वैश्विक

मध्य पूर्व में भूचाल: ट्रम्प की कड़ी चेतावनी, Nouri al-Maliki बने प्रधानमंत्री तो अमेरिका इराक से समर्थन खींचेगा

Trump warning Iraq Maliki की गूंज इस समय केवल बगदाद तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा रही है। बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इराक ने पूर्व प्रधानमंत्री Nouri al-Maliki को एक बार फिर देश की कमान सौंपी, तो अमेरिका इराक को दिया जाने वाला अपना समर्थन वापस ले सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इराक में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है और संसद के भीतर गठबंधन बनाने की कवायद तेज है।


🔴 ट्रुथ सोशल से आई कड़ी चेतावनी, दुनिया की नजर बगदाद पर

डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्हें खबर मिल रही है कि “महान देश इराक एक बहुत बड़ा गलत फैसला लेने जा रहा है।” उन्होंने सीधे तौर पर नूरी अल-मलिकी का नाम लेते हुए कहा कि उनके पिछले कार्यकाल में इराक गरीबी, अराजकता और अस्थिरता की गिरफ्त में चला गया था।

ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मलिकी को फिर से प्रधानमंत्री बनाया गया, तो उनकी “नीतियों और विचारधारा” के चलते अमेरिका इराक की किसी भी तरह की मदद नहीं करेगा। उनका दावा था कि अमेरिकी सहायता के बिना इराक के पास सफलता, समृद्धि और स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ने का कोई वास्तविक रास्ता नहीं बचेगा।


🔴 मलिकी की वापसी से क्यों है अमेरिका को चिंता

Trump warning Iraq Maliki का सबसे बड़ा कारण मलिकी की राजनीतिक पहचान और उनके अंतरराष्ट्रीय संबंध माने जा रहे हैं। नूरी अल-मलिकी शिया समुदाय के बड़े नेता हैं और उन्हें ईरान के सबसे करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, और ट्रम्प प्रशासन ईरान को अपनी विदेश नीति में सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखता रहा है।

अमेरिकी रणनीतिकारों को डर है कि मलिकी की वापसी से इराक में ईरान का प्रभाव और गहराता जा सकता है, जिससे न केवल इराक की आंतरिक राजनीति प्रभावित होगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की शक्ति-संतुलन पर असर पड़ेगा।


🔴 चुनाव के बाद भी अधर में सरकार, राजनीतिक खींचतान तेज

इराक में 11 नवंबर 2025 को संसदीय चुनाव हुए थे, जो 329 सदस्यीय संसद के लिए थे। यही संसद राष्ट्रपति का चुनाव करती है और बाद में प्रधानमंत्री की नियुक्ति होती है। मौजूदा प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी की गठबंधन सरकार ने सबसे ज्यादा, करीब 46 सीटें हासिल कीं, लेकिन किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के बीच लगातार बातचीत और गठबंधन की कोशिशें चल रही हैं। राष्ट्रपति चुनाव 28 या 29 जनवरी 2026 को प्रस्तावित था, लेकिन कुर्द ब्लॉकों के बीच उम्मीदवार को लेकर सहमति न बनने के कारण इसे टाल दिया गया।

इसी बीच 24 जनवरी 2026 को शिया गठबंधन ने नूरी अल-मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित कर दिया, जिससे अमेरिका की नाराजगी खुलकर सामने आ गई।


🔴 अमेरिकी विदेश मंत्री की सक्रियता, शांति की अपील

इस राजनीतिक हलचल के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से फोन पर बातचीत की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली सरकार मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति लाने की दिशा में काम करेगी।

रुबियो की इस कॉल को भी Trump warning Iraq Maliki के व्यापक कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें अमेरिका यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह इराक की राजनीतिक दिशा को लेकर गंभीर है।


🔴 मलिकी का लंबा और विवादित राजनीतिक सफर

नूरी अल-मलिकी 2006 से 2014 तक इराक के प्रधानमंत्री रहे। यह पोस्ट-सद्दाम हुसैन युग का सबसे लंबा कार्यकाल माना जाता है। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में सद्दाम हुसैन की सत्ता गिरने के बाद इराक में संप्रदायिक हिंसा और राजनीतिक अराजकता का दौर शुरू हुआ।

2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इब्राहिम अल-जाफरी के इस्तीफे के बाद मलिकी को एक समझौते के तहत प्रधानमंत्री बनाया गया। शुरुआत में उन्होंने शिया, सुन्नी और कुर्द समुदायों को शामिल करते हुए राष्ट्रीय एकता सरकार बनाई।

इसी साल उन्होंने सद्दाम हुसैन की फांसी को मंजूरी दी, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।


🔴 आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और सेना की भूमिका

2007 और 2008 के दौरान अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई और अल-कायदा इन इराक तथा शिया मिलिशिया के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए। 2008 में मलिकी ने खुद मिलिशिया के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन का नेतृत्व किया, जिसे उस समय सुरक्षा के लिहाज से सफल माना गया।

हालांकि आलोचकों का कहना है कि इन अभियानों के दौरान सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ा और कई फैसले राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए किए गए।


🔴 भ्रष्टाचार और नेपोटिज्म के आरोप

Trump warning Iraq Maliki के पीछे एक बड़ा कारण मलिकी पर लगे आरोप भी हैं। विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि उन्होंने सेना, पुलिस और न्यायपालिका में अपने वफादारों को अहम पदों पर बैठाया।

सुन्नी और कुर्द समुदायों को कथित तौर पर हाशिए पर डालने से असंतोष बढ़ा, जिसे बाद में ISIS जैसे उग्रवादी संगठनों ने भुनाया। 2014 में चुनाव जीतने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव के चलते मलिकी को इस्तीफा देना पड़ा और हैदर अल-अबादी प्रधानमंत्री बने।


🔴 अमेरिका-इराक रणनीतिक समझौता और समर्थन की अहमियत

अमेरिका इराक को सुरक्षा, आर्थिक विकास, मानवीय सहायता और राजनीतिक स्थिरता जैसे क्षेत्रों में व्यापक समर्थन देता है। 2008 में दोनों देशों के बीच अमेरिका-इराक स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए थे, जो जनवरी 2009 से लागू हुआ।

इस समझौते के तहत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, इराकी सुरक्षा बलों की ट्रेनिंग, आर्थिक निवेश, ऊर्जा सहयोग और शैक्षिक आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रम चलते हैं। ट्रम्प प्रशासन के दौरान इस सहयोग को कुछ शर्तों के साथ जारी रखा गया।

अब Trump warning Iraq Maliki ने इस पूरे ढांचे के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।


🔴 मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और वैश्विक असर

इराक की राजनीति केवल देश के भीतर की कहानी नहीं है। यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, ईरान-अमेरिका संबंध और पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ी हुई है। मलिकी की संभावित वापसी को कई विश्लेषक ईरान के प्रभाव के विस्तार के रूप में देख रहे हैं, जबकि अमेरिका इसे अपने हितों के लिए चुनौती मानता है।

यूरोप और खाड़ी देशों की भी नजर इराक की अगली सरकार पर टिकी है, क्योंकि इसका असर तेल बाजार, सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय गठबंधनों पर पड़ सकता है।


🔴 जनता के बीच उम्मीद और आशंका का माहौल

इराकी जनता के लिए यह समय उम्मीद और चिंता दोनों से भरा है। एक तरफ लोग स्थिर सरकार और आर्थिक सुधार चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें डर है कि राजनीतिक टकराव देश को फिर से अस्थिरता की ओर न धकेल दे।

Trump warning Iraq Maliki ने आम नागरिकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव उनके देश की राजनीतिक दिशा तय करेगा या इराक अपने आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के जरिए आगे बढ़ेगा।


डोनाल्ड ट्रम्प की यह चेतावनी केवल एक बयान नहीं, बल्कि इराक की आने वाली सरकार के लिए एक कूटनीतिक कसौटी है। नूरी अल-मलिकी की संभावित वापसी ने इराक को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां उसे अपने आंतरिक राजनीतिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच बेहद सावधानी से कदम रखना होगा। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि बगदाद की राजनीति क्षेत्रीय शांति की ओर बढ़ेगी या मध्य पूर्व के तनाव को और गहराएगी।

 

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: [email protected]

News-Desk has 20960 posts and counting. See all posts by News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

16 + 8 =