पश्चिमी यूपी में 50 साल पुरानी लड़ाई फिर तेज: Muzaffarnagar के अधिवक्ताओं ने सांसद Chandan Chauhan को सौंपा ज्ञापन, हाईकोर्ट बेंच स्थापना की मांग उबाल पर
News-Desk
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demand for High Court bench, District Bar Association Muzaffarnagar, High Court Bench agitation, High Court Bench Western UP, lawyers protest western Uttar Pradesh, MP Chandan Chauhan memorandum, Muzaffarnagar advocates protest, Western UP justice movementMuzaffarnagar में बुधवार का दिन न्यायिक इतिहास के एक और महत्वपूर्ण अध्याय का साक्षी बना। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन के सैकड़ों अधिवक्ता कचहरी परिसर में एकजुट हुए और पिछले 50 वर्षों से लंबित पड़ी मांग—पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना—को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया।
अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर स्थित बाबू श्याम सिंह द्वार पर स्थानीय सांसद Chandan Chauhan को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि अब न्यायिक ढांचे में सुधार की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।
रैली जैसी भीड़ और मजबूत आवाज ने जाहिर कर दिया कि High Court Bench Western UP अब सिर्फ मांग नहीं, बल्कि जनभावना बन चुकी है।
डिस्ट्रिक्ट बार अध्यक्ष ठा. कंवरपाल सिंह का बयान—“50 साल से लड़ रहे हैं, अब न्याय चाहिए”
प्रदर्शन के दौरान ठा. कंवरपाल सिंह, अध्यक्ष, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने कहा—
“पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता पिछले 50 वर्षों से हाईकोर्ट बेंच के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हाईकोर्ट न होने से वादकारियों और अधिवक्ताओं दोनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। हमें सस्ता, त्वरित और सुलभ न्याय चाहिए, जो केवल बेंच की स्थापना से संभव है।”
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद और लखनऊ तक की लंबी यात्रा ने हमेशा से न्याय प्रक्रिया को धीमा किया है, और आम जनता को न्याय के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता है।
महासचिव चंद्रवीर निर्वाल का ऐतिहासिक संघर्ष का जिक्र—“22 जिलों के लिए न्याय की लड़ाई”
चंद्रवीर निर्वाल, महासचिव, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने कहा कि—
हाईकोर्ट बेंच स्थापना केन्द्रीय संघर्ष समिति (पश्चिमी उ.प्र.) पिछले कई दशकों से इस मांग का नेतृत्व कर रही है। यह संघर्ष केवल मुज़फ्फरनगर ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और उनकी तहसीलों की जनता की आवाज़ है।
उन्होंने कहा कि पिछले दशकों में अधिवक्ताओं ने—
जेल भरो आंदोलन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश बंद के आह्वान
पैदल मार्च
मुख्य चौराहों पर जनसभाएं
कैंडल मार्च
राजनेताओं का घेराव
जैसे कई उग्र और लोकतांत्रिक आंदोलनों के माध्यम से अपनी मांग को जीवित और प्रबल रखा है।
चंद्रवीर निर्वाल ने सांसद से स्पष्ट अनुरोध किया कि—
“कृपया आगामी शीतकालीन संसद सत्र में हाथों में पट्टी, स्लोगन और प्रश्नों के माध्यम से इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएं, ताकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी उसका अधिकार—High Court Bench Western UP—मिल सके।”
पूर्व आंदोलन और जनता का समर्थन—सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों की भी सक्रियता
निर्वाल ने यह भी बताया कि यह संघर्ष केवल अधिवक्ताओं का आंदोलन नहीं है।
इसमें—
राजनीतिक
गैर-राजनीतिक
व्यापारिक
सामाजिक संगठन
आम नागरिक
भी लगातार जुड़ते आए हैं।
उन्होंने कहा कि हर मंच पर, विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को उठाया है और बार एसोसिएशन उन सभी का आभार व्यक्त करता है।
सांसद चंदन चौहान का आश्वासन—“इस बार पूरी ताकत से मांग उठेगी”
ज्ञापन स्वीकार करते हुए माननीय सांसद चंदन चौहान ने अधिवक्ताओं को आश्वस्त किया कि—
“शीतकालीन संसद सत्र में मैं खुद इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाऊंगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पांच मंडलों के सभी 22 जिलों के सांसदों से वार्ता कर एक संयुक्त आवाज़ तैयार की जाएगी।”
उन्होंने भावुकता से कहा कि—
“मेरे पिता, स्व. संजय चौहान जी ने भी संसद में यह मांग उठाई थी। मैं उसी परंपरा को और अधिक ताकत के साथ आगे बढ़ाऊंगा।”
उनकी इस घोषणा ने अधिवक्ताओं में नई उम्मीद और जोश भर दिया।
अधिवक्ताओं की विशाल मौजूदगी—पूरे परिसर में प्रशासन भी सतर्क
ज्ञापन सौंपने के दौरान उपस्थित रहे प्रमुख अधिवक्ताओं में शामिल थे—
पूर्व अध्यक्ष अनिल जिंदल
पूर्व महासचिव जितेंद्र कुमार
सिविल बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुनील कुमार मित्तल
महासचिव राज सिंह रावत
वरिष्ठ अधिवक्ता नेत्रपाल सिंह
चंद्रमणि शर्मा
प्रदीप मलिक
प्रवीण गुड्डू
नगेंद्र
वीरेंद्र कुमार बालियान
राकेश मौर्य
मोहतसिब सन्नी
अमित कुमार
ताहिर राव
राशिद चौधरी
गौरव चौधरी
आदर्श सिंह
शिवम बालियान
नाहिदा परवीन
कमरूना गौर
सैकड़ों अधिवक्ता कचहरी परिसर में मौजूद रहे और लगातार “हाईकोर्ट बेंच बनाओ”, “न्याय क्षेत्रीय होना चाहिए” जैसे नारे लगाते रहे।
जनता की उम्मीद—“अब या कभी नहीं” वाली स्थिति
निर्णायक समय की ओर इशारा करते हुए कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि—
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना केवल न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और जनता के सम्मान का विषय है।
अब जनता यह उम्मीद कर रही है कि इस बार संसद में यह मांग गंभीरता से उठेगी और इसका ठोस परिणाम सामने आएगा।

