Muzaffarnagar में मूसलाधार बारिश के बीच कांवड़ यात्रा पर प्रशासन की पैनी नजर, DM-SSP ने संभाला मोर्चा; पंपिंग सेट से हटाया जलभराव
Muzaffarnagar जनपद में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी। एक ओर आसमान से लगातार पानी बरसता रहा, तो दूसरी ओर हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे शिवभक्तों की यात्रा जारी रही। ऐसे हालात में जिला और पुलिस प्रशासन ने कांवड़ मार्गों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर सक्रियता बढ़ा दी।
बारिश के बीच जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा स्वयं कांवड़ यात्रा मार्गों पर पहुंचे और संभावित जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर हालात का जायजा लिया और जहां पानी जमा मिला, वहां तत्काल निकासी की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी के निर्देश के बाद प्रशासनिक टीम और नगर पालिका अमले को सक्रिय किया गया। अत्याधुनिक पंपिंग सेटों और मशीनों की सहायता से जलभराव वाले स्थानों से तेजी से पानी निकालने का काम शुरू किया गया। प्रशासन का उद्देश्य साफ था—बारिश कितनी भी तेज हो, कांवड़ियों की आवाजाही में अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए।
इसके बाद जिलाधिकारी और एसएसपी शिव चौक स्थित मुख्य कांवड़ कंट्रोल रूम पहुंचे। वहां सीसीटीवी कैमरों के जरिए जिलेभर के कांवड़ मार्गों, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात संचालन की स्थिति की निगरानी की गई।
इसी दौरान एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने कंट्रोल रूम के पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से सीधे शिवभक्तों को संबोधित किया और उन्हें जलभराव की स्थिति दूर किए जाने की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से सुरक्षित और निर्धारित कांवड़ मार्गों का इस्तेमाल करने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।
आसमान से बरसा पानी, जमीन पर प्रशासन की परीक्षा
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की वास्तविक परीक्षा ले ली। कांवड़ मार्गों पर बड़ी संख्या में शिवभक्त पैदल चल रहे हैं और ऐसे समय में लगातार बारिश से सड़क पर पानी जमा होना यात्रियों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
जलभराव केवल पैदल चलने वालों के लिए असुविधा नहीं बनता। सड़क पर पानी अधिक जमा होने से वाहनों की गति प्रभावित हो सकती है, यातायात धीमा हो सकता है और कुछ स्थानों पर फिसलन का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसी वजह से प्रशासन ने बारिश के दौरान ही संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण शुरू किया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर स्थिति को देखा और जहां जरूरत पड़ी, वहां मशीनें लगाकर पानी की निकासी कराई।
DM उमेश मिश्रा और SSP संजय कुमार वर्मा खुद पहुंचे कांवड़ मार्ग पर
कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजन में अधिकारियों का फील्ड में मौजूद रहना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बारिश के बीच स्वयं कांवड़ मार्गों का निरीक्षण किया।
दोनों अधिकारियों ने संभावित जलभराव वाले स्थानों की स्थिति देखी और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
इस दौरान मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बारिश के कारण कांवड़ यात्रा मार्गों पर ऐसी स्थिति न बने जिससे हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों को रुकना पड़े या उन्हें असुरक्षित रास्ते का सहारा लेना पड़े।
जलभराव दिखा तो तुरंत शुरू हुई पानी निकासी
निरीक्षण के दौरान जहां भी जलभराव की स्थिति सामने आई, वहां प्रशासनिक मशीनरी को तत्काल सक्रिय किया गया। नगर पालिका अमले को मौके पर भेजकर पानी निकालने की कार्रवाई शुरू कराई गई।
अत्याधुनिक पंपिंग सेट और अन्य मशीनों की सहायता से जमा पानी को तेजी से हटाया गया। प्रशासन का प्रयास था कि सड़क को जल्द से जल्द पैदल आवागमन के लिए सुगम बनाया जा सके।
बारिश के दौरान जल निकासी की यह व्यवस्था लगातार निगरानी की मांग करती है, क्योंकि बारिश दोबारा तेज होने पर कुछ स्थानों पर फिर से पानी जमा हो सकता है। इसलिए अधिकारियों ने कर्मचारियों को कांवड़ मार्गों पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए।
कांवड़ियों की राह में पानी न बने सबसे बड़ी बाधा
कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्त लंबी दूरी तय करके हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं। कई श्रद्धालु लगातार पैदल यात्रा करते हैं और रास्ते में मिलने वाली किसी भी बाधा का सीधा असर उनकी यात्रा पर पड़ सकता है।
ऐसे में जलभराव को समय रहते हटाना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।
पानी जमा रहने से श्रद्धालुओं को सड़क के किनारे से गुजरना पड़ सकता है या यातायात के बीच से रास्ता बनाना पड़ सकता है। इससे सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।
प्रशासन ने इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए पानी की निकासी को प्राथमिकता दी।
बारिश में भी जारी रही कांवड़ यात्रा की निगरानी
मूसलाधार बारिश के बावजूद कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन की निगरानी में कोई कमी नहीं आई। अधिकारियों ने केवल एक-दो स्थानों की स्थिति देखने के बजाय जिलेभर के कांवड़ मार्गों की निगरानी व्यवस्था पर भी ध्यान दिया।
शिव चौक स्थित मुख्य कांवड़ कंट्रोल रूम इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। यहां लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए अलग-अलग मार्गों पर नजर रखी जा रही है।
किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने, यातायात प्रभावित होने, जलभराव या किसी अन्य समस्या की स्थिति में कंट्रोल रूम से संबंधित टीमों को सूचना दी जा सकती है।
शिव चौक कंट्रोल रूम पहुंचकर अधिकारियों ने लिया जायजा
स्थलीय निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी और एसएसपी शिव चौक स्थित मुख्य कांवड़ कंट्रोल रूम पहुंचे। यहां अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से जिले के अलग-अलग कांवड़ मार्गों की स्थिति देखी।
सुरक्षा व्यवस्था, यातायात संचालन और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर जानकारी ली गई।
सीसीटीवी निगरानी का फायदा यह है कि अधिकारी एक ही स्थान से कई क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रख सकते हैं। किसी मार्ग पर असामान्य भीड़ या कोई समस्या दिखाई देने पर संबंधित पुलिस और प्रशासनिक टीम को तत्काल सक्रिय किया जा सकता है।
कंट्रोल रूम से सीधे शिवभक्तों को संदेश
निरीक्षण के दौरान एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने कंट्रोल रूम के पब्लिक एड्रेस सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए सीधे शिवभक्तों और श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
उन्होंने जानकारी दी कि जिन स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आई थी, वहां से पानी की निकासी करा दी गई है।
यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि बारिश के बीच यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को यह भरोसा देना जरूरी था कि प्रशासन उनकी समस्याओं पर नजर रख रहा है और मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सुरक्षित मार्ग से ही आगे बढ़ने की अपील
एसएसपी ने श्रद्धालुओं से प्रशासन द्वारा निर्धारित और सुरक्षित कांवड़ मार्गों का ही उपयोग करने की अपील की।
बड़ी धार्मिक यात्रा के दौरान लोग कभी-कभी भीड़ या किसी अन्य कारण से वैकल्पिक रास्ते अपनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन ऐसे रास्तों पर जरूरी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है।
इसलिए प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्गों पर चलना श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुरक्षित हो सकता है।
अफवाहों से बचने का भी दिया संदेश
बारिश और बड़ी भीड़ के दौरान अफवाहें तेजी से फैल सकती हैं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिना पुष्टि की जानकारी कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है।
एसएसपी ने श्रद्धालुओं से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
प्रशासन का संदेश साफ था कि किसी भी जानकारी को लेकर भ्रम की स्थिति में आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा किया जाए और बिना पुष्टि के किसी खबर या संदेश के आधार पर मार्ग न बदला जाए।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों पर विशेष फोकस
मुजफ्फरनगर कांवड़ यात्रा के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले बड़ी संख्या में कांवड़िए जिले से होकर अपने-अपने गंतव्य की ओर जाते हैं।
इन श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाए रखना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
बारिश के मौसम में यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। सड़क की स्थिति, जलभराव, यातायात और मौसम को लगातार मॉनिटर करना पड़ता है।
प्रशासन ने इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फील्ड निरीक्षण और कंट्रोल रूम निगरानी दोनों को साथ-साथ सक्रिय रखा।
मशीनों से पानी निकालने की व्यवस्था, मौके पर पहुंची टीम
जलभराव की समस्या सामने आने के बाद केवल चेतावनी जारी करने के बजाय प्रशासन ने मौके पर मशीनें लगाकर पानी निकालने की कार्रवाई की।
अत्याधुनिक पंपिंग सेटों की मदद से जमा पानी को तेजी से हटाया गया। इससे कांवड़ मार्ग को जल्द से जल्द सामान्य करने में मदद मिली।
इस तरह की व्यवस्था खासकर उन स्थानों पर महत्वपूर्ण होती है जहां सड़क की ऊंचाई कम होने या प्राकृतिक जल निकासी की समस्या के कारण बारिश का पानी जमा होने की संभावना अधिक रहती है।
अधिकारियों ने कर्मचारियों को दिए स्पष्ट निर्देश
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देश दिया कि कांवड़ मार्गों पर पानी जमा न होने पाए।
इसका अर्थ केवल एक बार पानी निकालना नहीं है। लगातार बारिश के दौरान जलभराव वाले स्थानों की बार-बार निगरानी करना भी जरूरी है।
इसलिए प्रशासनिक और नगर पालिका टीमों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल पंपिंग व्यवस्था सक्रिय करने के निर्देश दिए गए।
बारिश ने बढ़ाई यातायात प्रबंधन की चुनौती
कांवड़ यात्रा के दौरान पहले से ही सड़क पर पैदल यात्रियों और वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। बारिश होने पर यातायात व्यवस्था और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
पानी जमा होने से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो सकती है। वाहनों की गति घट सकती है और पैदल श्रद्धालुओं को भी अधिक जगह की आवश्यकता पड़ सकती है।
ऐसे में पुलिस को लगातार यातायात की स्थिति का आकलन करना पड़ता है।
कंट्रोल रूम से सीसीटीवी निगरानी इस काम में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है।
कांवड़ मार्गों पर 24 घंटे निगरानी की जरूरत
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही और लगातार बदलते मौसम को देखते हुए कांवड़ मार्गों की निगरानी लगातार करना जरूरी है।
दिन में सड़क की स्थिति अलग हो सकती है और रात में अलग। बारिश के बाद अंधेरे में जलभराव या फिसलन को पहचानना पैदल यात्रियों के लिए कठिन हो सकता है।
इसीलिए प्रशासन की निगरानी व्यवस्था में फील्ड टीमों और कंट्रोल रूम दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
कंट्रोल रूम बना प्रशासन की तीसरी आंख
शिव चौक स्थित कांवड़ कंट्रोल रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए जिले के विभिन्न कांवड़ मार्गों पर नजर रखी जा रही है।
किसी भी स्थान पर भीड़ का दबाव बढ़ने, यातायात बाधित होने या किसी अन्य समस्या की स्थिति में कंट्रोल रूम से संबंधित टीम को सूचना दी जा सकती है।
इस तरह कंट्रोल रूम केवल निगरानी केंद्र नहीं, बल्कि पूरे कांवड़ मार्ग की व्यवस्थाओं को समन्वित करने का माध्यम बन जाता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता
कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन के लिए दो लक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं—श्रद्धालुओं की सुविधा और उनकी सुरक्षा।
पानी की निकासी से जहां सुविधा सुनिश्चित होती है, वहीं निर्धारित मार्ग का इस्तेमाल करने की अपील सुरक्षा से जुड़ी है।
दोनों कदम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि श्रद्धालु सुरक्षित मार्ग पर चलते हैं और मार्ग जलभराव से मुक्त रहता है तो यात्रा अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सकती है।
प्रशासन की अपील—सहयोग करें, सुरक्षित रहें
एसएसपी द्वारा श्रद्धालुओं को दिए गए संदेश में प्रशासन के साथ सहयोग करने पर भी अप्रत्यक्ष रूप से जोर रहा। निर्धारित मार्गों का पालन करना, अफवाहों से बचना और किसी समस्या की स्थिति में पुलिस-प्रशासन को सूचना देना यात्रा को सुरक्षित बनाने में मदद कर सकता है।
कांवड़ यात्रा में शामिल प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। बड़ी भीड़ में अनुशासन और धैर्य बनाए रखना सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाता है।
बारिश में प्रशासन की परीक्षा, फील्ड में दिखी सक्रियता
मूसलाधार बारिश के दौरान जिलाधिकारी और एसएसपी का स्वयं कांवड़ मार्गों पर पहुंचना प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है।
अधिकारियों ने केवल कार्यालय से निर्देश देने के बजाय मौके पर जाकर स्थिति देखी और तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
जलभराव हटाने के लिए मशीनें लगाना और बाद में कंट्रोल रूम से जिलेभर की स्थिति की समीक्षा करना एक समन्वित व्यवस्था का हिस्सा रहा।
जलभराव हटने के बाद कांवड़ियों को मिली राहत
पानी की निकासी होने के बाद उन मार्गों पर आवाजाही आसान हुई जहां जलभराव की स्थिति बनी थी। इससे हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ियों को यात्रा जारी रखने में राहत मिली।
बारिश के कारण पहले से थके श्रद्धालुओं के लिए सड़क पर जमा पानी एक अतिरिक्त परेशानी बन सकता था। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने इस बाधा को कम करने की कोशिश की।
कांवड़ यात्रा में मौसम बना बड़ा फैक्टर
कांवड़ यात्रा के दौरान मौसम का सीधा असर व्यवस्थाओं पर पड़ता है। बारिश से जहां गर्मी से राहत मिल सकती है, वहीं अत्यधिक बारिश जलभराव, फिसलन और यातायात जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है।
इसलिए प्रशासन को मौसम के बदलते मिजाज के अनुसार अपनी तैयारियों को भी बदलना पड़ता है।
पंपिंग सेट और जल निकासी की व्यवस्था इसी तरह की आपात तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्थानीय निकाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण
जलभराव हटाने में नगर पालिका अमले की भूमिका सामने आई है। बारिश के दौरान सड़क और सार्वजनिक मार्गों पर जमा पानी की निकासी के लिए स्थानीय निकाय की मशीनरी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
कांवड़ यात्रा के दौरान यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि किसी मार्ग पर लंबे समय तक पानी जमा रहने से हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
इसलिए प्रशासन, पुलिस और स्थानीय निकाय के बीच समन्वय आवश्यक है।
सुरक्षा व्यवस्था और यातायात की भी लगातार समीक्षा
कंट्रोल रूम में सीसीटीवी के जरिए अधिकारियों ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया। इससे यह पता चलता है कि प्रशासन केवल बारिश और जलभराव पर ही ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि कांवड़ यात्रा की पूरी व्यवस्था को एक साथ मॉनिटर कर रहा है।
भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, मार्ग सुरक्षा और आपात प्रतिक्रिया—इन सभी पहलुओं की निगरानी एक साथ जरूरी है।
कांवड़ियों को किसी भी परेशानी से बचाने का प्रयास
प्रशासन की पूरी कवायद का अंतिम उद्देश्य यही है कि कांवड़ियों को अपनी यात्रा के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकलने वाले श्रद्धालु लंबी दूरी तय करते हैं। यात्रा में पहले से ही शारीरिक थकान होती है। यदि रास्ते में जलभराव, यातायात जाम या भ्रम की स्थिति पैदा हो जाए तो परेशानी बढ़ सकती है।
इसलिए पानी निकालने से लेकर सार्वजनिक उद्घोषणा तक हर कदम श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ा है।
अफवाहों के बजाय आधिकारिक सूचना पर भरोसा जरूरी
बड़ी भीड़ वाले आयोजनों में अफवाहें तेजी से फैल सकती हैं। किसी मार्ग पर जाम, किसी घटना या मौसम की स्थिति को लेकर अपुष्ट जानकारी लोगों में अनावश्यक भय पैदा कर सकती है।
प्रशासन द्वारा कंट्रोल रूम और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए सीधे श्रद्धालुओं तक जानकारी पहुंचाना इसी समस्या को रोकने का एक तरीका है।
श्रद्धालुओं के लिए भी जरूरी है कि वे किसी अनजान संदेश या सोशल मीडिया पोस्ट पर तुरंत भरोसा न करें।
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रशासन की नजर
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन लगातार सक्रिय है। बारिश के बीच जलभराव हटाने की कार्रवाई और अधिकारियों का फील्ड निरीक्षण इसी तैयारी का हिस्सा है।
कांवड़ कंट्रोल रूम के जरिए जिलेभर के मार्गों की निगरानी और मौके पर मौजूद टीमों के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरी व्यवस्था का लक्ष्य यही है कि श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।
बारिश कितनी भी तेज हो, यात्रा व्यवस्था नहीं रुकनी चाहिए
मूसलाधार बारिश ने भले ही प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी की हो, लेकिन प्रशासन ने जलभराव को तत्काल हटाकर यह कोशिश की कि कांवड़ यात्रा बाधित न हो।
पंपिंग मशीनों से पानी निकालने की कार्रवाई, फील्ड निरीक्षण, सीसीटीवी निगरानी और सार्वजनिक उद्घोषणा—इन सभी को एक साथ इस्तेमाल किया गया।
यह समन्वित व्यवस्था बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासनिक तैयारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने लाती है।
DM-SSP की निगरानी से फील्ड टीमों को मिला स्पष्ट संदेश
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और एसएसपी संजय कुमार वर्मा का स्वयं मौके पर पहुंचना फील्ड में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण रहा।
मौके की स्थिति सीधे देखने से अधिकारियों को वास्तविक समस्याओं का आकलन करने में मदद मिलती है। इसके बाद संबंधित विभागों को तत्काल निर्देश देना भी आसान होता है।
कांवड़ यात्रा जैसे बड़े आयोजन में यही तेज समन्वय किसी छोटी समस्या को बड़ी परेशानी बनने से रोक सकता है।
कांवड़ मार्गों को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता
बारिश के बावजूद प्रशासन का ध्यान कांवड़ मार्गों को सुगम बनाए रखने पर रहा। जलभराव हटाना इसका पहला कदम था। इसके साथ निर्धारित मार्गों पर ही यात्रा करने की अपील भी की गई।
सुरक्षित मार्गों का इस्तेमाल करने से पुलिस और प्रशासन को भीड़ की निगरानी और यातायात प्रबंधन में सुविधा होती है।
श्रद्धालुओं के लिए भी इससे अनजान या असुरक्षित रास्तों पर जाने का जोखिम कम होता है।
मुजफ्फरनगर में प्रशासन की बारिश वाली ‘फील्ड परीक्षा’
कांवड़ यात्रा के दौरान बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की वास्तविक परीक्षा ली। लेकिन जिलाधिकारी और एसएसपी के निरीक्षण, जलभराव वाले स्थानों से मशीनों द्वारा पानी की निकासी और कंट्रोल रूम से निगरानी ने प्रशासन की सक्रियता को सामने रखा।
अब लगातार बारिश की स्थिति में सबसे जरूरी यही होगा कि जलभराव वाले स्थानों पर दोबारा पानी जमा न हो और कांवड़ मार्गों पर निगरानी लगातार जारी रहे।

