आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र को स्वीकार करने से इनकार: Supreme Court
Supreme Court ने शुक्रवार को एक नाबालिग के अपहरण और बलात्कार से संबंधित अपराधों के लिए आरोपी की जमानत अर्जी पर विचार करते हुए आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए Supreme Court जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि आर्य समाज का काम मैरिज सर्टिफिकेट देना नहीं है। यह अधिकारियों का काम है। असली सर्टिफिकेट दिखाओ।
आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए Supreme Courtने आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की अवकाश पीठ ने वकील की इस दलील को खारिज कर दिया
जिसमें उसने कहा कि बलात्कार का आरोप लगाने वाली अभियोक्ता एक बालिग लड़की है और याचिकाकर्ता और लड़की की शादी पहले ही आर्य समाज में हो चुकी है। युवक ने मध्य भारतीय आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से जारी विवाह प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
लड़की के घरवालों ने उसे नाबालिग बताया था जिसके बाद आरोपी पर पॉक्सो एक्ट की धारा 363, 366 N, 384, 376 (2) (N), 384 आईपीसी और 5 (L) / 6। के तहत FIR दर्ज की गई थी। गौरतलब है कि इस मामले में Supreme Court ने अप्रैल में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने को हामी भर दी थी।
Supreme Court ने 4 अप्रैल को मध्य भारत आर्य प्रतिनिधि सभा (एक आर्य समाज संगठन) को विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के प्रावधानों का पालन करने का निर्देश देने वाले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की थी।
इस तब जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय ने आर्य प्रतिनिधि सभा से स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 की धाराओं 5, 6, 7 और 8 प्रावधानों को अपनी गाइडलाइन में एक महीने के अंदर शामिल करने के लिए कहा था।
हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आर्य समाज मंदिर के एक प्रधान द्वारा जारी किए गए शादी के प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए थे। गौरतलब है कि आर्य समाज एक हिन्दू सुधारवादी संगठन है, जिसकी स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने की थी।
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