Muzaffarnagar: चरथावल के निर्धना गांव में तालाब में डूबने से 17 वर्षीय किशोर की मौत, 18 घंटे बाद मिला शव; ग्रामीणों ने तालाब खुदाई पर उठाए गंभीर सवाल
News-Desk
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उत्तर प्रदेश समाचार, किशोर की मौत, ग्रामीणों का विरोध, चरथावल, जांच की मांग, तालाब खुदाई, तालाब में डूबने से मौत, तालाब हादसा, निर्धना गांव, मुजफ्फरनगरMuzaffarnagar चरथावल क्षेत्र के निर्धना गांव के 17 वर्षीय अज़नान की तालाब में नहाने के दौरान डूबने से मौत हो गई। स्थानीय लोगों और प्रशासन की ओर से लंबे समय तक चले खोज अभियान के बाद लगभग 18 घंटे की मशक्कत के उपरांत किशोर का शव तालाब से बाहर निकाला जा सका।
इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि अज़नान सात बहनों का इकलौता भाई था। उसकी असमय मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में मातम का माहौल बना हुआ है।
नहाते समय हुआ हादसा, घंटों चला तलाश अभियान
जानकारी के अनुसार अज़नान गांव के तालाब में नहाने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
काफी देर तक स्थानीय स्तर पर खोजबीन की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में संबंधित टीमों की मदद से तलाश अभियान चलाया गया। लगभग 18 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तालाब से उसका शव बरामद किया गया।
घटना के बाद गांव में शोक और मायूसी का माहौल है। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
सात बहनों का इकलौता भाई था अज़नान
ग्रामीणों के अनुसार अज़नान अपने परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी सात बहनें हैं। परिवार को उससे कई उम्मीदें थीं, लेकिन इस दुखद हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
गांव के लोगों ने बताया कि अज़नान मिलनसार और व्यवहार कुशल स्वभाव का था। उसकी असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
तालाब की खुदाई को लेकर ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने तालाब की खुदाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग छह महीने पहले गांव के दो तालाबों की खुदाई कराई गई थी। उनका दावा है कि खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप न होकर लगभग 25 फीट तक कर दी गई, जिससे तालाब सामान्य से अधिक गहरा हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब की गहराई नियमानुसार रखी जाती, तो इस तरह के हादसे की आशंका कम हो सकती थी।
मिट्टी बिक्री को लेकर भी लगाए आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तालाब की खुदाई से निकली मिट्टी को आसपास विकसित हो रही प्लॉटिंग के भराव के लिए बेचा गया।
उनका कहना है कि यह कार्य लगभग एक महीने तक चलता रहा और बड़ी मात्रा में मिट्टी का व्यावसायिक उपयोग किया गया। ग्रामीणों ने इस संबंध में कई लाख रुपये मूल्य की मिट्टी बेचे जाने का भी आरोप लगाया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर भी जताई नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब के चारों ओर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
उनके अनुसार—
- गहरे हिस्सों के बारे में चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए।
- सुरक्षा बैरिकेडिंग या चारदीवारी नहीं बनाई गई।
- गहराई को लेकर कोई संकेतक मौजूद नहीं थे।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो इस तरह की दुर्घटना को रोका जा सकता था।
निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि—
- तालाब की खुदाई की प्रक्रिया की जांच कराई जाए।
- निर्माण एवं खुदाई से जुड़े अभिलेखों की समीक्षा की जाए।
- यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सार्वजनिक जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जानी चाहिए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। अभी तक संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यदि प्रशासन जांच कराता है, तो उसी के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि तालाब की खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप हुई थी या नहीं तथा किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की स्थिति रही या नहीं।

