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Muzaffarnagar शुकतीर्थ के गंगा घाट पर योग का महाकुंभ: कमिश्नर से लेकर संत-महात्माओं तक हजारों लोगों ने किया योग, प्रधानमंत्री मोदी का लाइव संदेश बना आकर्षण

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस शुकतीर्थ के अवसर पर पौराणिक तीर्थ नगरी शुकतीर्थ का गंगा तट रविवार सुबह एक अनूठे और प्रेरणादायक दृश्य का साक्षी बना। मां गंगा की अविरल धारा के किनारे आयोजित भव्य योग कार्यक्रम में Muzaffarnagar प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, साधु-संतों, समाजसेवियों, ब्रह्मकुमारीज कार्यकर्ताओं, कर्मचारियों, छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। योग, स्वास्थ्य और भारतीय संस्कृति के इस विशेष आयोजन ने न केवल लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया बल्कि योग की वैश्विक स्वीकार्यता और महत्व को भी रेखांकित किया।

आयुष विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला गंगा समिति मुजफ्फरनगर ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। सुबह की ताजी हवा, गंगा तट का आध्यात्मिक वातावरण और सामूहिक योगाभ्यास ने पूरे कार्यक्रम को विशेष बना दिया। प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान प्रक्रियाओं का अभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया।


दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, गंगा तट पर दिखी उत्साह की अनूठी तस्वीर

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से योग सत्र में हिस्सा लिया। गंगा घाट पर सुबह-सुबह सैकड़ों लोगों का एक साथ योगाभ्यास करना स्वयं में एक प्रेरणादायक दृश्य था।

कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण दिखाई दिया। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया और बताया कि नियमित योग से शरीर और मन दोनों को संतुलित रखा जा सकता है। आयोजन के दौरान नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा प्रतिदिन योग करने की शपथ भी दिलाई गई।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव संबोधन बना कार्यक्रम का विशेष आकर्षण

योग कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोलकाता से प्रसारित लाइव संबोधन भी बड़ी स्क्रीन के माध्यम से देखा और सुना गया। उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री के संदेश को ध्यानपूर्वक सुना और योग को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री द्वारा योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर वर्ष के 365 दिनों तक अपनाने की बात को कार्यक्रम में विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है, जो मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार बोले— योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी

कार्यक्रम में मौजूद मंडलायुक्त सहारनपुर डॉ. रूपेश कुमार ने कहा कि यह आयोजन अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं और अनेक बीमारियों से बचाव कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव, चिंता और शारीरिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आया है। यदि लोग नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से बचा जा सकता है।

डॉ. रूपेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा योग को जन-जन तक पहुंचाने का जो अभियान शुरू किया गया है, उसका सकारात्मक प्रभाव देश और दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।


जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने बताया अविस्मरणीय अनुभव

जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने कहा कि गंगा घाट पर आयोजित यह कार्यक्रम सभी प्रतिभागियों के लिए एक सुखद और अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि एक ओर मां गंगा की पवित्र धारा और दूसरी ओर योगाभ्यास का वातावरण लोगों को आध्यात्मिक एवं मानसिक शांति प्रदान कर रहा था।

उन्होंने कहा कि शुकतीर्थ धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे पवित्र स्थल पर योग कार्यक्रम आयोजित होना इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी शुकतीर्थ में नियमित योग कार्यक्रम आयोजित करने के प्रयास जारी रहेंगे।

डॉ. निर्वाल ने कहा कि भारत की प्राचीन योग परंपरा आज पूरे विश्व में सम्मान प्राप्त कर रही है और यह प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है।


कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत कराया गया सामूहिक अभ्यास

योगाचार्य अंकित कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत विभिन्न योग क्रियाओं और आसनों का अभ्यास कराया गया। ओमकार के उच्चारण के साथ योग सत्र प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

उन्होंने कहा कि नियमित योग करने से शरीर की कार्यप्रणाली बेहतर होती है, मानसिक तनाव कम होता है तथा शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। योग न केवल बीमारियों से बचाने में सहायक है बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और कार्यक्षमता को भी बढ़ाता है।

योगाचार्य ने बताया कि योग के माध्यम से श्वसन प्रणाली, पाचन तंत्र, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाया जा सकता है। आधुनिक जीवनशैली में योग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।


तनाव मुक्त जीवन और हार्मोनल संतुलन के लिए योग है प्रभावी उपाय

कार्यक्रम में प्रशिक्षक पुष्पा चौधरी ने कहा कि योग केवल शारीरिक फिटनेस का माध्यम नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से तनाव और चिंता में कमी आती है तथा शरीर में हार्मोनल संतुलन बना रहता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग से लेकर बुजुर्गों तक अनेक लोग तनाव और अनियमित जीवनशैली से प्रभावित हैं। ऐसे में योग एक सरल, सुलभ और प्रभावी उपाय है जो व्यक्ति को स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर ले जाता है।

पुष्पा चौधरी ने कहा कि 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में दैनिक जीवन में उपयोगी कई योगासन और प्राणायाम सिखाए गए, जिन्हें हर व्यक्ति आसानी से अपना सकता है।


प्रशासन, आयुष विभाग और सामाजिक संगठनों की रही सक्रिय भागीदारी

इस विशाल आयोजन में प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी कमल किशोर कंडारकर, उप जिलाधिकारी रश्मि लंबा, तहसीलदार श्रद्धा गुप्ता, बीडीओ विशाखा, ब्लॉक प्रमुख अनिल राठी, डीएफओ अभिनव राज, बीके प्रवेश दीदी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

योग प्रशिक्षक रोहित शर्मा, अंकित गौतम, पुष्पा चौधरी और अनिल कुमार ने योग सत्रों का संचालन किया। वहीं आयुष विभाग की ओर से डॉ. निधि सैनी, डॉ. दीपिका मलिक, डॉ. प्रतीक्षा, डॉ. अनुज कुमार निर्वाल, डॉ. अभिका और अन्य अधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अतिरिक्त प्रदीप निर्वाल, अजय कृष्ण शास्त्री, डॉ. संजू शर्मा, योगेश गुर्जर, इरम अली जैदी, मनोहरलाल शर्मा, विनोद शर्मा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक भव्य बना दिया।


भारत की योग विरासत का वैश्विक विस्तार, दुनिया के लिए बना प्रेरणा स्रोत

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने आज विश्वभर में अपनी पहचान बनाई है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा योग दिवस को वैश्विक मान्यता दिए जाने के बाद करोड़ों लोग इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव और स्वास्थ्य चुनौतियों के दौर में योग मानव समाज के लिए एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। यही कारण है कि आज दुनिया के अनेक देशों में योग केंद्र, प्रशिक्षण शिविर और स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।


शुकतीर्थ के पावन गंगा घाट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का यह भव्य आयोजन स्वास्थ्य, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में याद किया जाएगा। प्रशासन, आयुष विभाग, जनप्रतिनिधियों, संत-महात्माओं और नागरिकों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि योग केवल एक दिवस का आयोजन नहीं बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की निरंतर यात्रा है। गंगा तट पर गूंजते ओमकार, सामूहिक योगाभ्यास और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का यह संदेश आने वाले समय में समाज को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करेगा।

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