“प्रयागराज Mahakumbh में अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा का ऐतिहासिक संतमत महाधिवेशन: एक लाख से अधिक श्रद्धालु होंगे शामिल”
Mahakumbh/प्रयागराज, 2025: महाकुंभ का आयोजन हर साल एक अद्भुत धार्मिक और आध्यात्मिक मेला होता है। इस बार, प्रयागराज में आयोजित हो रहे 113वें महाकुंभ में अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा की ओर से एक ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। पहली बार संतमत महाधिवेशन महाकुंभ के बीच होगा, जहां एक लाख से अधिक संत्संगियों और श्रद्धालुओं के जुटान का अनुमान है। यह आयोजन 8 से 10 फरवरी तक तीन दिनों तक चलेगा और इसमें देश-विदेश से कई प्रमुख संत, आध्यात्मिक गुरु और संतमत के अनुयायी शामिल होंगे।
महासभा के महामंत्री दिव्य प्रकाश ने बुधवार को इस ऐतिहासिक आयोजन की जानकारी दी और बताया कि इस महाधिवेशन का आयोजन महर्षि मेंहीं आश्रम कुप्पाघाट में हो रहा है। दिव्य प्रकाश ने कहा कि संतमत महाधिवेशन के आयोजन का उद्देश्य सनातन धर्म के सभी मत, पंथ और संप्रदाय के बीच समन्वय स्थापित करना है, ताकि सभी धार्मिक समुदायों के बीच प्रेम और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने बताया कि इस बार का महाधिवेशन विशेष रूप से आराध्यदेव महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के उपदेशों और संतमत के ज्ञान एवं दर्शन को प्रचारित करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
इस आयोजन में अनेक प्रमुख संतों और आध्यात्मिक नेताओं का सहयोग मिल रहा है। विशेष रूप से कैलाशानंद गिरि और आशुतोषानंद गिरि महाराज का सहयोग बेहद अहम रहेगा, जिनके मार्गदर्शन में आयोजन की सफलता की आशा जताई जा रही है। इसके अलावा, महासभा की ओर से 300 से अधिक सत्संगी कारसेवक दिन-रात इस आयोजन की तैयारियों में जुटे हुए हैं, ताकि हर पहलू पर ध्यान दिया जा सके और श्रद्धालुओं को कोई कठिनाई न हो।
संतमत महाधिवेशन की विशेषताएं
इस महाधिवेशन के दौरान पंडाल का आकार 1,50,000 स्क्वायर फीट होगा, और इसमें 10,000 कुर्सियों की व्यवस्था की जा रही है। इस पंडाल को सजाने और उसकी व्यवस्था में महासभा के सदस्य पूरी निष्ठा से जुटे हुए हैं। आयोजन के दौरान देशभर से आए संत और आध्यात्मिक गुरु अपने प्रवचनों और उपदेशों से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान देंगे। इसमें गुरुसेवी भगीरथ दास महाराज, स्वामी प्रमोद बाबा, स्वामी निर्मलानंद बाबा, स्वामी सत्यप्रकाश बाबा, स्वामी विद्यानंद बाबा, स्वामी सत्यानंद बाबा जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
महासभा के कार्यकारिणी सदस्य और मंत्री मनु भास्कर ने बताया कि इस आयोजन में कई विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय वक्ता भी प्रवचन देंगे। खासकर, कश्मीर से आत्मानंद बाबा, ऋषिकेश से गंगा बाबा जैसे संत भी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते पर मार्गदर्शन करेंगे।
आयोजन स्थल पर सुविधाएं और सुरक्षा इंतजाम
सत्संगियों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आयोजन स्थल पर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जर्मन हेंगर की व्यवस्था की जा रही है, जहां श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और शौचालय की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही, लाइव टेलीकास्ट, स्क्रीन और प्रोजेक्टर की व्यवस्था भी की जाएगी ताकि कोई भी श्रद्धालु आयोजन के मुख्य कार्यक्रम से वंचित न रहे।
स्वामी रमेश बाबा, स्वामी विद्यानंद बाबा, महासभा के उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव और अन्य महासभा के पदाधिकारी इस आयोजन की तैयारियों में पूरी तरह से जुटे हुए हैं। उनका उद्देश्य है कि आयोजन में आए श्रद्धालु न केवल संतमत के दर्शन को समझ सकें, बल्कि एक नए दृष्टिकोण से जीवन जीने की दिशा प्राप्त कर सकें।
संतमत महाधिवेशन का महत्व
संतमत महाधिवेशन का आयोजन महाकुंभ के साथ विशेष रूप से संतमत के दर्शन और उपदेशों के प्रचार-प्रसार के लिए किया जाता है। महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज के उपदेशों को साझा करते हुए इस आयोजन में सनातन धर्म के अनुयायियों को एकता और भाईचारे की ओर बढ़ने का संदेश दिया जाता है। यह आयोजन भारतीय समाज में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक उन्नति के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा सकता है।
भारत के हर कोने से और विदेशों से भी लोग इस महाधिवेशन में शामिल होने के लिए प्रयागराज आ रहे हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा।
महाकुंभ और संतमत महाधिवेशन का संगम
प्रयागराज महाकुंभ एक विशेष धार्मिक आयोजन है, जो हर बार लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस बार, संतमत महाधिवेशन के आयोजन से महाकुंभ को और भी अधिक महत्व प्राप्त हो रहा है। संतमत का सिद्धांत न केवल आध्यात्मिक उन्नति को लेकर है, बल्कि यह मानवता, प्रेम और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है। इस महाधिवेशन में भाग लेने वाले लोग अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकेंगे और एकता और भाईचारे का संदेश लेकर वापस लौटेंगे।
इस प्रकार, प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित होने वाला संतमत महाधिवेशन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक कदम और बढ़ाने का कार्य करेगा।

