था या इसके पीछे है कोई साजिश?
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब शिखर सिंह के परिवार ने साजिश की आशंका जताई। उनका कहना है कि शिखर एक अच्छे तैराक थे और इतनी आसानी से डूबना असंभव है। परिवार का आरोप है कि या तो उन्हें नशे की हालत में पानी में उतारा गया, या फिर यह कोई सोची-समझी चाल थी। पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, रिसॉर्ट की सुरक्षा व्यवस्था, और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर हर पहलु की बारीकी से जांच कर रही है।
रिसॉर्ट इंडस्ट्री पर भी उठे सवाल
यह मामला सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं रह गया है। इसने अब स्विमिंग पूल और रिसॉर्ट संचालन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर ही नहीं, देश भर में ऐसे कई रिसॉर्ट्स हैं जहां सुरक्षा के मानक कागज़ों पर ही सीमित रह जाते हैं। लाइफ गार्ड की अनिवार्यता, मेडिकल इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की निगरानी प्रशासन द्वारा कितनी गंभीरता से की जा रही है, यह एक बड़ा प्रश्न है।
कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम की मांग
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कड़े प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर रिसॉर्ट्स को नियमित रूप से जांचा जाता, तो ऐसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं। साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि शिखर सिंह के परिवार को मुआवजा दिया जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
क्या पुलिस कर पाएगी निष्पक्ष जांच?
अब जब मामले में रिसॉर्ट मालिक और उनके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित जांच को अंजाम देना है। खासकर जब यह मामला एक प्रभावशाली व्यक्ति की मौत से जुड़ा है, तो इस बात की निगरानी भी जरूरी होगी कि किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक दबाव जांच को प्रभावित न करे।
रिसॉर्ट संचालन के नियमों में बदलाव की मांग
इस घटना के बाद प्रशासन पर यह दबाव बन रहा है कि वह स्विमिंग पूल और रिसॉर्ट संचालन की नई गाइडलाइंस तैयार करे। इसमें सुरक्षा मानकों, कर्मचारियों की योग्यता, आपातकालीन प्रतिक्रिया की रणनीति और मेहमानों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नियमावली बनाई जाए। अगर प्रशासन इस दिशा में सक्रिय होता है, तो भविष्य में इस तरह के हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
परिवार और शहर में शोक की लहर
शिखर सिंह की असमय मौत ने न केवल उनके परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि कानपुर नगर निगम और ठेकेदारी जगत में भी शोक की लहर है। उनके साथी और जानने वाले उन्हें एक ईमानदार, मेहनती और मिलनसार व्यक्ति के रूप में याद कर रहे हैं।

