caste discrimination in India

वैश्विक

Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला: जेलों में जातिगत भेदभाव की समाप्ति की दिशा में बड़ा कदम

Supreme Court के इस फैसले को भारतीय न्यायिक प्रणाली में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जेलों में किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव अस्वीकार्य है और यह संविधान में निहित समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। यह निर्णय न केवल जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह सामाजिक न्याय के प्रति एक महत्वपूर्ण संदेश भी है।

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उत्तर प्रदेश

Kannauj: प्यार, धोखा और जातिगत भेदभाव का दर्दनाक मामला – सिपाही पर लगे गंभीर आरोप”

यह मामला Kannauj जिले के गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है, जहां पीड़िता का पति उसे प्रताड़ित करता था। परेशान पीड़िता ने पुलिस की मदद ली, जहां एक सिपाही ने उसकी मदद करने का दावा किया। धीरे-धीरे, सिपाही ने पीड़िता के प्रति हमदर्दी दिखाते हुए उसके जीवन में प्रवेश किया और उसे शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करना शुरू कर दिया। तीन साल तक यह सिपाही महिला के साथ लगातार यौन संबंध बनाता रहा।

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वैश्विक

Madhya Pradesh में अमानवीयता की हद: पेशाब करने के लिए  अनुसूचित जाति के नाबालिग दिव्यांग की बेरहमी से पिटाई

Madhya Pradesh हरदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिनव चौकसे ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। एसपी ने यह भी आश्वासन दिया कि पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

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