Ballia Police Misconduct Case: शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप, अब विवेचना के नाम पर अकेले बुलाने का दावा—पीड़िता ने DIG से लगाई न्याय की गुहार


Ballia Police Misconduct Case: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सामने आए एक संवेदनशील प्रकरण ने पुलिस कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उभांव थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने वन विभाग के एक दरोगा और विवेचना कर रहे पुलिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से न्याय की मांग की है। पीड़िता का कहना है कि पहले उसे विवाह का भरोसा देकर संबंध बनाए गए और बाद में जांच के दौरान भी अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।
महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह मामला प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और उसने आजमगढ़ स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचकर विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की है।
पति से अलग रहने के दौरान हुई मुलाकात, यहीं से शुरू हुआ विवाद
पीड़ित महिला के अनुसार वह पहले से विवाहित थी, लेकिन पारिवारिक विवाद के कारण अपने पति से अलग रह रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात वन विभाग के दरोगा अग्रसेन कुमार जायसवाल से हुई। महिला का आरोप है कि परिचय धीरे-धीरे नजदीकी संबंधों में बदल गया और विवाह का आश्वासन दिया गया।
उसका कहना है कि लगभग आठ महीने तक दोनों संपर्क में रहे और इस दौरान कई बार संबंध बनाए गए। बाद में जब विवाह की बात दोबारा उठाई गई तो आरोपी ने इससे इंकार कर दिया।
शादी से इनकार के बाद सामने आया पहले से विवाह का तथ्य
महिला का आरोप है कि विवाह की बात से पीछे हटने के बाद उसे जानकारी मिली कि संबंधित अधिकारी पहले से विवाहित हैं। इसके बाद उसने मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों से की।
पीड़िता का कहना है कि उसने न्याय की उम्मीद में अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद वरिष्ठ स्तर पर संज्ञान लिया गया और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी।
DIG के आदेश पर हुई कार्रवाई, फिर दोबारा उठे नए आरोप
महिला के अनुसार उसकी शिकायत पर आजमगढ़ के डीआईजी के निर्देश पर संबंधित वन दरोगा को गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई।
इसी जांच प्रक्रिया को लेकर अब पीड़िता ने नए आरोप लगाए हैं कि विवेचना के दौरान उसे बार-बार अकेले मिलने के लिए बुलाया जा रहा था।
विवेचना अधिकारी पर भी लगाए गंभीर आरोप
पीड़िता का कहना है कि मामले की जांच कर रहे क्राइम इंस्पेक्टर नरेश मलिक द्वारा उसे फोन कर अलग से मिलने के लिए कहा गया। उसका आरोप है कि चार्जशीट से जुड़े मुद्दों का हवाला देकर उस पर दबाव बनाया गया।
महिला ने यह भी दावा किया कि उसने संबंधित बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड उपलब्ध कराया है, जिसे उसने मीडिया और अधिकारियों को सौंपा है।
थाने में देर रात तक बैठाने का भी लगाया आरोप
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान उसे कई बार थाने बुलाकर देर रात तक बैठाए रखा गया। उसने इसे मानसिक दबाव की स्थिति बताया और कहा कि इस प्रकार की प्रक्रिया से उसे असहजता हुई।
उसका कहना है कि वह केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहती है।
DIG से दोबारा मिलकर कार्रवाई की मांग
घटनाक्रम के बाद पीड़िता एक बार फिर आजमगढ़ पहुंची और डीआईजी से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उसने दोनों अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।
महिला का कहना है कि वह इस मामले को अंत तक आगे बढ़ाएगी और न्याय मिलने तक प्रयास जारी रखेगी।
प्रकरण ने उठाए जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवेदनशील मामलों के संचालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी और संवेदनशील जांच प्रक्रिया पीड़ित पक्ष के विश्वास को बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक होती है।

