श्रावण मास

संपादकीय विशेष

बारिश में डूबा शिव चौक Muzaffarnagar, फिर भी नहीं थमी डाक कांवड़ की रफ्तार! घुटनों तक पानी के बीच गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे

Muzaffarnagar के शिव चौक पर सावन के दूसरे सोमवार को भारी बारिश और जलभराव के बीच भी कांवड़ यात्रा का उत्साह कम नहीं हुआ। घुटनों तक पानी के बीच पैदल शिवभक्त और कांवड़िए हर-हर महादेव तथा बम-बम भोले के जयकारों के साथ आगे बढ़ते रहे। कांवड़ मेले के अंतिम चरण में डाक कांवड़ का दबाव भी तेजी से बढ़ा और मोटरसाइकिलों पर सवार कांवड़िए शिव चौक की परिक्रमा करते हुए अपने गंतव्य के शिवालयों की ओर रवाना हुए। चौक पर सामान्य श्रद्धालुओं की लंबी कतारें भी लगी रहीं। भारी भीड़ और खराब मौसम के बीच पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी यातायात और सुरक्षा व्यवस्था संभालते नजर आए। बारिश ने रास्तों को मुश्किल जरूर बनाया, लेकिन शिवभक्तों की आस्था और यात्रा की रफ्तार दिनभर बनी रही।

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Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुआ Muzaffarnagar, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब; हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा शहर

Muzaffarnagar में सावन के दूसरे सोमवार पर पूरा जनपद भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। अंसारी रोड स्थित प्राचीन बोहरों के मंदिर से लेकर गांधी कॉलोनी के अनंतेश्वर महादेव मंदिर, अंकित विहार के परशुराम महादेव मंदिर, शिव चौक, नदी घाट स्थित देवी मंदिर, बिंदल बाजार के माता वाला मंदिर, श्री बालाजी धाम, गणपति धाम, कटार सिंह के मंदिर और बिलासपुर के सिद्धपीठ शिव मंदिर तक श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री से जलाभिषेक किया। भारी भीड़ के बावजूद महिला-पुरुषों के लिए अलग कतारें, वालंटियर्स और पुलिस बल की मौजूदगी से दर्शन व्यवस्था सुचारु रही। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजता शहर आने वाले दिनों में कांवड़ यात्रा के बढ़ते धार्मिक उत्साह की तस्वीर भी पेश करता नजर आया।

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Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

Muzaffarnagar के शिव चौक पर छाई तिरुपति बालाजी थीम की भव्य कांवड़: 9 लाख की अनोखी झांकी देखने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा वातावरण

Muzaffarnagar ऐतिहासिक शिव चौक पर पहुंची तिरुपति बालाजी मंदिर थीम की भव्य कांवड़ श्रद्धा, कला और सामूहिक समर्पण का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आई। लगभग 8 से 9 लाख रुपये की लागत से तैयार इस विशेष झांकी को दिल्ली के करीब 50 शिवभक्तों ने स्वयं अपने हाथों से तैयार किया। हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर लौट रही यह टोली भगवान शिव और भगवान विष्णु के प्रति समान श्रद्धा तथा समाज में एकता का संदेश दे रही है। कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान इस तरह की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण के साथ-साथ भारतीय आध्यात्मिक विरासत की जीवंत झलक भी प्रस्तुत कर रही हैं।

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कंधों पर बहंगी, पलड़ों में बैठे नन्हे शिवभक्त: Muzaffarnagar के शिव चौक पर पिता की अनोखी कांवड़ बनी आस्था और संस्कारों की मिसाल

Muzaffarnagar के शिव चौक पर दिल्ली निवासी सतीश द्वारा अपने दोनों छोटे बच्चों को बहंगी के पलड़ों में बैठाकर हरिद्वार से पैदल गंगाजल लाने का दृश्य श्रद्धा, पारिवारिक समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। सतीश का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही सनातन संस्कृति, अच्छे संस्कार और धार्मिक परंपराओं से जोड़ना है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने इस अनूठे दृश्य का स्वागत करते हुए परिवार की आस्था और भगवान शिव के प्रति समर्पण को नमन किया।

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Muzaffarnagar में आस्था के अद्भुत रंग: नोटों से सजी कांवड़ बनी आकर्षण का केंद्र, 411 दिन की कठिन तपस्या पर निकले 65 वर्षीय शिवभक्त ने किया भावुक

Muzaffarnagar में दिखाई दे रहे ऐसे प्रेरणादायक दृश्य भारतीय आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंत पहचान बन रहे हैं। नोटों से सजी कांवड़ के माध्यम से मंदिर और भंडारे के लिए समर्पण की भावना हो या 65 वर्षीय हरपाल नाथ की 411 दिनों की कठिन आध्यात्मिक यात्रा, दोनों ही उदाहरण श्रद्धा, सेवा, त्याग और अटूट विश्वास का संदेश देते हैं। ऐसे प्रेरक प्रसंग कांवड़ यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और मानवीय मूल्यों का भी महापर्व बनाते हैं।

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Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

Muzaffarnagar में दिखी आधुनिक ‘श्रवण कुमार’ की मिसाल: 80 वर्षीय दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से ला रहे गंगाजल, शिव चौक पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Muzaffarnagar हापुड़ निवासी शिवभक्त प्रशांत राणा अपनी 80 वर्षीय दादी शारदा देवी को विशेष कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रहे हैं। लगभग 90 किलोग्राम से अधिक भार के साथ पूरी की जा रही यह यात्रा श्रद्धा, सेवा, पारिवारिक संस्कार और सनातन परंपरा का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर कांवड़ यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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Religious

श्रावण मास 2026: क्यों है Shravan भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथाएं, व्रत, कांवड़ यात्रा और 20 अद्भुत विशेषताएं

Shravan मास भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का अत्यंत पावन समय माना जाता है। इस माह में श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ की गई पूजा, जलाभिषेक, व्रत, जप, दान और सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। विभिन्न धार्मिक परंपराओं और क्षेत्रों में पूजा-पद्धति एवं मान्यताओं में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं, जिनका सम्मान करना भारतीय संस्कृति की विशेषता है।

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