Thailand में भारतीय पर्यटकों के अपहरण का सनसनीखेज मामला: 3 युवकों को बंधक बनाकर ₹1.20 करोड़ की फिरौती मांगी, 5 भारतीय गिरफ्तार; पाकिस्तानी मास्टरमाइंड की तलाश
Thailand के पर्यटन शहर पटाया में तीन भारतीय युवकों का कथित तौर पर अपहरण कर उनके परिवारों से ₹1.20 करोड़ की फिरौती मांगने का मामला सामने आया है। इस मामले में थाई पुलिस ने पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर दावा किया है कि पूरी साजिश एक दुबई में मौजूद पाकिस्तानी नागरिक के निर्देश पर रची गई थी। पुलिस ने इस दावे की भी जांच शुरू कर दी है।
थाई पुलिस ने तीनों भारतीय युवकों को सुरक्षित मुक्त करा लिया है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस कथित मुख्य साजिशकर्ता समेत अन्य संभावित संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।
सस्ते टूर पैकेज का लालच देकर पटाया बुलाया गया
जांच के अनुसार पीड़ितों की पहचान मोहित (23), आशीष (24) और हिमांशु (20) के रूप में हुई है।
बताया गया कि तीनों युवकों को कथित तौर पर बेहद कम कीमत वाले सात दिन के टूर पैकेज का प्रस्ताव दिया गया था। इसी लालच में वे थाईलैंड के लोकप्रिय पर्यटन स्थल पटाया पहुंचे।
पुलिस के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद उन्हें एक मकान में ले जाकर कथित रूप से बंधक बना लिया गया।
परिजनों से मांगे गए ₹40-40 लाख, कुल ₹1.20 करोड़ की फिरौती
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों ने तीनों पीड़ितों के परिवारों से प्रत्येक के बदले ₹40 लाख की मांग की। इस तरह कुल ₹1.20 करोड़ की फिरौती मांगी गई।
परिजनों पर दबाव बनाने के लिए कथित तौर पर पीड़ितों के वीडियो और तस्वीरें भेजी गईं, ताकि उन्हें जल्द से जल्द रकम देने के लिए मजबूर किया जा सके।
थाई पुलिस ने पांच भारतीय नागरिकों को किया गिरफ्तार
मामले में गिरफ्तार किए गए भारतीय नागरिकों की पहचान—
- अवतार सिंह (38)
- जगजीत सिंह (38)
- रंभालक कुमार (24)
- सुखबीर सिंह (37)
- कुलरा सिंह (27)
के रूप में बताई गई है।
थाई पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
जांच में सामने आया दुबई कनेक्शन
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे पिछले लगभग एक महीने से एक चैट एप्लिकेशन के माध्यम से दुबई में मौजूद एक पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थे।
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों का दावा है कि उसी व्यक्ति ने कथित तौर पर पूरी योजना तैयार की और उन्हें भारतीय पर्यटकों को निशाना बनाने के निर्देश दिए।
पुलिस फिलहाल इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन कर रही है। आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
क्रिप्टोकरेंसी में फिरौती लेने की कथित योजना
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि फिरौती की रकम कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्राप्त करने की योजना बनाई गई थी।
पुलिस के अनुसार आरोपियों को इस काम के बदले—
- नकद धनराशि,
- कीमती सामान,
- तथा थाईलैंड से बाहर जाने के लिए हवाई टिकट
देने का कथित वादा किया गया था।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल लेनदेन और संभावित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं।
पीड़ितों ने सुनाई कैद और प्रताड़ना की आपबीती
रेस्क्यू किए गए तीनों युवकों ने पुलिस को बताया कि उन्हें कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया।
उनके अनुसार—
- हाथ-पैर रस्सी या केबल से बांध दिए गए,
- उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया गया,
- कथित तौर पर मारपीट की गई,
- तथा परिवारों पर दबाव बनाने के लिए वीडियो रिकॉर्ड किए गए।
इन दावों की पुष्टि के लिए पुलिस चिकित्सीय जांच सहित अन्य साक्ष्यों का भी परीक्षण कर रही है।
खून जैसा दिखाने के लिए लाल स्प्रे पेंट का इस्तेमाल
पुलिस जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ितों के शरीर पर लाल स्प्रे पेंट लगाया, ताकि वीडियो कॉल के दौरान ऐसा प्रतीत हो कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उनके शरीर से खून बह रहा है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि इसका उद्देश्य परिवारों में भय पैदा कर फिरौती की रकम जल्द दिलवाना था।
भारतीय दूतावास के अलर्ट के बाद शुरू हुई कार्रवाई
जब पीड़ितों के परिवारों को संदिग्ध वीडियो और फिरौती की मांग मिली, तब उन्होंने भारतीय दूतावास से संपर्क किया।
इसके बाद 21 जुलाई को भारतीय दूतावास ने संबंधित थाई अधिकारियों को मामले की जानकारी दी।
दूतावास से मिले इनपुट के आधार पर चोनबुरी इमिग्रेशन पुलिस और पटाया पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की।
सीसीटीवी और खुफिया सूचना के आधार पर हुआ रेस्क्यू
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और खुफिया जानकारी का विश्लेषण करने के बाद पटाया स्थित एक टाउनहाउस पर छापा मारा।
वहां से तीनों भारतीय युवकों को अलग-अलग कमरों से बरामद किया गया।
पुलिस के अनुसार—
- उनके मुंह पर टेप लगी थी,
- हाथ-पैर बंधे हुए थे,
- शरीर पर चोटों के निशान दिखाई दिए।
मौके से टेप, लकड़ी का डंडा तथा लाल स्प्रे पेंट भी बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है।
पहले भी एक भारतीय के अपहरण का दावा
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उनके वहां पहुंचने से पहले भी कथित तौर पर एक अन्य भारतीय नागरिक को उसी मकान में बंधक बनाकर रखा गया था।
उनके अनुसार उस व्यक्ति के परिवार द्वारा लगभग ₹30 लाख की फिरौती दिए जाने के बाद उसे छोड़ा गया।
पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा है।
क्या यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का हिस्सा है?
प्रारंभिक जांच से संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हो सकता।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इसमें कई देशों में फैला कोई संगठित आपराधिक नेटवर्क शामिल है, जिसमें विभिन्न देशों के नागरिकों की भूमिका रही हो।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
थाईलैंड में भारतीय पर्यटकों को क्यों बरतनी चाहिए अतिरिक्त सावधानी?
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश यात्रा के दौरान किसी भी अनजान व्यक्ति या सोशल मीडिया के माध्यम से मिलने वाले अत्यधिक सस्ते टूर पैकेज, नौकरी या निवेश प्रस्तावों की अच्छी तरह जांच-पड़ताल करना आवश्यक है।
यात्रियों को केवल अधिकृत ट्रैवल एजेंसियों और विश्वसनीय माध्यमों का ही उपयोग करना चाहिए। साथ ही अपने यात्रा कार्यक्रम की जानकारी परिवार के साथ साझा करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में स्थानीय पुलिस तथा भारतीय दूतावास से तुरंत संपर्क करना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्रिप्टोकरेंसी में फिरौती मांगने की कोशिश क्यों की जाती है?
जांच एजेंसियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह कई बार कथित रूप से क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इसलिए करने का प्रयास करते हैं क्योंकि सीमा पार धन हस्तांतरण अपेक्षाकृत तेज हो सकता है और विभिन्न देशों की न्यायिक प्रक्रियाओं के कारण जांच जटिल हो सकती है।
हालांकि यह धारणा कि क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह गुमनाम होती है, सही नहीं मानी जाती। अनेक ब्लॉकचेन लेनदेन सार्वजनिक रिकॉर्ड पर दर्ज होते हैं और विशेष परिस्थितियों में जांच एजेंसियां डिजिटल फोरेंसिक तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से लेनदेन की पड़ताल कर सकती हैं। इसलिए किसी भी अवैध गतिविधि के लिए क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कानून से बचने की गारंटी नहीं देता।

