Operation Sindhu: ईरान से 1,117 भारतीयों की बहादुरी से घर वापसी – कश्मीर के छात्रों की जान बचाने वाला ऐतिहासिक मिशन”
ईरान और इजरायल के बीच बीते कुछ दिनों से चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात ने न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ऐसे में भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए “Operation Sindhu“ के नाम से एक साहसिक और संवेदनशील मिशन शुरू किया है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों, खासकर छात्रों को सुरक्षित निकालकर देश वापस लाना है।
🔴 ईरान में भारतीय छात्रों की बढ़ती चिंता और खौफ
इस संघर्ष से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं वो भारतीय छात्र जो शिक्षा के उद्देश्य से ईरान के अलग-अलग शहरों में रह रहे थे। विशेष रूप से कश्मीर से आए सैकड़ों छात्र, जो वहां मेडिकल और टेक्निकल कोर्सेस कर रहे थे, खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे थे। बम धमाकों और सैन्य कार्रवाई के बीच ज़िंदगी का हर पल तनावपूर्ण हो चुका था।
🔵 मैहन एयर का ऐतिहासिक फ्लाइट: 290 छात्रों की घर वापसी
शनिवार की रात 11:30 बजे, मशहद से उड़ान भरने वाली मैहन एयर की फ्लाइट W5071 दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड हुई। इस विमान में कुल 290 भारतीय नागरिक सवार थे, जिनमें से अधिकांश कश्मीर से थे। यह फ्लाइट ऑपरेशन सिंधु के तहत भेजी गई थी और इसने एक बड़ी राहत की सांस दी उन परिवारों को जो कई दिनों से अपनों के खैरियत की दुआ कर रहे थे।
🟢 अब तक 1,117 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई कि अब तक 1,117 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक ईरान से निकाला जा चुका है। यह आंकड़ा खुद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साझा किया। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद जटिल परिस्थितियों में चलाया गया, लेकिन सरकार की प्रतिबद्धता और रणनीति ने इसे सफल बनाया।
🟣 जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन का भावुक आभार
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन और छात्रों के परिजनों ने इस सफल रेस्क्यू मिशन के लिए भारत सरकार का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि युद्ध क्षेत्र में फंसे छात्रों के लिए यह राहत किसी वरदान से कम नहीं है। एसोसिएशन के अनुसार, अभी भी ईरान में करीब 700 कश्मीरी छात्र फंसे हुए हैं, जिन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालने की ज़रूरत है।
🟤 छात्रों ने साझा किया दर्दनाक अनुभव
दिल्ली पहुंचने के बाद कई छात्रों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कैसे वे लगातार धमाकों की आवाज़ में पढ़ने की कोशिश कर रहे थे, कैसे बंकरों में समय बिताना पड़ा, और कैसे हर पल उन्हें अपनों की याद सता रही थी। एक छात्रा ने बताया कि “हमने अपनी पढ़ाई तो की, लेकिन मौत की परछाइयों के बीच… हम ज़िंदा लौट आए, यही हमारे लिए सबसे बड़ी बात है।”
🟠 विदेश मंत्रालय की निगरानी में लगातार चल रहा है ऑपरेशन
भारत सरकार का यह मिशन अब भी जारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, रविवार को दो और फ्लाइट्स ईरान से भारतीय नागरिकों को लेकर भारत आने वाली हैं। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी सीधे मंत्रालय के उच्च अधिकारियों द्वारा की जा रही है ताकि हर भारतीय सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट सके।
🟣 ईरान में फंसे बाकी भारतीयों को लेकर सरकार सतर्क
ईरान में अभी भी भारतीय नागरिकों की एक बड़ी संख्या मौजूद है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश छात्र हैं, जिनमें बड़ी तादाद जम्मू-कश्मीर के युवाओं की है। भारत सरकार ने वहां की स्थानीय एजेंसियों से भी संपर्क साधा है और वहां की स्थिति का लगातार आंकलन किया जा रहा है ताकि बाकी नागरिकों को भी जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।
🟡 सरकार की सक्रियता और समर्पण का उदाहरण बना ऑपरेशन सिंधु
ऑपरेशन सिंधु न केवल एक मानवतावादी पहल है बल्कि यह भारत सरकार की तत्परता और जिम्मेदारी का भी परिचायक है। अंतरराष्ट्रीय संकट की घड़ी में अपने नागरिकों की रक्षा के लिए किया गया यह कदम दुनिया भर में भारत की छवि को मजबूती देता है।
🔴 परिवारों को मिली राहत, लौटे चेहरों पर खुशी
जैसे ही छात्र दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे, वहां मौजूद उनके परिवारों की आंखें नम हो गईं। लंबे समय से अनिश्चितता में जी रहे परिजन अपने बच्चों को सकुशल देखकर सरकार और अधिकारियों का धन्यवाद करते नहीं थक रहे हैं। कश्मीर से आए एक पिता ने कहा, “मैंने बेटे को गले लगाते ही बस इतना कहा – शुक्र है, तू बच गया।”

