Muzaffarnagar News: शुकतीर्थ के प्रसिद्ध गंगा दशहरा मेला में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) तीर्थनगरी शुकतीर्थ के प्रसिद्ध ज्येष्ठ गंगा दशहरा मेला में हर-हर गंगे, जय गंगे मैया, जय बजरंग बली, शुकदेव मुनी के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। दूरदराज से श्रद्धालु कार व बसों में सवार होकर मेला में पहुंच रहे हैं।
नगरी में सुरक्षा को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। श्रद्धालु गंगा घाट पर स्नान करने के बाद हनुमद्धाम, गणेश धाम, शिव धाम, दुर्गा धाम, मां पीतांबरा, श्री गंगा मंदिर आदि मंदिरों में पूजा-अर्चना कर श्रद्धा भाव से प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांग रहे हैं। मेला के बाजारों में सामान खरीदने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है।
सुरक्षा को देखते हुए मंदिरों के मुख्य द्वार व मेला में जगह-जगह पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। महिला स्नान घाट पर महिला पुलिस फोर्स लगाया गया है।
घाट पर असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए मचान बनाए गए हैं। एसडीएम जानसठ जयेंद्र सिंह ने मेला की व्यवस्था का निरीक्षण किया। गंगा घाट पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा शिविर लगाया गया है।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी जीतेंद्र कुमार, अभियंता पवन गोयल, अवर अभियंता कौशल वीर, सुरेंद्र सिंह, प्रभारी निरीक्षक पंकज राय व पुलिस चौकी प्रभारी ललित कुमार आदि लगे हुए हैं।
गंगा दशहरा पर बहुत महत्वः ओमानंद
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित श्रीशुकदेव आश्रम में गंगा दशहरा मेला में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि गंगा हमारी भारतीय जीवन और संस्कृति की अमृत धारा तथा जीवन का प्राण है। गंगा जन-जन के कल्याण के लिए बहती है।
गंगा से जीवन और मृत्यु का नाता है। गंगा की अविरलता स्वच्छता और पवित्रता ही मानव के मन में पवित्र भाव का संचार कराती है। गंगा दशहरा के दिन स्नान करने से मनुष्यों के सभी पाप-ताप नष्ट हो जाते हैं। दशहरा के स्नान से कायिक, वाचिक और मानसिक दश पापों का नाश तथा मन में पवित्रता का संचार होता है।
गंगा स्नान व दान सेवा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गंगा दशहरा पर स्नान, दान, जप, तप व व्रत आदि का बहुत महत्व बताया जाता है। गंगा दशहरा के दिन स्नान करके शिवलिंग का गंध, पुष्प, धूप, दीप, शहद और फल इत्यादि से पूजन करना चाहिए तथा जरूरतमंदों को दान कर पुण्य कमाना चाहिए। इस दौरान कथा व्यास सुमन कृष्ण शास्त्री, कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री, ठाकुर प्रसाद व शैलेश आदि मौजूद रहे।

