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क्या Trump चला रहे हैं India की ऊर्जा नीति? ईरान से वेनेजुएला की ओर तेल मोड़ने के दावे पर उठा वैश्विक तूफान

Trump running India oil policy—यह सवाल अब सिर्फ एक सुर्खी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा राजनीति का केंद्र बन चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने भारत, वेनेजुएला और ईरान के बीच तेल व्यापार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वॉशिंगटन डीसी से एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने दावा किया कि भारत अब ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा, बल्कि वेनेजुएला से तेल लेने का सौदा कर चुका है।

इस बयान के बाद कूटनीतिक गलियारों, ऊर्जा बाजारों और राजनीतिक मंचों पर हलचल तेज हो गई है। भारत सरकार की ओर से इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ट्रम्प के दावे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वैश्विक शक्तियां भारत की ऊर्जा नीति की दिशा तय कर रही हैं।


🔴 एयर फोर्स वन में बयान, दुनिया भर में गूंज

डोनाल्ड ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हमने पहले ही एक डील कर ली है। भारत वेनेजुएला से तेल खरीदेगा, ईरान से नहीं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस सौदे का कांसेप्ट तय हो चुका है और अगर चीन चाहे तो वह भी वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है।

Trump running India oil policy जैसे वाक्य अब सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की चर्चाओं में आम हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी होते हैं।


🔴 भारत की चुप्पी और कूटनीतिक संकेत

भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया न आने से अटकलें और तेज हो गई हैं। विदेश नीति जानकार मानते हैं कि भारत ऊर्जा सुरक्षा के मामले में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है—चाहे वह ईरान हो, रूस हो या वेनेजुएला।

Trump running India oil policy बहस के बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय ले रहा है या वैश्विक दबावों के तहत रणनीति बदल रहा है।


🔴 वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि

2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों में सेकेंडरी सेंक्शंस भी शामिल थे, जिनके तहत वे देश या कंपनियां भी अमेरिकी बाजार से बाहर हो सकती थीं, जो वेनेजुएला से तेल खरीदती थीं।

इसका सीधा असर भारत पर पड़ा। उस समय कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि भारत अपने कुल तेल आयात का करीब 6% वेनेजुएला से लेता था। प्रतिबंधों के बाद यह आयात लगभग पूरी तरह रुक गया।


🔴 OPEC और वेनेजुएला की रणनीतिक स्थिति

वेनेजुएला, पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार माना जाता है। इसके बावजूद वह वैश्विक सप्लाई का केवल लगभग 1% हिस्सा देता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बड़े उपभोक्ता देश जैसे भारत और चीन वेनेजुएला की ओर रुख करते हैं, तो यह वैश्विक तेल बाजार की दिशा बदल सकता है। Trump running India oil policy की बहस इसी भू-राजनीतिक बदलाव से जुड़ी मानी जा रही है।


🔴 2024 में दोबारा शुरू हुआ आयात, फिर बढ़ी सख्ती

2023-2024 के दौरान अमेरिका ने वेनेजुएला पर कुछ प्रतिबंध अस्थायी रूप से ढीले किए। इसके बाद भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया।

2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन मई 2025 में अमेरिका ने फिर से सख्ती बढ़ाई और 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से भारत का क्रूड आयात गिरकर सिर्फ 0.3% रह गया।


🔴 रिलायंस इंडस्ट्रीज की भूमिका और रणनीति

भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभर रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस ने अमेरिका से लाइसेंस लेकर वेनेजुएला से तेल खरीदने की कोशिशें फिर शुरू कर दी हैं।

कंपनी के प्रतिनिधि अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और ट्रेजरी डिपार्टमेंट से बातचीत कर रहे हैं, ताकि वैकल्पिक तेल सप्लाई सुरक्षित की जा सके। पश्चिमी देशों के रूस से तेल आयात कम करने के दबाव के बीच यह कदम रणनीतिक माना जा रहा है।


🔴 जामनगर रिफाइनरी और वैश्विक क्षमता

गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस का रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है, जिसकी कुल क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है।

2025 के पहले चार महीनों में वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA ने रिलायंस को चार जहाजों से तेल भेजा था, जो रोजाना करीब 63,000 बैरल के बराबर था। मार्च-अप्रैल 2025 में जब अमेरिकी लाइसेंस सस्पेंड हुए, तब मई में आखिरी जहाज भारत पहुंचा।


🔴 अमेरिका को तेल देने का ट्रम्प का दावा

डोनाल्ड ट्रम्प ने यह भी कहा कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल सौंपेगी। यह तेल बाजार भाव पर बेचा जाएगा और उससे मिलने वाली रकम पर अमेरिका का नियंत्रण रहेगा।

विश्लेषकों के अनुसार, 5 करोड़ बैरल तेल की मौजूदा कीमत लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। यह बयान भी Trump running India oil policy बहस को और व्यापक बना रहा है, क्योंकि यह दर्शाता है कि अमेरिका वेनेजुएला के ऊर्जा संसाधनों पर किस तरह रणनीतिक पकड़ बनाना चाहता है।


🔴 वैश्विक राजनीति, ऊर्जा और भारत की रणनीति

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। उसकी ऊर्जा नीति सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति से भी जुड़ी है।

Trump running India oil policy की बहस इस बात को उजागर करती है कि कैसे ऊर्जा संसाधन आज वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। अमेरिका, चीन, रूस और पश्चिमी देश सभी अपने-अपने हितों के अनुसार तेल बाजार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।


🔴 विशेषज्ञों की राय और आगे की दिशा

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में अपने तेल आयात को विविध स्रोतों से संतुलित रखने की कोशिश करेगा। वेनेजुएला, ईरान, रूस और मध्य पूर्व—सभी भारत की रणनीति का हिस्सा रह सकते हैं।

हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय दबाव इस रणनीति को जटिल बना देते हैं। Trump running India oil policy जैसे सवाल इसी जटिलता को उजागर करते हैं।


भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा, व्यापार और कूटनीति का यह नया अध्याय केवल तेल के बैरल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस वैश्विक खेल का हिस्सा है, जहां संसाधन, शक्ति और नीति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। ट्रम्प के दावों के बाद दुनिया की नजर अब भारत की अगली चाल पर टिकी है—क्या वह अपने राष्ट्रीय हितों की राह पर आगे बढ़ेगा या वैश्विक दबावों के बीच नई संतुलन रेखा खींचेगा।

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