उत्तर प्रदेश

Kanpur में दर्दनाक हादसा: वेतन न मिलने से क्षुब्ध बुजुर्ग गार्ड ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में अपार्टमेंट सचिव पर लगाए गंभीर आरोप

Kanpur के स्वरूपनगर थाना क्षेत्र में शनिवार देर शाम एक हृदयविदारक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। साईं अपार्टमेंट के 73 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड कैलाश नाथ ने कथित रूप से वेतन न मिलने और अपार्टमेंट सचिव द्वारा मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर अपार्टमेंट की पार्किंग में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
यह घटना उस समय सामने आई जब अपार्टमेंट में रहने वाले लोग अपनी गाड़ियाँ लेने पार्किंग पहुंचे और उन्होंने गार्ड का शव फंदे से लटकता देखा। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद स्वरूपनगर थाने की टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञ मौके पर पहुंची।


सुसाइड नोट ने खोला वेतन न मिलने का दर्द

पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें मृतक ने अपार्टमेंट के सचिव मनोज गंगवानी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट के मुताबिक, तीन महीने से वेतन न मिलने और बार-बार अपमानित किए जाने के कारण गार्ड ने यह कदम उठाया।
सुसाइड नोट में लिखा था, “मैंने कई बार वेतन मांगा, लेकिन सचिव मनोज ने न सिर्फ पैसा नहीं दिया बल्कि मुझे अपमानित किया। दिवाली पर भी एक हजार रुपये मांगे थे, मगर उन्होंने एक रुपया तक नहीं दिया।”


15 वर्षों से नौकरी, लेकिन अंत बेहद दर्दनाक

मृतक कैलाश नाथ, निवासी नवाबगंज, पिछले 15 वर्षों से साईं अपार्टमेंट में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में तैनात थे। परिवार में उनकी पत्नी बिटोला देवी और एक शादीशुदा बेटी वंदना हैं। परिजनों के अनुसार, कैलाश नाथ बेहद ईमानदार और मेहनती व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अपार्टमेंट की सुरक्षा में गुजार दी।
भतीजे महेंद्र नाथ ने बताया कि उनके चाचा कई दिनों से परेशान थे। “उन्होंने कई बार कहा कि सचिव मनोज गंगवानी वेतन नहीं दे रहे। दिवाली पर जब उन्होंने थोड़ी रकम मांगी तो भी मना कर दिया। आज सुबह तक वो सामान्य दिख रहे थे, लेकिन शाम को यह घटना हो गई।”


पुलिस ने दर्ज किया केस, फॉरेंसिक टीम की जांच जारी

स्वरूपनगर थाना प्रभारी सूर्यबली पांडेय ने बताया कि मृतक की पत्नी बिटोला देवी की तहरीर पर सचिव मनोज गंगवानी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC धारा 306) का मुकदमा दर्ज किया गया है।
फॉरेंसिक टीम ने सुसाइड नोट और घटनास्थल से अन्य साक्ष्य जब्त कर लिए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अब अपार्टमेंट के निवासियों के बयान दर्ज कर रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।


स्थानीय लोगों में गुस्सा और दुख

घटना के बाद अपार्टमेंट में रह रहे लोगों में गहरा आक्रोश है। कई निवासियों ने कहा कि कैलाश नाथ सभी के प्रिय थे, हमेशा समय पर ड्यूटी पर रहते और पूरे परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे।
एक निवासी ने कहा, “कैलाश जी कभी छुट्टी नहीं लेते थे, वे हमेशा अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते थे। अगर उन्हें समय पर वेतन मिल जाता, तो शायद आज वो हमारे बीच होते।”


बुजुर्ग कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर सवाल

यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि समाज के उस तबके की वेदना को उजागर करती है जो आर्थिक शोषण और लापरवाही के कारण टूट जाता है।
73 वर्ष की उम्र में भी कैलाश नाथ नौकरी करने को मजबूर थे, ताकि परिवार का खर्च चल सके। उनका यह कदम यह दिखाता है कि कई बुजुर्ग कर्मचारी आज भी वेतन में देरी, अनुचित व्यवहार और शोषण के कारण परेशान हैं।


पुलिस की पड़ताल — सचिव से होगी पूछताछ

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी सचिव मनोज गंगवानी से पूछताछ की जाएगी और अपार्टमेंट की CCTV फुटेज भी खंगाली जाएगी।
एक अधिकारी ने बताया कि यदि जांच में यह साबित हुआ कि सचिव ने जानबूझकर वेतन रोका या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


शहर में फैली सनसनी — सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल

घटना की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने गार्ड के लिए न्याय की मांग शुरू कर दी। ट्विटर और फेसबुक पर #JusticeForKailashNath ट्रेंड करने लगा।
कई यूजर्स ने लिखा कि “अगर किसी कर्मचारी को तीन महीने तक वेतन न मिले और वह न्याय की उम्मीद में मर जाए, तो यह हमारे सिस्टम की विफलता है।”


कानपुर प्रशासन पर भी उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या कानपुर नगर निगम और लेबर डिपार्टमेंट ऐसे मामलों पर कोई मॉनिटरिंग नहीं करता?
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि “सिक्योरिटी गार्ड्स, हाउसकीपिंग और सफाई कर्मचारियों को अक्सर वेतन देने में देरी की जाती है। ऐसे मामलों में तत्काल एक्शन लेने के लिए जिला प्रशासन को ठोस नीति बनानी चाहिए।”


दिवाली के ठीक बाद क्यों हुई यह घटना?

घटना का समय भी सवाल खड़े करता है। दिवाली जैसे पर्व के बाद, जब हर घर खुशियों से भरा था, उसी समय कैलाश नाथ जैसे बुजुर्ग गार्ड की आर्थिक मजबूरी ने उनकी जिंदगी छीन ली।
कई लोगों का मानना है कि त्योहारों के दौरान बोनस या वेतन समय पर न मिलना, मानसिक तनाव का कारण बनता है।


मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बुजुर्ग कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में नियोक्ता पर कठोर दंड होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और “कैलाश नाथ” इस तरह की वेदना न झेले।


कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह साबित हो जाए कि मनोज गंगवानी ने जानबूझकर वेतन रोका और अपमानित किया, तो यह आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला बनता है।
ऐसे मामलों में आरोपी को 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस को अब यह साबित करना होगा कि गार्ड को किस हद तक प्रताड़ित किया गया था।


कैलाश नाथ की अंतिम यात्रा पर उमड़ा जनसैलाब

रविवार सुबह कैलाश नाथ की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। हर आंख नम थी। लोगों ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि “सम्मान और अधिकारों” की मौत है। परिवार ने प्रशासन से न्याय की मांग की है और कहा कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, वे चैन से नहीं बैठेंगे।


**कानपुर का यह मामला सिर्फ एक आत्महत्या नहीं बल्कि मजदूर वर्ग की मौन पुकार है।** 73 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड कैलाश नाथ की दर्दनाक मौत ने नियोक्ताओं की जिम्मेदारी, बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति और समाज की संवेदनहीनता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन न्याय दिला पाता है या यह मामला भी सिर्फ एक “घटना” बनकर रह जाएगा।

 

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