Muzaffarnagar में CM युवा योजना की धीमी रफ्तार पर CDO सख्त, बैंकों को फटकार; शून्य ऋण वितरण वाली शाखाओं पर कार्रवाई के निर्देश
Muzaffarnagar में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान यानी सीएम युवा योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। योजना के तहत पात्र युवाओं को ऋण स्वीकृति और वितरण की रफ्तार निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले कम मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने संबंधित बैंक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
विकास भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में बैंकवार ऋण स्वीकृति, ऋण वितरण और लंबित प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में सामने आई धीमी प्रगति पर मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए बैंकों को पात्र लाभार्थियों के मामलों में तेजी लाने और समयबद्ध तरीके से ऋण स्वीकृत एवं वितरित करने के निर्देश दिए।
सीडीओ ने साफ किया कि सीएम युवा योजना शासन की प्राथमिकता वाली महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में पात्र युवाओं के प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना या ऋण वितरण में उदासीनता बरतना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लक्ष्य के मुकाबले कम ऋण स्वीकृति और वितरण पर प्रशासन नाराज
समीक्षा बैठक के दौरान योजना के निर्धारित लक्ष्य और उसके मुकाबले हुई ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रगति पर चर्चा की गई।
प्रशासन के सामने यह बात आई कि योजना की अपेक्षित गति से ऋण स्वीकृत और वितरित नहीं हो रहे हैं।
इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब करते हुए बैंक स्तर पर लंबित प्रकरणों का तेजी से निस्तारण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजना का लाभ समय पर मिलना चाहिए और बैंकिंग प्रक्रिया के कारण अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
Axis Bank के सिर्फ एक ऋण वितरण पर CDO की कड़ी नाराजगी
समीक्षा के दौरान Axis Bank की प्रगति विशेष रूप से चर्चा में रही।
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष के दौरान बैंक की ओर से मात्र एक ऋण वितरित किया गया है।
योजना के लक्ष्य की तुलना में यह स्थिति सामने आने पर मुख्य विकास अधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई।
उन्होंने उपायुक्त उद्योग को Axis Bank के संबंधित शाखा प्रबंधक के विरुद्ध लिखित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
शून्य ऋण वितरण वाली शाखाओं पर भी होगी लिखित कार्रवाई
सिर्फ Axis Bank तक मामला सीमित नहीं रहा। जिन शाखाओं में योजना के अंतर्गत शून्य ऋण वितरण हुआ है, उनके शाखा प्रबंधकों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि योजना की प्रगति में बैंक शाखाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और पात्र मामलों को लंबित रखने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाएगी।
प्रशासन की ओर से साफ संकेत दिया गया कि अब केवल लक्ष्य निर्धारित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वास्तविक ऋण स्वीकृति और वितरण पर भी निगरानी रखी जाएगी।
HDFC, Indian Bank और ग्रामीण बैंक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
समीक्षा के दौरान एचडीएफसी बैंक, इंडियन बैंक, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक और बैंक ऑफ इंडिया की योजना के क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर भी मुख्य विकास अधिकारी ने रोष व्यक्त किया।
इन बैंकों से जुड़े अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।
सीडीओ ने कहा कि योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन और बैंक दोनों की जिम्मेदारी है।
Bank of India और अन्य अधिकारियों को भी चेतावनी
बैठक में बैंक ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक की अनुपस्थिति भी सामने आई।
इसके अलावा पुरकाजी शाखा, बैंक ऑफ बड़ौदा रुड़की रोड, डिन्दावली और एसबीआई रोहना कलां के शाखा प्रबंधकों के बैठक में अनुपस्थित रहने पर मुख्य विकास अधिकारी ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रशासन ने अधिकारियों की बैठक में उपस्थिति और योजना की समीक्षा को गंभीरता से लेने पर जोर दिया।
PNB की कई शाखाओं की भी हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में पंजाब नेशनल बैंक की कई शाखाओं की योजना के अंतर्गत प्रगति और सहभागिता का भी जायजा लिया गया।
कुतुबपुर, कवाल, रोहना कला, छपार, सुजड़ू, कल्याणपुर फुगाना, खुड्डा और कोर्ट रोड शाखाओं की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई।
इन शाखाओं से योजना के क्रियान्वयन में अपेक्षित सक्रियता और सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
शाखा स्तर पर तेजी लाने की जरूरत
मुख्य विकास अधिकारी ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि योजना की सफलता काफी हद तक शाखा स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करती है।
यदि पात्र लाभार्थी आवेदन कर चुके हैं और उनकी पात्रता पूरी है, तो उनके प्रकरणों का अनावश्यक रूप से लंबित रहना योजना के उद्देश्य को प्रभावित करता है।
इसीलिए बैंक अधिकारियों से प्रक्रिया को तेज करने को कहा गया।
पात्र युवाओं को समय पर मिले ऋण का लाभ
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उद्देश्य युवाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
ऐसी योजनाओं में बैंक ऋण की समय पर स्वीकृति और वितरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि ऋण मिलने में देरी होती है तो लाभार्थी अपने प्रस्तावित व्यवसाय या उद्यम को समय पर शुरू नहीं कर पाते।
इसी कारण प्रशासन ने बैंक अधिकारियों को लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए।
CM युवा योजना को शासन की प्राथमिकता बताया
मुख्य विकास अधिकारी कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने बैठक में स्पष्ट कहा कि सीएम युवा योजना शासन की प्राथमिकता वाली महत्वपूर्ण योजना है।
उन्होंने सभी बैंक अधिकारियों और शाखा प्रबंधकों को निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों के प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
ऋण स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ योजना के लक्ष्य को पूरा करने पर ध्यान देने को कहा गया।
लापरवाही मिली तो तय होगी जिम्मेदारी
सीडीओ ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि योजना की प्रगति में किसी भी प्रकार की उदासीनता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इसके बाद आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
इस निर्देश से स्पष्ट है कि प्रशासन अब योजना की प्रगति को लेकर बैंकवार और शाखावार निगरानी को और गंभीर बनाने की तैयारी में है।
बैंक अधिकारियों से कार्यप्रणाली सुधारने को कहा
बैठक के दौरान कई शाखा प्रबंधकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए चेताया गया।
अधिकारियों से कहा गया कि पात्र लाभार्थियों के प्रकरणों को केवल कागजी प्रक्रिया में लंबित न रखा जाए।
जहां दस्तावेज या प्रक्रिया संबंधी कमी हो, वहां लाभार्थियों को आवश्यक जानकारी देकर प्रकरण पूरा कराया जाए और पात्र मामलों में समय पर निर्णय लिया जाए।
लंबित प्रकरणों पर विशेष निगरानी
समीक्षा में केवल स्वीकृत ऋणों की संख्या पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि लंबित मामलों की स्थिति भी देखी गई।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि आवेदन से लेकर ऋण वितरण तक पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाए।
इससे यह पता लगाया जा सकता है कि देरी किस स्तर पर हो रही है और उसके लिए कौन-सा विभाग या शाखा जिम्मेदार है।
युवाओं के लिए स्वरोजगार का अवसर
सीएम युवा योजना के माध्यम से युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने की दिशा में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
कई युवा नौकरी की तलाश के बजाय अपना व्यवसाय या सेवा आधारित उद्यम शुरू करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी उनके सामने बड़ी बाधा बन सकती है।
ऐसे में बैंक ऋण आधारित सरकारी योजनाएं उन्हें अपना काम शुरू करने का अवसर दे सकती हैं।
ऋण वितरण की धीमी गति से योजना का उद्देश्य प्रभावित
बैठक में प्रशासन की नाराजगी का मुख्य कारण यही रहा कि निर्धारित लक्ष्य की तुलना में ऋण स्वीकृति और वितरण की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची।
यदि पात्र लाभार्थियों को समय पर ऋण नहीं मिलता, तो योजना के तहत रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है।
इसीलिए प्रशासन ने बैंकों को अधिक सक्रियता दिखाने के निर्देश दिए हैं।
शाखा प्रबंधकों की भूमिका अहम
योजना के क्रियान्वयन में शाखा प्रबंधकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
लाभार्थियों के आवेदन, दस्तावेजों की जांच, ऋण प्रक्रिया और अंतिम वितरण जैसे कई चरण बैंक स्तर पर पूरे होते हैं।
इसलिए प्रशासन चाहता है कि शाखा स्तर पर प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाया जाए।
प्रशासन ने बैंकवार समीक्षा को बनाया गंभीर मुद्दा
बैठक में अलग-अलग बैंकों और शाखाओं की प्रगति पर चर्चा होना बताता है कि अब योजना की निगरानी सामान्य समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी।
किस बैंक ने कितने ऋण स्वीकृत किए, कितने वितरित किए और कितने प्रकरण लंबित हैं—इन सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।
इस तरह की बैंकवार समीक्षा से कमजोर प्रदर्शन करने वाली शाखाओं की पहचान भी आसानी से हो सकती है।
अनुपस्थित अधिकारियों पर भी प्रशासन सख्त
समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को लेकर भी मुख्य विकास अधिकारी ने सख्ती दिखाई।
बैंक ऑफ इंडिया के जिला समन्वयक और कुछ शाखा प्रबंधकों की अनुपस्थिति पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि योजना की समीक्षा बैठकों को गंभीरता से लेना और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उद्योग विभाग को भी जिम्मेदारी निभाने के निर्देश
मुख्य विकास अधिकारी ने उपायुक्त उद्योग को Axis Bank के शाखा प्रबंधक के खिलाफ लिखित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इससे उद्योग विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
योजना की प्रगति में बैंक और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
उपायुक्त उद्योग जैस्मीन ने भी बैठक में हिस्सा लिया
बैठक में उपायुक्त उद्योग जैस्मीन मौजूद रहीं।
उनके साथ सहायक आयुक्त उद्योग आशीष कुमार और अग्रणी जिला प्रबंधक अनिल कुमार भी बैठक में उपस्थित रहे।
सभी जिला समन्वयकों और संबंधित बैंक अधिकारियों ने भी समीक्षा बैठक में भाग लिया।
बैंक और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
योजना को जमीन पर प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।
यदि लाभार्थी को सरकारी स्तर से स्वीकृति मिलती है लेकिन बैंक स्तर पर प्रक्रिया लंबी चलती है, तो योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।
बैठक में इसी समन्वय को मजबूत करने और प्रकरणों की गति बढ़ाने पर जोर दिया गया।
लाभार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान जरूरी
कई बार ऋण प्रक्रिया में दस्तावेज, पात्रता या बैंक संबंधी औपचारिकताओं के कारण प्रकरण अटक सकते हैं।
ऐसी स्थिति में संबंधित बैंक और विभाग को लाभार्थी को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रशासन की कोशिश है कि पात्र युवा केवल प्रक्रिया की जटिलता के कारण योजना के लाभ से वंचित न रहें।
बैंक अधिकारियों को प्राथमिकता तय करने के निर्देश
सीडीओ ने अधिकारियों को कहा कि पात्र लाभार्थियों के प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
इसका उद्देश्य उन मामलों में अनावश्यक देरी को रोकना है जिनमें लाभार्थी योजना की शर्तें पूरी करते हैं।
ऋण स्वीकृति और वितरण में तेजी लाकर योजना की वास्तविक प्रगति को बेहतर करने पर जोर दिया गया।
शून्य प्रदर्शन वाली शाखाएं प्रशासन के रडार पर
जिन शाखाओं में योजना के अंतर्गत अभी तक कोई ऋण वितरण नहीं हुआ है, वे प्रशासन की विशेष निगरानी में रहेंगी।
ऐसी शाखाओं के शाखा प्रबंधकों के विरुद्ध लिखित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
यह सख्ती बैंक शाखाओं को योजना के प्रति अधिक सक्रिय बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
योजना की अगली समीक्षा में क्या दिखेगा असर?
अब अगली समीक्षा में यह देखा जाएगा कि बैठक के निर्देशों का कितना असर हुआ।
क्या लंबित प्रकरणों में तेजी आई, कितने नए ऋण स्वीकृत हुए और कितने लाभार्थियों को वास्तविक रूप से ऋण वितरित किया गया—इन आंकड़ों से योजना की प्रगति का पता चलेगा।
विशेष रूप से उन शाखाओं पर नजर रहेगी जिनका प्रदर्शन पिछली समीक्षा में कमजोर पाया गया।
युवाओं के उद्यम को गति देने की कोशिश
प्रशासन का जोर इस योजना को केवल कागजी लक्ष्य तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने पर दिखाई दिया।
ऋण मिलने के बाद युवा अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं और आगे चलकर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।
इस लिहाज से योजना का प्रभाव केवल एक लाभार्थी तक सीमित नहीं रह सकता।
CM युवा योजना में बैंकिंग प्रक्रिया की अहम भूमिका
सरकारी योजनाओं में वित्तीय संस्थानों की भूमिका अक्सर निर्णायक होती है।
आवेदन और पात्रता प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऋण स्वीकृति तथा वितरण के बिना योजना का वास्तविक लाभ लाभार्थी तक नहीं पहुंच सकता।
मुजफ्फरनगर में हुई समीक्षा बैठक में इसी बैंकिंग प्रक्रिया को तेज करने पर सबसे अधिक जोर दिया गया।
सीडीओ की चेतावनी के बाद बढ़ेगी सक्रियता
मुख्य विकास अधिकारी की सख्त नाराजगी और कार्रवाई के निर्देशों के बाद संबंधित बैंक शाखाओं से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
खासकर शून्य ऋण वितरण वाली शाखाओं और कमजोर प्रदर्शन करने वाले बैंकों के अधिकारियों पर अब अधिक दबाव रहेगा।
आने वाले समय में इसकी वास्तविक तस्वीर ऋण स्वीकृति और वितरण के आंकड़ों से सामने आएगी।
प्रशासन का संदेश साफ—पात्र युवा नहीं रुकना चाहिए
समीक्षा बैठक से प्रशासन का संदेश स्पष्ट है कि पात्र लाभार्थियों के मामले अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने चाहिए।
योजना के उद्देश्य को पूरा करने के लिए बैंक अधिकारियों को तेजी, सक्रियता और जिम्मेदारी के साथ काम करने की जरूरत है।
मुख्य विकास अधिकारी ने भी इसी दिशा में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मुजफ्फरनगर में CM युवा योजना की अगली तस्वीर पर नजर
अब प्रशासन की निगाह योजना की आगामी प्रगति पर रहेगी।
बैंकवार प्रदर्शन, शाखावार ऋण वितरण और लंबित मामलों की स्थिति अगली समीक्षा में महत्वपूर्ण होगी।
यदि बैंकों की ओर से निर्देशों के अनुरूप तेजी लाई जाती है, तो अधिक पात्र युवाओं को योजना का लाभ मिल सकता है।
फिलहाल बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि CM युवा योजना में धीमी रफ्तार अब स्वीकार नहीं की जाएगी और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

