दिल्ली हाई कोर्ट से Sameer Wankhede को झटका: ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ वेब सीरीज पर रोक की याचिका खारिज, अधिकार क्षेत्र पर उठे सवाल
Sameer Wankhede web series case ने गुरुवार को उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने आर्यन खान से जुड़े ड्रग केस के पूर्व जांच अधिकारी समीर वानखेड़े की याचिका को खारिज कर दिया। वानखेड़े ने लोकप्रिय वेब सीरीज “द बैड्स ऑफ बॉलीवुड” के खिलाफ यह याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सीरीज में उनका किरदार एक विवादित और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र दिल्ली हाई कोर्ट के पास नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वानखेड़े उचित अदालत में दोबारा याचिका दाखिल कर सकते हैं।
🔴 अदालत के दो अहम सवाल, अधिकार क्षेत्र पर फोकस
अंतरिम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो बुनियादी सवालों पर विचार किया। पहला, क्या यह मामला दिल्ली में सुनवाई योग्य है? दूसरा, क्या वेब सीरीज में समीर वानखेड़े का चित्रण प्रथम दृष्टया कानूनी रूप से नुकसानदेह माना जा सकता है?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध तथ्यों और प्रस्तुत दलीलों के आधार पर यह मामला दिल्ली के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया, लेकिन याचिकाकर्ता को अन्य उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटाने की छूट दी गई।
🔴 वकील की दलीलें और मीडिया संस्थानों का जिक्र
समीर वानखेड़े की ओर से वरिष्ठ वकील जे. साई दीपक ने अदालत में जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि वानखेड़े से जुड़े विभागीय मामले दिल्ली में लंबित हैं और कई प्रमुख मीडिया संस्थान, जिनमें हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस जैसे नाम शामिल हैं, दिल्ली में स्थित हैं। इसलिए, उनके अनुसार, इस मामले की सुनवाई दिल्ली में होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस वेब सीरीज का निर्देशक वही व्यक्ति है, जिसे पहले इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। दीपक ने दावा किया कि सीरीज के एक दृश्य में सीधे तौर पर वानखेड़े को निशाना बनाया गया है और यह सब व्यक्तिगत नाराजगी और बदले की भावना से प्रेरित है।
🔴 2 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग, दान का ऐलान
Sameer Wankhede web series case में वानखेड़े ने केवल सीरीज पर रोक लगाने की मांग नहीं की थी, बल्कि 2 करोड़ रुपये का मुआवजा भी मांगा था। उन्होंने अदालत को बताया कि यदि उन्हें यह राशि मिलती है, तो वे इसे टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दान करना चाहते हैं।
इस दावे ने मामले को सामाजिक सरोकार से भी जोड़ दिया, लेकिन अदालत का फैसला अधिकार क्षेत्र तक सीमित रहा।
🔴 विवादित सीन: क्यों भड़की बहस
वेब सीरीज के पहले एपिसोड में एक ऐसा दृश्य दिखाया गया है, जिसमें बॉलीवुड सेलेब्रिटीज एक सक्सेस पार्टी का हिस्सा बने हुए हैं। इसी दौरान एक अधिकारी ड्रग का सेवन कर रहे एक युवक को गिरफ्तार करता है। इस अधिकारी का लुक और व्यवहार समीर वानखेड़े से मिलता-जुलता बताया गया।
सीरीज के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इस किरदार की तुलना वानखेड़े से की जाने लगी। यही तुलना इस कानूनी लड़ाई की जड़ बनी।
🔴 आर्यन खान ड्रग केस की पृष्ठभूमि
Sameer Wankhede web series case की चर्चा आर्यन खान ड्रग केस के बिना अधूरी है। 2 अक्टूबर 2021 को नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की टीम ने गोवा जा रहे कोर्डेलिया क्रूज पर छापा मारा था। उस समय समीर वानखेड़े जोनल डायरेक्टर के पद पर तैनात थे और उनकी टीम ने पैसेंजर बनकर जहाज पर चढ़कर कार्रवाई की।
रात 10 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक चली इस रेड में कोकीन, चरस और अन्य मादक पदार्थों की बरामदगी का दावा किया गया। आर्यन खान और उनके दोस्तों को गिरफ्तार किया गया और कई हफ्तों तक उन्हें आर्थर रोड जेल में रखा गया।
🔴 जमानत, क्लीन चिट और विवादों की परतें
आर्यन खान को 30 अक्टूबर 2021 को जमानत मिली और 27 मई 2022 को पर्याप्त सबूतों के अभाव में उन्हें और पांच अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान समीर वानखेड़े खुद भी जांच के दायरे में आ गए थे। शाहरुख खान और वानखेड़े के बीच हुई कथित चैट्स भी सार्वजनिक हुई थीं, जिनमें मदद की बात सामने आई थी। इस प्रकरण ने वानखेड़े को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा।
🔴 ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ फिर विवादों में
यह वेब सीरीज केवल समीर वानखेड़े के मामले तक सीमित नहीं रही। सीरीज के सातवें एपिसोड में अभिनेता रणबीर कपूर को ई-सिगरेट पीते हुए दिखाया गया, जिसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायतकर्ता विनय जोशी ने आरोप लगाया कि इस दृश्य में कोई हेल्थ वॉर्निंग या डिस्क्लेमर नहीं दिया गया, जो युवाओं पर गलत असर डाल सकता है। इसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा और ऐसे कंटेंट पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने को कहा।
🔴 कानूनी दायरे और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बहस
Sameer Wankhede web series case ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। क्या किसी वेब सीरीज में किसी किरदार का काल्पनिक चित्रण मानहानि की श्रेणी में आता है, या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में रहता है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अदालतों को यह तय करना होता है कि क्या कंटेंट सीधे तौर पर किसी व्यक्ति की पहचान और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है या नहीं।
🔴 आगे की राह: दूसरी अदालत का दरवाजा
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद समीर वानखेड़े के पास अब यह विकल्प खुला है कि वे किसी अन्य सक्षम अदालत में अपनी याचिका दाखिल करें। उनके वकीलों की टीम इस दिशा में रणनीति बनाने में जुटी है।
वहीं, सीरीज के निर्माता इस फैसले को रचनात्मक स्वतंत्रता की जीत के रूप में देख रहे हैं।
🔴 सोशल मीडिया और जनमत की भूमिका
इस पूरे प्रकरण में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है। किरदार की तुलना से लेकर अदालत के फैसले तक, हर मोड़ पर जनता की राय ऑनलाइन मंचों पर सामने आई। कुछ लोग वानखेड़े के पक्ष में खड़े दिखे, तो कुछ ने सीरीज को मनोरंजन और कल्पना का हिस्सा बताया।
🔴 बॉलीवुड, कानून और समाज का संगम
Sameer Wankhede web series case अब केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं रहा, बल्कि यह बॉलीवुड की छवि, कानून की सीमाएं और समाज में बनने वाली धारणाओं का प्रतीक बन गया है। यह मामला आने वाले समय में वेब कंटेंट, सेंसरशिप और व्यक्तिगत अधिकारों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

