Varanasi दालमंडी चौड़ीकरण: शनिवार की सुबह फिर चला बुलडोज़र, 12 भवनों की सूची, 10 मिनट में घर खाली करने का आदेश
Varanasi के दालमंडी इलाके में सड़क चौड़ीकरण को लेकर शनिवार को एक बार फिर बड़ा एक्शन शुरू हुआ। क्षेत्र में सुबह से ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला तैनात किया गया और वीडीए द्वारा चिन्हित 12 भवनों में से पहले भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
दुकानदारों और मकान मालिकों को मौके पर ही सिर्फ 10 मिनट का समय दिया गया— सामान निकालें और इमारत खाली कर दें।
यह अचानक हुई कार्रवाई पूरे इलाके में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर गई। कई लोग सुबह की दिनचर्या भी पूरी नहीं कर पाए थे कि बुलडोज़र और सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने पूरे बाजार को हिला कर रख दिया।
दालमंडी चौड़ीकरण—17.4 मीटर चौड़ी होने जा रही सड़क, पूरा क्षेत्र बदलेगा
पीडब्ल्यूडी और वीडीए अधिकारियों के अनुसार दालमंडी की तंग गलियों को अब 17.4 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा। इस मेगा प्रोजेक्ट की बनावट कुछ इस प्रकार है—
10 मीटर चौड़ी सड़क (दोनों ओर 5–5 मीटर)
6.4 मीटर फुटपाथ (3.2–3.2 मीटर)
1 मीटर की केसी ड्रेन नाली (दोनों ओर आधा–आधा मीटर)
यह पूरा स्ट्रक्चर दालमंडी को भविष्य में एक व्यवस्थित, सुरक्षित और पैदल-यात्री अनुकूल कॉरिडोर में बदलने का लक्ष्य रखता है।
अधिकारियों का कहना है कि फुटपाथ के नीचे सभी जनसुविधाएँ भूमिगत की जाएंगी—
जैसे बिजली लाइनों को अंडरग्राउंड करना, पानी की सप्लाई लाइन, फाइबर नेटवर्क और ड्रेनेज सिस्टम।
लोगों की परेशानी—10 मिनट का नोटिस, बाज़ार में तनाव
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार अचानक बुलडोज़र लेकर पहुँच जाना और 10 मिनट में मकान खाली करने का आदेश देना बेहद कठोर कदम है।
कई दुकानदारों ने कहा कि—
दुकानें वर्षों पुरानी हैं
स्टॉक हटाने में घंटों लगते हैं
नोटिस तो मिला था, लेकिन समय बहुत कम दिया गया
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है—
कई दौर की वार्ता पहले हो चुकी
मुआवज़ा, वैकल्पिक व्यवस्था और सर्वे की प्रक्रिया पहले ही समझाई जा चुकी
इसलिए कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुसार की जा रही है
चौड़ीकरण के बाद दालमंडी—एक नया कारोबारी कॉरिडोर बन सकता है
दालमंडी वाराणसी का सबसे पुराना और घनी आबादी वाला व्यापारिक क्षेत्र है।
यहां की गलियों में—
दालें
मसाले
सूखे मेवे
कपड़ा
घरेलू सामान
सबका व्यापार चलता है।
चौड़ीकरण के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि—
यहां ट्रैफिक जाम कम होगा
पैदल आवाजाही आसान होगी
अग्नि सुरक्षा बेहतर होगी
दुकानें और बाजार और अधिक सुव्यवस्थित दिखेंगे
सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह मॉडल “पुराने शहर में आधुनिक सुविधाएँ” देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
दूसरी तरफ नाराज़गी—लोगों को लगता है कि पूरी तैयारी नहीं की गई
कई स्थानीय लोग मानते हैं कि—
मुआवज़े की राशि स्पष्ट नहीं
वैकल्पिक दुकानें या जगह अभी तय नहीं
ध्वस्तीकरण के तरीके में जल्दबाज़ी दिख रही है
धार्मिक और ऐतिहासिक इलाके को पूरी संवेदनशीलता के साथ संभाला जाना चाहिए
कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि समय रहते उचित संवाद होता तो स्थिति अधिक सहज हो सकती थी।

