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Russia ने ब्रिटेन को दी बड़ी चेतावनी, यूक्रेन के हमलों में ब्रिटिश ड्रोन का दावा; बोला- ‘गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं’

Russia  और ब्रिटेन के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर पहले से मौजूद तनाव अब ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल के आरोपों के कारण एक बार फिर चर्चा में आ गया है। रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन युद्ध में सीधे तौर पर दखल देने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यूक्रेन ने रूस के खिलाफ जिस ड्रोन का इस्तेमाल किया, उसे ब्रिटिश कंपनियों ने तैयार किया था।

रूसी पक्ष का कहना है कि यदि ब्रिटिश कंपनियों द्वारा निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल रूस के खिलाफ हमलों में हुआ है, तो इसे महज तकनीकी या कारोबारी सहयोग के रूप में नहीं देखा जा सकता। रूस ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह की गतिविधियों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

यह पूरा विवाद ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि यूक्रेन ने रूस के भीतर किए गए हमले में दो ब्रिटिश कंपनियों द्वारा बनाए गए ड्रोन का इस्तेमाल किया।

अगर इस दावे की पुष्टि होती है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ब्रिटिश तकनीक के रूस के भीतर हमलों में इस्तेमाल होने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।

द संडे टाइम्स की रिपोर्ट से शुरू हुआ नया विवाद

मामले की शुरुआत ब्रिटिश मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट से हुई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूक्रेन ने रूस के अंदर हमले के लिए ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल किया जिन्हें ब्रिटेन की दो कंपनियों ने बनाया था।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद रूस ने ब्रिटेन की भूमिका पर सवाल उठाए।

रूसी पक्ष का कहना है कि यदि ब्रिटिश कंपनियों की तकनीक से तैयार ड्रोन का इस्तेमाल रूस के खिलाफ हमले में हुआ है, तो इससे ब्रिटेन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

मॉस्को की चिंता केवल ड्रोन तक सीमित नहीं है। रूस लंबे समय से पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को हथियार, सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया सहायता और तकनीकी सहयोग देने का आरोप लगाता रहा है।

रूस का आरोप- लंदन यूक्रेन संकट को और भड़का रहा है

ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने इस मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।

रूसी दूतावास का आरोप है कि लंदन जानबूझकर यूक्रेन संकट को और बढ़ावा दे रहा है। रूसी पक्ष के अनुसार ब्रिटेन यूक्रेन के माध्यम से रूस को अधिक से अधिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

रूसी दूतावास ने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और ब्रिटेन को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

इस बयान के बाद रूस और ब्रिटेन के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों में एक और संवेदनशील मुद्दा जुड़ गया है।

ब्रिटिश ड्रोन का रूस पर हमला कितना बड़ा मुद्दा है?

यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल चुका है। शुरुआत में ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से निगरानी और सीमित सैन्य अभियानों के लिए देखा जाता था, लेकिन अब दोनों पक्ष लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यूक्रेन ने रूस के भीतर सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन अभियानों को काफी बढ़ाया है।

ऐसे में यदि किसी हमले में ब्रिटिश कंपनियों द्वारा निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल हुआ है, तो रूस इसे केवल यूक्रेन की सैन्य कार्रवाई नहीं मान सकता। मॉस्को इसे पश्चिमी तकनीक की रूस के खिलाफ सैन्य इस्तेमाल से जोड़कर देख रहा है।

यही वजह है कि इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।

ब्रिटेन का जवाब- यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े हैं

रूस के आरोपों के बीच ब्रिटेन की ओर से भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वह यूक्रेन के समर्थन से पीछे हटने वाला नहीं है।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़ा है। प्रवक्ता के अनुसार रूस के हमलों से अपनी रक्षा करने के लिए यूक्रेन को जिन हथियारों की जरूरत होगी, ब्रिटेन उन्हें देता रहेगा।

ब्रिटेन ने रूस के लिए अपनी नीति को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं रखने की बात कही है।

ब्रिटिश पक्ष के अनुसार रूस की आक्रामकता के खिलाफ यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों का समर्थन जारी रहेगा।

लंदन का संदेश साफ- सैन्य सहायता जारी रहेगी

ब्रिटेन की नीति में यूक्रेन को सैन्य सहायता देना लंबे समय से महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

ब्रिटेन का तर्क है कि यूक्रेन को अपनी रक्षा करने का अधिकार है और उसे रूस के हमलों से बचने के लिए आवश्यक सैन्य क्षमता उपलब्ध कराना जरूरी है।

यही वजह है कि ब्रिटेन ने युद्ध के दौरान यूक्रेन को विभिन्न प्रकार के सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए हैं।

इसमें टैंक, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और अन्य सैन्य सामग्री शामिल बताई गई है।

रूस के भीतर यूक्रेनी हमलों का दायरा बढ़ा

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अब केवल दोनों देशों की साझा सीमा के आसपास तक सीमित नहीं रह गया है।

यूक्रेन ने रूस के भीतर काफी दूरी तक ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले करने की क्षमता विकसित की है।

रिपोर्टों के मुताबिक इस साल रूस के भीतर यूक्रेनी हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जुलाई में हुए हमले जनवरी की तुलना में करीब तीन गुना तक बढ़े।

यह बदलाव युद्ध के स्वरूप में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।

अब रूसी सीमा से काफी दूर तक पहुंच रहे हमले

यूक्रेन के ड्रोन अभियानों का एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी बढ़ती दूरी है।

पहले जहां सीमा से लगे रूसी क्षेत्रों पर हमलों की चर्चा अधिक होती थी, वहीं अब रूस के अंदर काफी दूर स्थित सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें आती रही हैं।

इस तरह के हमलों का उद्देश्य रूस की सैन्य क्षमता, ईंधन आपूर्ति और युद्ध से जुड़े बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ाना माना जाता है।

रूस के सैन्य ठिकाने बने प्रमुख निशाने

यूक्रेन द्वारा किए जा रहे हमलों में रूस के सैन्य ठिकानों को प्रमुख लक्ष्य बताया गया है।

सैन्य अड्डों पर हमले का उद्देश्य रूस की सैन्य तैयारियों और युद्ध क्षमता को प्रभावित करना हो सकता है।

इसके अलावा हथियारों के भंडार और ईंधन से जुड़े ठिकाने भी हमलों के दायरे में बताए जा रहे हैं।

लंबी दूरी के ड्रोन ऐसे अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

तेल रिफाइनरी और औद्योगिक ठिकानों पर भी हमले

यूक्रेनी हमलों का दायरा केवल सैन्य प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं बताया जा रहा है।

रूस की तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आती रही हैं।

तेल और ईंधन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमला युद्ध के आर्थिक और रणनीतिक पक्ष को प्रभावित कर सकता है।

इसी कारण रूस के लिए ऐसे हमले सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक चिंता का विषय भी बनते हैं।

ब्रिटेन बना यूक्रेन का प्रमुख समर्थक

रूस और ब्रिटेन के बीच विवाद को समझने के लिए यूक्रेन के साथ ब्रिटेन के सैन्य संबंधों को देखना भी जरूरी है।

युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रिटेन यूक्रेन के प्रमुख समर्थक देशों में शामिल रहा है।

ब्रिटेन ने यूक्रेन के लिए बड़ी आर्थिक और सैन्य सहायता का वादा किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार लंदन की ओर से लगभग 25 अरब पाउंड यानी करीब 3.24 लाख करोड़ रुपये की सहायता का वादा किया गया है।

इसमें लगभग 16 अरब पाउंड की सैन्य सहायता शामिल बताई गई है।

टैंक से लेकर ड्रोन तक ब्रिटेन ने दी सैन्य मदद

ब्रिटेन की ओर से यूक्रेन को कई प्रकार के सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

इनमें टैंक, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं।

युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों द्वारा उपलब्ध कराई गई सैन्य तकनीक ने यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

रूस लगातार इस सैन्य सहायता की आलोचना करता रहा है और इसे युद्ध को लंबा खींचने वाला कदम बताता है।

63 हजार से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों को प्रशिक्षण

ब्रिटेन ने केवल हथियार उपलब्ध कराने तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार ब्रिटेन में 63 हजार से अधिक यूक्रेनी सैनिकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

सैन्य प्रशिक्षण के जरिए यूक्रेनी सैनिकों को आधुनिक युद्ध तकनीक, हथियारों और विभिन्न सैन्य अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

रूस की नजर में पश्चिमी सैन्य प्रशिक्षण और हथियारों की आपूर्ति युद्ध में पश्चिमी देशों की बढ़ती भूमिका का संकेत है।

हाल ही में 1.5 लाख ड्रोन देने की घोषणा

ब्रिटेन ने हाल में यूक्रेन को बड़ी संख्या में ड्रोन उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है।

बताया गया है कि यूक्रेन को करीब 1.5 लाख ड्रोन और 350 एयर डिफेंस मिसाइलें देने की घोषणा की गई।

ड्रोन की इतनी बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि आधुनिक युद्ध में मानवरहित प्रणालियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है।

यूक्रेन के लिए ड्रोन केवल हमले का साधन नहीं हैं, बल्कि निगरानी, लक्ष्य पहचान और सैन्य अभियानों में भी इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।

रूस की चिंता क्यों बढ़ रही है?

रूस के लिए चिंता का एक बड़ा कारण यह है कि यूक्रेन अब अपने हमलों को रूसी सीमा के बाहर तक सीमित नहीं रख रहा।

रूस के अंदर सैन्य और औद्योगिक ठिकानों पर लगातार हमले होने से सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ता है।

यदि इन अभियानों में पश्चिमी देशों की तकनीक या उपकरणों का इस्तेमाल होता है, तो मॉस्को इसे सीधे पश्चिमी समर्थन से जोड़ता है।

यही कारण है कि ब्रिटिश कंपनियों से बने ड्रोन के कथित इस्तेमाल की खबर ने रूसी प्रतिक्रिया को और तीखा कर दिया।

क्या इससे रूस और ब्रिटेन के बीच तनाव बढ़ेगा?

रूस और ब्रिटेन के संबंध यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं।

ब्रिटेन लगातार यूक्रेन का समर्थन करता रहा है, जबकि रूस पश्चिमी देशों को युद्ध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का आरोप लगाता रहा है।

अब ब्रिटिश कंपनियों की तकनीक से बने ड्रोन के रूस पर हमले में कथित इस्तेमाल ने तनाव का एक नया आयाम सामने ला दिया है।

रूसी दूतावास की ‘गंभीर परिणाम’ वाली चेतावनी के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव आगे किस दिशा में जाता है।

युद्ध अब तकनीक की लड़ाई भी बन चुका है

रूस-यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक सैन्य तकनीक की भूमिका को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।

ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम, सैटेलाइट जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्र युद्ध के प्रमुख हिस्से बन चुके हैं।

कम लागत वाले ड्रोन से लेकर अत्याधुनिक लंबी दूरी के सिस्टम तक, मानवरहित तकनीक ने युद्ध के मैदान की रणनीति बदल दी है।

यूक्रेन और रूस दोनों ही इस क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहे हैं।

ड्रोन की भूमिका क्यों बढ़ रही है?

ड्रोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनके जरिए सैनिकों को सीधे जोखिम में डाले बिना निगरानी और हमला किया जा सकता है।

लंबी दूरी के ड्रोन के कारण युद्धक्षेत्र की सीमा और अधिक विस्तृत हो गई है।

यदि कोई देश अपने विरोधी के सैन्य और औद्योगिक ढांचे को दूर से निशाना बना सकता है, तो युद्ध की रणनीति पूरी तरह बदल जाती है।

यूक्रेन द्वारा रूस के अंदर किए जा रहे हमलों में इसी बदलाव की झलक दिखाई देती है।

रूस के लिए सिर्फ सैन्य नहीं, आर्थिक चुनौती भी

तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडार और औद्योगिक प्रतिष्ठान किसी भी बड़े देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं।

इन पर हमले से केवल तत्काल सैन्य नुकसान नहीं होता, बल्कि परिवहन, ऊर्जा आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

इसीलिए यूक्रेन के रूसी औद्योगिक और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रूस गंभीरता से लेता है।

ब्रिटेन की नीति में कोई बदलाव नहीं दिखा

रूस की चेतावनी के बावजूद ब्रिटिश पक्ष ने यूक्रेन के समर्थन से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि रूस के हमलों से अपनी रक्षा के लिए यूक्रेन को आवश्यक हथियार उपलब्ध कराने की नीति जारी रहेगी।

इससे साफ है कि लंदन और मॉस्को के बीच यूक्रेन को लेकर रणनीतिक मतभेद अभी भी गहरे हैं।

रूस की चेतावनी के पीछे कूटनीतिक संदेश भी

‘गंभीर परिणाम’ भुगतने की रूसी चेतावनी को केवल सैन्य धमकी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा।

इस तरह के बयान अक्सर कूटनीतिक दबाव बनाने का माध्यम भी होते हैं। रूस ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों को यह संदेश देना चाहता है कि यूक्रेन को हथियार और तकनीकी सहायता देने की भी एक सीमा है।

मॉस्को लगातार पश्चिमी देशों को चेताता रहा है कि यूक्रेन को बढ़ती सैन्य सहायता संघर्ष को व्यापक रूप दे सकती है।

यूक्रेन के लिए पश्चिमी समर्थन कितना महत्वपूर्ण है?

यूक्रेन की सैन्य रणनीति में पश्चिमी देशों की सहायता महत्वपूर्ण रही है।

हथियारों के साथ-साथ प्रशिक्षण, तकनीक, एयर डिफेंस और अन्य सैन्य संसाधनों ने यूक्रेन की युद्ध क्षमता को बनाए रखने में योगदान दिया है।

ब्रिटेन इस समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देशों में शामिल है।

इसलिए ब्रिटिश तकनीक से जुड़े किसी भी सैन्य उपयोग की खबर का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है।

आगे क्या हो सकता है?

अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि रूस इस कथित ब्रिटिश ड्रोन इस्तेमाल के मामले में आगे क्या कदम उठाता है और ब्रिटेन अपनी सैन्य सहायता नीति को किस तरह आगे बढ़ाता है।

यदि ब्रिटेन और यूक्रेन के बीच ड्रोन तकनीक से जुड़े सहयोग को लेकर और जानकारी सामने आती है, तो रूस की प्रतिक्रिया और तीखी हो सकती है।

दूसरी ओर ब्रिटेन पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि वह यूक्रेन को समर्थन जारी रखने के पक्ष में है।

रूस-यूक्रेन युद्ध का नया मोर्चा आसमान में

रूस-यूक्रेन युद्ध में अब जमीन के साथ-साथ आसमान भी प्रमुख युद्धक्षेत्र बन चुका है।

लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइलों ने दोनों देशों को एक-दूसरे के गहरे इलाकों तक हमला करने की क्षमता दी है।

यूक्रेन रूस के अंदर दूर तक हमले कर रहा है, जबकि रूस भी यूक्रेन के शहरों और बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाता रहा है।

ऐसे माहौल में किसी तीसरे देश की तकनीक या हथियार का इस्तेमाल विवाद को और जटिल बना सकता है।

ब्रिटिश कंपनियों से जुड़े दावे की पुष्टि अहम होगी

पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रिटिश कंपनियों द्वारा बनाए गए ड्रोन के इस्तेमाल का दावा ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट से सामने आया है।

रूस ने इसी रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन पर आरोप लगाया है।

इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कथित ड्रोन की वास्तविक उत्पत्ति, उसकी आपूर्ति की श्रृंखला और उसके इस्तेमाल की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि इस विवाद की वास्तविक तस्वीर समझने में महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर रूस ने आरोप लगाया है, जबकि ब्रिटेन ने यूक्रेन के समर्थन की अपनी व्यापक नीति दोहराई है।

रूस और ब्रिटेन के बीच बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर

यूक्रेन युद्ध पहले ही यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को बदल चुका है। अब हथियारों और तकनीक की बढ़ती भूमिका के साथ यह संघर्ष कूटनीतिक संबंधों को भी लगातार प्रभावित कर रहा है।

रूस और ब्रिटेन के बीच नए आरोप-प्रत्यारोप इसी व्यापक तनाव का हिस्सा हैं।

यदि यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य तकनीक की आपूर्ति और रूस के भीतर उसके इस्तेमाल का दायरा बढ़ता है, तो आने वाले समय में मॉस्को और पश्चिमी देशों के बीच बयानबाजी और अधिक तीखी हो सकती है।

यूक्रेन युद्ध में ड्रोन अब सबसे अहम हथियारों में शामिल

रूस-यूक्रेन संघर्ष ने दुनिया को दिखा दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन की भूमिका कितनी बड़ी हो सकती है।

छोटे निगरानी ड्रोन से लेकर लंबी दूरी तक हमला करने वाले सिस्टम तक, मानवरहित तकनीक युद्ध की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

यूक्रेन के रूस के भीतर बढ़ते हमले और ब्रिटिश कंपनियों के कथित ड्रोन इस्तेमाल से जुड़ा विवाद इसी बदलती युद्ध तकनीक की ओर संकेत करता है।

अब मामला केवल रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष का नहीं रह गया है। इसके साथ यूरोपीय सुरक्षा, पश्चिमी सैन्य सहायता और रूस-पश्चिम संबंधों का बड़ा सवाल भी जुड़ा हुआ है।

रूस की चेतावनी और ब्रिटेन का जवाब आमने-सामने

एक तरफ रूस ब्रिटेन पर यूक्रेन युद्ध को भड़काने और ब्रिटिश तकनीक के जरिए रूस को निशाना बनाए जाने का आरोप लगा रहा है। दूसरी तरफ ब्रिटेन साफ कर रहा है कि वह यूक्रेन की रक्षा के लिए आवश्यक सैन्य सहायता देता रहेगा।

यही विरोधाभास आने वाले दिनों में इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना सकता है।

रूस की ‘गंभीर परिणाम’ वाली चेतावनी के बाद अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या रूस और ब्रिटेन के संबंधों पर इसका कोई बड़ा असर पड़ता है।

रूस ने ब्रिटेन पर यूक्रेन युद्ध में दखल देने का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि रूस के खिलाफ किए गए एक हमले में ब्रिटिश कंपनियों द्वारा निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल हुआ। यह दावा ब्रिटिश अखबार द संडे टाइम्स की रिपोर्ट के बाद सामने आया। ब्रिटेन ने यूक्रेन के साथ मजबूती से खड़े रहने और उसकी रक्षा के लिए आवश्यक हथियार उपलब्ध कराते रहने की अपनी नीति दोहराई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूक्रेन ने इस साल रूस के अंदर ड्रोन और लंबी दूरी के हथियारों से हमले बढ़ाए हैं, जिनमें सैन्य ठिकानों के अलावा तेल रिफाइनरी, बंदरगाह और औद्योगिक प्रतिष्ठान भी निशाने पर रहे हैं। ब्रिटेन ने युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन के लिए बड़ी आर्थिक और सैन्य सहायता का वादा किया है तथा हजारों यूक्रेनी सैनिकों को प्रशिक्षण भी दिया है। फिलहाल ब्रिटिश तकनीक वाले ड्रोन के कथित इस्तेमाल को लेकर रूस का आरोप और ब्रिटेन का यूक्रेन समर्थन—दोनों आमने-सामने हैं।

 

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