Jalandhar में हैकिंग का बड़ा खुलासा: ट्रैवल एजेंसी की वेबसाइट हैक कर पाकिस्तान-बांग्लादेश के लिए 10 लाख की टिकटें बुक, आतंकी एंगल की आशंका
News-Desk
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Cyber Crime Punjab, immigration fraud, JALANDHAR, Jalandhar Cyber Crime, Max World Travel Hacked, Pakistan Flight Tickets, Terror Links Suspected, Travel Agency Hack, ₹10 Lakh Ticket FraudJalandhar: पंजाब के शांत शहर जालंधर में साइबर क्राइम का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय पुलिस बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है। यहां की प्रतिष्ठित ट्रैवल और इमिग्रेशन सेवा प्रदान करने वाली मैक्स वर्ल्ड इमिग्रेशन ट्रैवल एजेंसी की वेबसाइट को अज्ञात हैकर्स ने हैक कर लिया और रातों-रात पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए करीब ₹10 लाख की हवाई टिकटें बुक कर दीं।
रातों-रात बुक हुईं टिकटें, एजेंसी मालिक को हुआ शक
एजेंसी के मालिक दीपक बट्ट ने बताया कि वे 22 मई 2025 की सुबह जैसे ही रोज़ाना की तरह ऑफिस पहुंचे और सिस्टम लॉगिन किया, तो उन्हें वेबसाइट पर संदिग्ध गतिविधियों का आभास हुआ। सिस्टम की गहराई से जांच करने पर यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि रात 9 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक वेबसाइट से हजारों की संख्या में टिकटें बुक हुई थीं।
इन टिकटों में खास बात यह थी कि ये सभी अंतरराष्ट्रीय टिकटें थीं, जिनकी मंज़िल पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका थी। यह तथ्य अपने आप में पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया।
‘मैक्स वर्ल्ड ट्रैवल बर्थ’ पोर्टल के ज़रिए की गई बुकिंग
टिकट बुकिंग के लिए ‘मैक्स वर्ल्ड ट्रैवल बर्थ’ नामक पोर्टल का इस्तेमाल किया गया था, जो कंपनी की मूल सेवाओं में शामिल है और देश-विदेश में इमिग्रेशन तथा ट्रैवल से संबंधित कार्यों के लिए जाना जाता है। इस पोर्टल का एक्सेस केवल कुछ विशिष्ट कर्मचारियों और मालिक दीपक बट्ट के पास ही था।
पुलिस की सुस्त कार्रवाई, दो महीने तक टालमटोल
दीपक बट्ट ने अपनी शिकायत 22 मई को थाना डिवीजन नंबर 6 में दर्ज करवाई थी, लेकिन पुलिस ने दो महीने तक इस मामले को नजरअंदाज किया। उन्होंने बताया कि यदि समय पर कार्रवाई होती, तो शायद टिकटों के ज़रिए जिन व्यक्तियों को विदेश भेजा जाना था, उन्हें रोका जा सकता था। लेकिन पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते अब तक कोई ठोस गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
क्या है आतंकी साज़िश का कनेक्शन?
घटना के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं, क्योंकि ये टिकटें जिन देशों के लिए बुक की गई हैं—उनमें से दो देश पाकिस्तान और बांग्लादेश आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील सूचियों में आते हैं। इस बात की आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा मामला किसी आतंकी संगठन या अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गैंग से जुड़ा हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि “फर्जी ट्रैवल बुकिंग्स का इस्तेमाल आतंकियों या अवैध प्रवासियों को भेजने के लिए किया जा सकता है।” यह तरीका पहले भी कुछ मामलों में सामने आ चुका है, जिसमें साइबर अपराध के ज़रिए अवैध रूप से यात्राएं करवाई जाती थीं।
अंदरूनी मिलीभगत की भी जांच
पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं यह साइबर हमला किसी अंदरूनी व्यक्ति की मिलीभगत से तो नहीं हुआ। चूंकि पोर्टल का पासवर्ड बेहद सीमित लोगों के पास था, ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि हैकर्स को या तो अंदर से मदद मिली, या फिर उन्होंने अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर टूल्स से सिस्टम में सेंध लगाई।
सूत्रों के अनुसार, कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है और एजेंसी का सर्वर तथा कंप्यूटर सिस्टम फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
पुलिस ने अब जाकर दर्ज किया केस, बढ़ाई जांच की रफ्तार
लगभग दो महीने बाद पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अब साइबर क्राइम विंग, इंटेलिजेंस ब्यूरो और लोकल पुलिस मिलकर इस पूरे केस की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं।
जांच अधिकारी के मुताबिक, “हमने एजेंसी के सर्वर लॉग्स को खंगालना शुरू कर दिया है। बहुत जल्द हम उन IP एड्रेस तक पहुंचेंगे जहां से यह पूरी हरकत की गई।”
साइबर सिक्योरिटी की कमजोर कड़ियां फिर सामने आईं
यह मामला एक बार फिर से भारतीय ट्रैवल एजेंसियों की साइबर सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर करता है। आज जब सारी सेवाएं डिजिटल हो चुकी हैं, तो ऐसी घटनाएं न केवल किसी एक कंपनी की सुरक्षा को चुनौती देती हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर संकेत हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अब ऐसी एजेंसियों के लिए साइबर ऑडिट अनिवार्य करना चाहिए, खासकर उन संस्थानों के लिए जो अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से जुड़े हैं।
अवैध इमिग्रेशन और टिकटिंग फ्रॉड की पुरानी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी पंजाब और हरियाणा से कई ट्रैवल एजेंसियों पर फर्जी वीज़ा, टिकट फ्रॉड और मानव तस्करी के केस दर्ज किए जा चुके हैं। जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों में इमिग्रेशन व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही धोखाधड़ी और अपराध भी उसी अनुपात में बढ़े हैं।
2023 में लुधियाना की एक ट्रैवल एजेंसी पर नेपाल और थाईलैंड के लिए फर्जी टिकट बेचने का आरोप लगा था। इन मामलों में भी आतंकी संगठनों की भूमिका पर शक जताया गया था, लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।
आगे की रणनीति: क्या होगी कार्रवाई?
अब सवाल यह है कि क्या पुलिस और जांच एजेंसियां इस बार सच में किसी नतीजे तक पहुंच पाएंगी? क्या दीपक बट्ट को न्याय मिलेगा? क्या वो सारे लोग जो इन टिकटों के ज़रिए विदेश भेजे गए, उन्हें ट्रैक किया जा सकेगा?
यह मामला एक टेस्ट केस बन चुका है, जो आने वाले समय में पूरे साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा और दशा तय कर सकता है।

