Muzaffarnagar के शिव चौक पर छाई तिरुपति बालाजी थीम की भव्य कांवड़: 9 लाख की अनोखी झांकी देखने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा वातावरण
News-Desk
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Kanwar Yatra News, Muzaffarnagar News, कांवड़ यात्रा 2026, तिरुपति बालाजी कांवड़, दिल्ली कांवड़िया, धार्मिक झांकी, बोल बम, मुज़फ्फरनगर न्यूज़, शिव चौक, श्रावण मास, हर हर महादेवKanwar Yatra 2026 अपने अंतिम चरण में पहुंचते ही आस्था, कला और धार्मिक भव्यता का अद्भुत संगम बन चुकी है। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे लाखों शिवभक्तों के बीच इस बार कई अनूठी और आकर्षक कांवड़ें लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। इसी क्रम में Muzaffarnagar के ऐतिहासिक शिव चौक पर देर रात एक ऐसी भव्य कांवड़ पहुंची, जिसने वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिल्ली से आए शिवभक्तों की टोली द्वारा तैयार की गई तिरुपति बालाजी मंदिर की थीम पर आधारित विशाल कांवड़ देखते ही देखते आकर्षण का केंद्र बन गई। जैसे ही यह कलात्मक कांवड़ शिव चौक पहुंची, पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालु इस भव्य झांकी के साथ तस्वीरें खिंचवाने और वीडियो बनाने के लिए उत्साहित नजर आए।
आस्था के साथ कला का अद्भुत संगम बनी तिरुपति बालाजी थीम की कांवड़
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में हर वर्ष अलग-अलग प्रकार की आकर्षक कांवड़ें देखने को मिलती हैं, लेकिन इस बार दिल्ली से आई तिरुपति बालाजी मंदिर की प्रतिकृति ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा।
कांवड़ में मंदिर की स्थापत्य शैली, शिखर, रंग-सज्जा और धार्मिक स्वरूप को अत्यंत बारीकी से उकेरा गया था। रात के समय आकर्षक रोशनी और साज-सज्जा के कारण पूरी झांकी और भी भव्य दिखाई दे रही थी। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह केवल एक कांवड़ नहीं बल्कि धार्मिक कला का जीवंत उदाहरण प्रतीत हो रही थी।
करीब 8 से 9 लाख रुपये की लागत से तैयार हुई भव्य झांकी
दिल्ली निवासी शिवभक्त रविंद्र, जो इस टोली का हिस्सा हैं, ने बताया कि इस विशेष कांवड़ और इसके साथ चल रहे आधुनिक डीजे सिस्टम को तैयार करने में लगभग 8 से 9 लाख रुपये का खर्च आया है।
उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी और कलात्मक कांवड़ तैयार करना आसान नहीं था। इसके लिए कई महीनों तक लगातार योजना बनाई गई और विभिन्न सामग्रियों का चयन किया गया ताकि मंदिर की वास्तविक भव्यता को यथासंभव प्रदर्शित किया जा सके।
50 शिवभक्तों ने अपने हाथों से तैयार की पूरी कांवड़
रविंद्र ने बताया कि इस विशाल कांवड़ को किसी व्यावसायिक कारीगर या कंपनी से तैयार नहीं कराया गया।
उन्होंने बताया कि उनकी टोली के लगभग 50 शिवभक्तों ने मिलकर अपने हाथों से इस पूरी झांकी को तैयार किया है। प्रत्येक सदस्य ने अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग जिम्मेदारी निभाई। किसी ने डिजाइन तैयार किया, किसी ने सजावट की, तो किसी ने संरचना निर्माण में सहयोग दिया।
उनका कहना है कि सामूहिक श्रम और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा ने इस कांवड़ को विशेष बना दिया है।
हर वर्ष नई थीम पर तैयार होती है कांवड़
रविंद्र ने बताया कि उनकी टोली पिछले कई वर्षों से कांवड़ यात्रा में भाग ले रही है और हर बार एक नई थीम पर कांवड़ तैयार करती है।
उनका उद्देश्य केवल आकर्षक झांकी प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश भी देना होता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष तिरुपति बालाजी मंदिर की थीम का चयन किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष टोली के सदस्य नई अवधारणाओं पर विचार करते हैं और उसके बाद सामूहिक रूप से पूरी कांवड़ तैयार करते हैं।
हरि और हर की एकता का संदेश देने के लिए चुनी गई थीम
रविंद्र के अनुसार, इस वर्ष तिरुपति बालाजी मंदिर की प्रतिकृति बनाने के पीछे एक विशेष भावना जुड़ी हुई है।
उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) भारतीय सनातन परंपरा में समान रूप से पूजनीय हैं। इसलिए इस कांवड़ के माध्यम से समाज को धार्मिक समरसता, एकता और सनातन संस्कृति की व्यापकता का संदेश देने का प्रयास किया गया है।
उनका कहना है कि श्रद्धा का उद्देश्य समाज को जोड़ना है और यही भावना इस झांकी के माध्यम से व्यक्त की गई है।
शिव चौक पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
देर रात करीब 12 बजे जैसे ही यह विशाल कांवड़ मुजफ्फरनगर के ऐतिहासिक शिव चौक पहुंची, वहां मौजूद श्रद्धालुओं की भीड़ स्वतः उसकी ओर आकर्षित हो गई।
चारों ओर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष गूंजने लगे। श्रद्धालु इस अनूठी झांकी को करीब से देखने के लिए उत्साहित दिखाई दिए।
कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए, जबकि अनेक श्रद्धालुओं ने पूरी टोली का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी मेहनत और धार्मिक समर्पण की सराहना की।
हरिद्वार से पैदल दिल्ली तक की यात्रा
रविंद्र ने बताया कि उनकी पूरी टोली हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर रही है।
लंबी दूरी, मौसम की चुनौतियां और भारी कांवड़ होने के बावजूद टोली पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है। उनका कहना है कि भगवान शिव की कृपा से यात्रा सुचारु रूप से चल रही है और सभी श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।
शिवरात्रि पर होगा जलाभिषेक, वहीं पूरी होगी यात्रा
दिल्ली लौटने के बाद पूरी टोली महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेगी।
रविंद्र ने बताया कि जल अर्पित करने के बाद ही उनकी कांवड़ यात्रा पूर्ण मानी जाएगी। उनके अनुसार यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, अनुशासन और सामूहिक सेवा का भी माध्यम है।
कांवड़ यात्रा में धार्मिक झांकियां बन रहीं आकर्षण का केंद्र
कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान मुजफ्फरनगर मार्ग पर इस प्रकार की अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का विषय बनी हुई हैं।
कहीं भगवान शिव के कैलाश पर्वत की प्रतिकृति बनाई गई है तो कहीं ज्योतिर्लिंग, चारधाम और विभिन्न मंदिरों की झलकियां प्रस्तुत की जा रही हैं। इन कलात्मक कांवड़ों के माध्यम से श्रद्धालु केवल जल यात्रा ही नहीं करते, बल्कि भारतीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और सामाजिक संदेशों को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की झांकियां कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप भी प्रदान करती हैं।

