Pakistan में 12 नए प्रांतों की तैयारी! संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान का बड़ा बयान—कौन, कहाँ और क्यों होगा बंटवारा?
News-Desk
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Abdul Aleem Khan statement, MQM-P constitutional amendment, Pakistan governance crisis, Pakistan new provinces, Pakistan political restructuring, province division controversy, Punjab split proposal, Sindh division debatePakistan new provinces को लेकर उठी चर्चा अब महज़ राजनीतिक बयान नहीं रही—बल्कि यह देश के भविष्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक बहस में बदल चुकी है। संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान ने खुलकर कहा है कि पाकिस्तान को छोटे-छोटे प्रांतों में बांटने का समय आ चुका है। उनके अनुसार यह कदम देश में शासन को अधिक प्रभावी, सरल और जवाबदेह बनाएगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान आर्थिक संकट, राजनीतिक विभाजन और संघीय संरचना की कमजोरियों से जूझ रहा है।
रविवार को शेखूपुरा में आयोजित IPP (इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी) के कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने यह बयान दिया। यह पार्टी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार का हिस्सा है, इसलिए यह प्रस्ताव सिर्फ राजनीतिक शोर नहीं बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक संकेत माना जा रहा है।
अब्दुल अलीम खान का बड़ा दावा—“अब पाकिस्तान में छोटे प्रांत बनना तय”
IPP नेता और संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान ने कहा—
“हमारे आसपास के देशों में छोटे प्रांत हैं, जिससे शासन बेहतर होता है। पाकिस्तान को भी उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। छोटे प्रांत बनेंगे तो व्यवस्था मजबूत होगी।”
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि—
पंजाब को उत्तर, मध्य और दक्षिण हिस्सों में बांटा जा सकता है
सिंध में कराची सिंध, मध्य सिंध और ऊपरला सिंध बनाए जा सकते हैं
खैबर पख्तूनख्वा (KP) में उत्तरी KP, दक्षिणी KP और आदिवासी KP/फाटा वाला क्षेत्र अलग किया जा सकता है
बलूचिस्तान को पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में बांटा जा सकता है
यानी पूरा पाकिस्तान 12 नए प्रशासनिक हिस्सों में ढाला जा सकता है।
अभी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक नक्शा नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह विभाजन चर्चा का केंद्र बन गया है।
किन नए प्रांतों की सबसे ज्यादा चर्चा? विस्तृत सूची
राजनीतिक हलकों में जिन संभावित प्रांतों की चर्चा चल रही है, वे इस प्रकार हैं—
पंजाब (3 हिस्से)
उत्तर पंजाब
मध्य पंजाब
दक्षिण पंजाब
सिंध (3 हिस्से)
कराची सिंध
मध्य सिंध
ऊपरला सिंध
खैबर पख्तूनख्वा/KP (3 हिस्से)
उत्तरी KP
दक्षिणी KP
आदिवासी KP / फाटा रीजन
बलूचिस्तान (3 हिस्से)
पूर्व बलूचिस्तान
पश्चिम बलूचिस्तान
दक्षिणी बलूचिस्तान
यदि यह नक्शा लागू होता है, तो पाकिस्तान का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा—और यह देश के इतिहास में सबसे बड़ा पुनर्गठन होगा।
PPP और सिंध का गुस्सा—“किसी भी कीमत पर सिंध का बंटवारा नहीं!”
इस प्रस्ताव ने सबसे ज्यादा नाराज़ किया है पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और खासकर सिंध के नेताओं को।
शहबाज सरकार का ही हिस्सा होने के बावजूद PPP ने साफ कहा—
“सिंध को बांटने का सवाल ही नहीं उठता। कोई भी ऐसा कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह पहले ही चेतावनी दे चुके हैं—
“सिंध के हितों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को मंजूर नहीं किया जाएगा। नए प्रांतों की अफवाहें फैलाना बंद करें—कोई ताकत सिंध को नहीं बांट सकती।”
PPP लंबे समय से सिंध के विभाजन का विरोध करती रही है।
उधर MQM-P, जो कराची आधारित राजनीति करती है, लंबे समय से नए प्रांतों की मांग कर रही है और अब वह इसे 28वें संवैधानिक संशोधन के जरिए आगे बढ़ाने की बात कर रही है।
इत्तेहाद या टकराव?—कई छोटी पार्टियां भी खुलकर विरोध में
PPP के साथ-साथ कई छोटे दल भी इस प्रस्ताव को देश की एकता के खिलाफ मान रहे हैं—
ANP (अवामी नेशनल पार्टी)
कई बलूच राष्ट्रवादी संगठन
इन दलों ने कहा कि—
यह “बांटो और राज करो” की नीति है
छोटे प्रांत बनेंगे तो स्थानीय पहचान और संस्कृति को नुकसान होगा
बड़े प्रांतों की राजनीतिक ताकत कमजोर हो जाएगी
सेना और केंद्र की पकड़ और मजबूत हो जाएगी
बलूचिस्तान जैसे क्षेत्रों में तनाव और बढ़ सकता है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से पहले से अस्थिर पाकिस्तान और अधिक राजनीतिक उलझनों में घिर सकता है।
क्यों बढ़ रहा है विभाजन का शोर? सेना की भूमिका पर भी सवाल
Pakistan new provinces की बहस ने पाकिस्तान में सेना की भूमिका को भी चर्चा में ला दिया है।
कई राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि—
पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे पर सेना का नियंत्रण बढ़ा है
छोटे प्रांत बनाना संभवतः केंद्र और सेना के नियंत्रण को बढ़ाने का तरीका भी हो सकता है
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह कदम वास्तविक प्रशासनिक सुधार है, या फिर सत्ता संतुलन का एक नया अध्याय?
नए प्रांतों के लिए क्या चाहिए?—दो-तिहाई बहुमत
संविधान के अनुसार—
नए प्रांत बनाने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है
यह प्रक्रिया पाकिस्तान के राजनीतिक ध्रुवीकरण के चलते और मुश्किल हो जाती है
अगर पाकिस्तान 12 प्रांतों में बंटता है, तो—
संसाधनों का बंटवारा
राजनीतिक प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय बजट
सैन्य प्रशासन
स्थानीय शासन
सब कुछ नए सिरे से तय करना पड़ेगा।
यह बदलाव पाकिस्तान के इतिहास का सबसे महंगा, जटिल और विवादित प्रशासनिक प्रयोग साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी—“प्रांत बढ़ाने से समस्याएं हल नहीं होंगी”
पाकिस्तान के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रख्यात विश्लेषक सैयद अख्तर अली शाह ने कहा—
“पाकिस्तान की समस्या प्रांतों की संख्या नहीं है। असली संकट है—कमजोर शासन, असमान कानून, जवाबदेही की कमी और स्थानीय सरकारों को अधिकार न मिलना।”
उनके अनुसार—
छोटे प्रांत बनाना समाधान नहीं
बिना संस्थागत सुधार के यह कदम उल्टा परेशानी बढ़ाएगा
थिंक टैंक PILDAT के प्रमुख अहमद बिलाल महबूब ने भी कहा कि—
प्रशासनिक फेरबदल से पिछले अनुभवों में शिकायतें बढ़ीं
खर्च बढ़ा
राजनीतिक विवाद बढ़े
जनता को राहत नहीं मिली
उनका स्पष्ट संदेश है—
“पहले स्थानीय सरकारों को मजबूत करें, फिर किसी बड़े बदलाव पर विचार करें।”

