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आरटीआई कार्यकर्ता ने लगाया गुमराह करने का आरोप

मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत में होर्डिंग्स लगाने के मामले में एक आरटीआई में लाखों का घोटाला सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता को दी गयी जानकारी में उसे गुमराह करने का प्रयास किया गया। धरातल पर मौजूद जिले में अनेक मार्ग पर लगे होर्डिंग्स दी गयी आरटीआई की जानकारी में गायब नजर आये। जब जिला पंचायत के अनुसार उसके अधीन कोई होर्डिंग्स नहीं लगा है, तो फिर 47 हजार कैसे होर्डिंग्स की मद में जमा हो गये, यह सवाल आरटीआई कार्यकर्ता के द्वारा प्रमुखता से उठाया गया है।
शहर कोतवाली क्षेत्रांतर्गत आने वाले गांव पीनना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक ने आरटीआई के तहत कार्यालय जिला पंचायत मुजफ्फरनगर से चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी जनसूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत। इस मामले में सुमित मलिक का कहना था कि उन्हें दी गयी जानकारी में गुमराह करने का प्रयास किया गया।

आरटीआई में सामने आया जिला पंचायत का होर्डिंग्स घोटाला

जिले के कई प्रमुख मार्गों पर जिला पंचायत के अंतर्गत हजारों होर्डिंग्स लगाये गये हैं। इनकी जिला पंचायत के अधिकारियोंध्कर्मचारियों के द्वारा चोरी छिपे रसीद काटी जाती है। जिला पंचायत के अधिकारी व कर्मचारी गुमराह करके लाखों के राजस्व का चूना सरकार को लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहला सवाल पूछा था कि जिला पंचायत के अंडर जिले में कितने होर्डिंग्स लगे हुए हैं।

जिस पर उन्हें जवाब दिया गया कि जिला पंचायत मुजफ्फरनगर के अधीन जिले में कोई भी होर्डिंग्स नहीं लगा है। दूसरा सवाल था कि पिछले पांच सालों में कितना राजस्व का पैसा होर्डिंग्स के द्वारा सरकार के पास जमा हुआ। जिस पर बताया गया कि पांच सालों में होर्डिंग्स मद में केवल 47000 रूपये जिला निधि में जमा हुए हैं। सुमित मलिक का कहना था कि जब जिला पंचायत के अनुसार जिले में एक भी होर्डिंग्स उसके अधीन नहीं लगा, तो फिर ये 47000 रूपये कहां से आ गये।

तीसरा सवाल यह किया गया था कि जिले के अंदर जिला पंचायत के द्वारा कितनी बार किसके नेतृत्व में फर्जी होर्डिंग्स को लेकर छापेमारी की गयी। यदि नहीं, तो क्यों नहीं। यदि की गयी, तो कितने होर्डिंग्स मालिकां के विरूद्ध कार्यवाही की गयी। इसके उत्तर में जिला पंचायत की ओर से कहा गया कि जनसूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (संशोधित 2015) के नियम चार (2) (ख) (चार) में किये गये प्राविधान के अनुसार सूचना दिया जाना संभव नहीं है।

चौथा सवाल यह किया गया था कि जनपद में होर्डिंग्स लगाने के लिए क्या शासन की गाइड लाइन है। शासन का जीओ उपलब्ध कराये। इस पर जिला पंचायत की ओर से कहा गया कि होर्डिंग्स लगाने के लिए शासन की कोई भी गाइड लाइन नहीं है।

न ही कोई इस संबंध में शासनादेश है। इस पर सुमित मलिक का कहना था कि जिला पंचायत के अधिकारी/कर्मचारी होर्डिंग्स लगाने के मामले में सरकार को प्रतिवर्ष लाखों के राजस्व का गलत तरीक से रसीद काटकर चूना लगा रहे हैं।

News-Desk

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