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उत्तर प्रदेश

Smart Meter पर ग्रामीणों का ‘करंट’ विरोध: डीवीवीएनएल की योजना पर उठे सवाल, गांव-गांव लौटाई गई टीमें

दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना अब smart meter problem के रूप में सामने आने लगी है। देहात के कई गांवों में बिजली विभाग की टीमें जैसे ही स्मार्ट मीटर लगाने पहुंचीं, ग्रामीणों ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए उन्हें वापस लौटा दिया। गांवों में यह संदेश साफ सुनाई देने लगा है कि जब पुराने मीटर पूरी तरह ठीक हैं, तो उन्हें हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगाने की क्या आवश्यकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर को लेकर न तो पूरी जानकारी दी गई है और न ही यह भरोसा दिलाया गया है कि इससे बिजली बिल कम होगा। उल्टा लोगों में डर है कि नए मीटर लगते ही बिल कई गुना बढ़ जाएंगे, जिससे पहले से महंगाई की मार झेल रहे ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।


खेरागढ़ के बीरई गांव में भड़का विरोध, काम रुकवाया गया

बृहस्पतिवार को खेरागढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत बीरई में जब डीवीवीएनएल की टीम स्मार्ट मीटर लगाने पहुंची, तो शुरुआत में कुछ घरों में मीटर लगाए गए। लेकिन जल्द ही गांव के लोग एकजुट हो गए और smart meter problem को लेकर विरोध तेज कर दिया। ग्रामीणों ने मौके पर ही काम रुकवा दिया और टीम को आगे मीटर लगाने से रोक दिया।

ग्रामीण चंद्रभान सिंह, गौरव शर्मा, चंद्रप्रकाश धाकरे, रोहित परिहार और राजू शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के मन में भारी असमंजस है। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि नया मीटर लगने के बाद बिल कैसे बनेगा, रीडिंग कैसे होगी और अगर बिल गलत आया तो समाधान कैसे मिलेगा।


ग्रामीणों का डर: स्मार्ट मीटर से बढ़ेंगे बिजली बिल

ग्रामीणों के अनुसार सबसे बड़ी smart meter problem यह है कि दूसरे जिलों और शहरी क्षेत्रों से लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं, जहां स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए। गांव के लोगों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और खेती-बाड़ी पर निर्भर परिवार पहले ही महंगे डीजल, खाद और बीज से परेशान हैं। ऐसे में अगर बिजली बिल बढ़ा तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि स्मार्ट मीटर वास्तव में फायदेमंद हैं, तो पहले उनके लाभों की खुली जानकारी क्यों नहीं दी गई। गांव में कोई शिविर या बैठक नहीं हुई, न ही कोई लिखित आश्वासन दिया गया।


“सरकारी धन की बर्बादी” बता रहे ग्रामीण

ग्रामीणों ने स्मार्ट मीटर योजना को सरकारी धन की बर्बादी तक करार दिया। उनका कहना है कि गांवों में आज भी कई मीटर खराब पड़े हैं, कहीं मीटर जले हुए हैं, तो कहीं सालों से बंद हैं। सरकार को पहले ऐसे मीटर बदलने चाहिए।

ग्रामीणों का तर्क है कि जो मीटर सही तरीके से चल रहे हैं, उन्हें हटाकर नए मीटर लगाना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। इससे न तो बिजली आपूर्ति सुधरेगी और न ही उपभोक्ताओं को कोई सीधा लाभ मिलेगा। बल्कि इससे smart meter problem और बढ़ेगी।


खुली बैठक की मांग, पारदर्शिता पर सवाल

ग्रामीणों ने डीवीवीएनएल से मांग की है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले गांव-गांव खुली बैठक आयोजित की जाए। इन बैठकों में यह स्पष्ट किया जाए कि—

  • स्मार्ट मीटर कैसे काम करता है

  • बिजली बिल की गणना किस आधार पर होगी

  • ज्यादा बिल आने पर शिकायत कहां और कैसे दर्ज होगी

  • शिकायत का समाधान कितने समय में होगा

  • मीटर खराब होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, तब तक smart meter problem का विरोध जारी रहेगा।


डीवीवीएनएल का पक्ष: पारदर्शिता लाने की कोशिश

डीवीवीएनएल के मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी ने स्मार्ट मीटर को लेकर उठ रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये मीटर केंद्र सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत लगाए जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

उन्होंने बताया कि अभी स्मार्ट मीटर सीमित संख्या में उपभोक्ताओं के यहां लगाए जा रहे हैं ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके। विभाग का दावा है कि स्मार्ट मीटर से रीडिंग में गड़बड़ी खत्म होगी और उपभोक्ता को वास्तविक खपत के अनुसार ही बिल मिलेगा।


शिकायत निवारण का दावा, लेकिन भरोसा कम

डीवीवीएनएल का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता को smart meter problem आती है, तो वह नजदीकी उपखंड कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है और उसका तुरंत समाधान किया जाएगा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो पाता, ऐसे में स्मार्ट मीटर के बाद भरोसा कैसे किया जाए।

ग्रामीणों को डर है कि तकनीकी जटिलताओं के कारण वे विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होंगे।


ग्रामीण बनाम स्मार्ट मीटर: टकराव बढ़ने के संकेत

जिस तरह से गांव-गांव स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध सामने आ रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में smart meter problem और गहराती जा सकती है। यदि विभाग ने समय रहते संवाद और जागरूकता नहीं बढ़ाई, तो यह विरोध बड़े आंदोलन का रूप भी ले सकता है।

ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना भरोसा और स्पष्ट जानकारी के कोई भी नई व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को लेकर उठ रहा विरोध केवल तकनीक का विरोध नहीं, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता की मांग है। डीवीवीएनएल और प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि वे स्मार्ट मीटर के लाभों को कागजों से निकालकर जमीन पर साबित करें, ताकि smart meter problem गांवों में अविश्वास का कारण न बने और बिजली व्यवस्था वास्तव में जनहितकारी साबित हो सके।

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