‘मेरा बेटा दो घंटे तड़पता रहा…’ Agra जिपलाइन हादसे के बाद फूट-फूटकर रोए माता-पिता, दोषियों की गिरफ्तारी और 50 लाख मुआवजे की मांग











Agra Zipline Accident मामले में 16 वर्षीय कुनाल की दर्दनाक मौत के बाद परिवार का आक्रोश और पीड़ा अब खुलकर सामने आने लगी है। हादसे के कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई न होने से आहत माता-पिता शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी व्यथा सुनाई। अपने इकलौते बेटे को खोने का दर्द बयान करते हुए दोनों भावुक हो गए और इंसाफ की मांग करते हुए फूट-फूटकर रो पड़े।
परिवार का कहना है कि हादसे के बाद जिस तरह की लापरवाही सामने आई, उसने उनके बेटे की जिंदगी छीन ली। उनका आरोप है कि यदि समय पर मदद और चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो शायद आज उनका बेटा उनके साथ होता।
जिपलाइन से गिरने के बाद हुई थी छात्र की मौत
यह दर्दनाक हादसा 24 मई को आगरा के ताजनगरी फेज-2 स्थित जोनल पार्क में हुआ था। जानकारी के अनुसार फिरोजाबाद के चूड़ी कारोबारी पंकज अग्रवाल का 16 वर्षीय बेटा कुनाल एडवेंचर गतिविधि के तहत जिपलाइन का आनंद ले रहा था।
परिवार का आरोप है कि जिपलाइन के दौरान उसे सुरक्षा के लिए लगाया गया हुक अचानक टूट गया, जिसके कारण वह ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा। गंभीर रूप से घायल कुनाल को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
हादसे के बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था और एडवेंचर गतिविधियों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
‘दो घंटे तक तड़पता रहा मेरा बेटा’, मां ने लगाए गंभीर आरोप
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची कुनाल की मां रिंकी अग्रवाल ने भावुक होते हुए कहा कि उनका बेटा हादसे के बाद लंबे समय तक दर्द से तड़पता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद किसी जिम्मेदार व्यक्ति ने समय रहते मदद नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्क में न तो पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था मौजूद थी और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध थी। उनका कहना था कि जब हादसा हुआ तो परिवार को खुद ही व्यवस्था करनी पड़ी और घायल बेटे को ऑटो के माध्यम से अस्पताल ले जाया गया।
मां ने कहा कि यदि मौके पर प्राथमिक उपचार और तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध होती तो शायद परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
पिता ने उठाए जांच प्रक्रिया पर सवाल
कुनाल के पिता पंकज अग्रवाल ने भी प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि हादसे के कई दिन बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी या कंपनी प्रतिनिधि ने परिवार से संपर्क कर संवेदना व्यक्त करने या जवाब देने की कोशिश नहीं की।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रारंभिक शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल नहीं किया गया। परिवार चाहता है कि जांच व्यापक स्तर पर हो और हर उस व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाए जो इस पूरी व्यवस्था से जुड़ा हुआ था।
उनका कहना है कि यह केवल उनके बेटे का मामला नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
अग्रवाल महासभा भी उतरी परिवार के समर्थन में
मामले की गंभीरता को देखते हुए अखिल भारतीय अग्रवाल महासभा के पदाधिकारी भी परिवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। संगठन ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों में लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए।
संगठन ने पीड़ित परिवार को उचित न्याय दिलाने की मांग करते हुए आर्थिक सहायता और मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं होतीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती हैं।
50 लाख रुपये मुआवजे की मांग
परिवार और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के सामने आर्थिक सहायता की मांग भी रखी। उनका कहना है कि हादसे में एक परिवार ने अपना युवा बेटा खो दिया है और इस नुकसान की भरपाई संभव नहीं है, लेकिन जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेह बनाना आवश्यक है।
मुआवजे की मांग को लेकर भी चर्चा हुई और प्रशासन से आग्रह किया गया कि पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।
एडवेंचर पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर एडवेंचर पार्कों और मनोरंजन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिपलाइन, बंजी जंपिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों में सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच अत्यंत आवश्यक होती है।
सुरक्षा बेल्ट, हुक, रस्सियां और अन्य उपकरणों की गुणवत्ता में जरा सी कमी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके अलावा हर एडवेंचर स्थल पर प्रशिक्षित स्टाफ, प्राथमिक उपचार केंद्र और एंबुलेंस जैसी सुविधाओं का होना भी जरूरी माना जाता है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद राज्यभर में ऐसे पार्कों का सुरक्षा ऑडिट किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा
मामले को लेकर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाई जाएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों और तकनीकी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिवार को अब सिर्फ इंसाफ का इंतजार
कुनाल की मौत ने न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक ऐसे परिवार के लिए जिसने अपने जवान बेटे को खो दिया, हर दिन एक नई पीड़ा लेकर आ रहा है।
परिजन अब केवल एक ही मांग कर रहे हैं—घटना की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों की पहचान हो और ऐसी लापरवाही दोबारा किसी अन्य बच्चे की जान न ले सके।









