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Muzaffarnagar में फिर तेज हुई जाट आरक्षण की मांग, 4 अक्टूबर को बुढ़ाना में महासम्मेलन; यशपाल मलिक बोले- केंद्र की OBC सूची में शामिल करने की मांग उठेगी

Muzaffarnagar । केंद्र की OBC सूची में जाट समाज को शामिल किए जाने की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक बार फिर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने 4 अक्टूबर 2026 को बुढ़ाना में जाट महासम्मेलन आयोजित करने का ऐलान किया है। सम्मेलन बुढ़ाना के डीएवी इंटर कॉलेज मैदान में प्रस्तावित है। समिति की ओर से सम्मेलन को लेकर क्षेत्र के गांवों में जनसंपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है।

आर्यसमाज रोड स्थित आर्य समाज में आयोजित प्रेसवार्ता में समिति के राष्ट्रीय संयोजक यशपाल मलिक ने सम्मेलन की जानकारी दी। उनके अनुसार इस कार्यक्रम में मुजफ्फरनगर के साथ-साथ सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद और मेरठ से भी जाट समाज के लोग शामिल होंगे।

हालिया स्थानीय रिपोर्टों में भी 4 अक्टूबर के बुढ़ाना महासम्मेलन और केंद्र की OBC सूची में जाटों को शामिल करने की मांग की पुष्टि हुई है। समिति की ओर से गांव-गांव संपर्क अभियान चलाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

4 अक्टूबर को बुढ़ाना में जुटने की तैयारी

जाट आरक्षण संघर्ष समिति और जाट महासभा की ओर से आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। समिति के पदाधिकारी लोगों से संपर्क कर सम्मेलन में भाग लेने की अपील कर रहे हैं।

प्रेसवार्ता में बताया गया कि सम्मेलन का मुख्य मुद्दा जाट समाज को केंद्र की OBC सूची में शामिल किए जाने की मांग रहेगा। समिति के अनुसार यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही है और इसी को लेकर 4 अक्टूबर को बुढ़ाना में बड़ी सभा आयोजित की जा रही है।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार समिति की ओर से सभी धर्मों से जुड़े जाटों को भी सम्मेलन में शामिल होने का आह्वान किया जा रहा है।

यशपाल मलिक ने आरक्षण आंदोलन का इतिहास बताया

प्रेसवार्ता में यशपाल मलिक ने जाट आरक्षण आंदोलन की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि वर्ष 2006 से 2014 के बीच इस मांग को लेकर लंबा आंदोलन चला था। उनके अनुसार तत्कालीन केंद्र सरकार ने 4 मार्च 2014 को जाट समाज को केंद्रीय OBC सूची में शामिल करने का निर्णय लिया था।

हालांकि यह व्यवस्था लंबे समय तक कायम नहीं रही। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2015 में संबंधित अधिसूचना को रद्द कर दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों में भी 2014 के केंद्रीय OBC आरक्षण और 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसे निरस्त किए जाने का उल्लेख मिलता है।

यशपाल मलिक ने कहा कि इसके बाद भी जाट समाज की ओर से केंद्र की OBC सूची में शामिल किए जाने की मांग जारी रही।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिले आश्वासनों का किया जिक्र

यशपाल मलिक ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 26 मार्च 2015 को तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाट समाज के सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी और आरक्षण को लेकर आश्वासन दिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि बाद के वर्षों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से भी जाट संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकों के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर आश्वासन दिए गए। यशपाल मलिक ने वर्ष 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों से पहले हुई बैठकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी ओर से किए गए दावे के मुताबिक मांग अभी तक पूरी नहीं हुई है।

इन बयानों को समिति की ओर से रखे गए दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। उपलब्ध हालिया रिपोर्टों में भी समिति की ओर से केंद्र सरकार से मिले पूर्व आश्वासनों और लंबित मांग का उल्लेख किया गया है।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सामने लंबित है प्रतिवेदन: समिति

जाट महासभा के अध्यक्ष चौधरी देवेंद्र अहलावत ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का पुनर्गठन वर्ष 2019 में हो चुका है और जाट समाज से संबंधित प्रतिवेदन आयोग के समक्ष लंबित है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आयोग की रिपोर्ट प्राप्त कर जाट समाज को केंद्रीय OBC सूची में शामिल किए जाने की दिशा में कार्रवाई करने की मांग की।

इस मुद्दे को लेकर समिति का कहना है कि केंद्र और राज्य स्तर पर जाट समाज के अलग-अलग हिस्सों की आरक्षण संबंधी स्थिति रही है और केंद्रीय OBC सूची में शामिल किए जाने की मांग इसी अंतर से जुड़ी है।

गांव-गांव पहुंच रहा महासम्मेलन का संदेश

जाट महासभा के महासचिव संतोष वर्मा और संरक्षक प्रकाशवीर ने बताया कि महासम्मेलन को लेकर गांव-गांव प्रचार अभियान चलाया जा रहा है।

समिति के कार्यकर्ता लोगों से संपर्क कर 4 अक्टूबर को बुढ़ाना पहुंचने की अपील कर रहे हैं। हालिया रिपोर्टों में भी बुढ़ाना महासम्मेलन के लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई है।

यशपाल मलिक ने एक हालिया बातचीत में भी कहा कि वह सम्मेलन से पहले बड़ी संख्या में गांवों में संपर्क कर चुके हैं और सीमित संसाधनों के बीच सोशल मीडिया तथा व्यक्तिगत जनसंपर्क के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जा रही है।

‘बुढ़ाना के बाद दूसरे जिलों में भी होंगे कार्यक्रम’

यशपाल मलिक के हालिया बयान के अनुसार बुढ़ाना के बाद भी जाट आरक्षण की मांग को लेकर अन्य स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। उन्होंने बुलंदशहर, मथुरा और बिजनौर में आगे कार्यक्रमों का जिक्र किया है।

इससे संकेत मिलता है कि 4 अक्टूबर का कार्यक्रम समिति के लिए केवल एक स्थानीय सम्मेलन न होकर व्यापक जनसंपर्क अभियान का हिस्सा है।

आंदोलन के तरीके को लेकर भी रखी अपनी बात

यशपाल मलिक ने अपनी हालिया बातचीत में कहा कि उनका उद्देश्य रास्ते रोकने या किसी तरह का टकराव पैदा करना नहीं है। उन्होंने लोगों से आरक्षण की मांग को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने रखने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और समाज से जुड़े दूसरे मुद्दे अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जाट समाज के लिए केंद्रीय OBC सूची में आरक्षण की मांग भी एक अलग मुद्दा है।

मलिक ने लोगों से अपनी मांग रखने के लिए संयमित तरीका अपनाने की बात कही। यह उनका व्यक्तिगत और संगठनात्मक रुख है, जिसे उन्होंने अपनी बातचीत में सामने रखा।

जाट समाज की केंद्रीय OBC सूची में स्थिति क्या है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी राज्य की OBC सूची में किसी समुदाय की स्थिति और केंद्र की OBC सूची में उसकी स्थिति एक ही बात नहीं है। केंद्रीय OBC सूची केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े आरक्षण प्रावधानों में प्रासंगिक होती है।

यशपाल मलिक और जाट आरक्षण संघर्ष समिति का वर्तमान अभियान इसी केंद्रीय OBC सूची में जाट समाज को शामिल करने की मांग पर केंद्रित है। स्थानीय रिपोर्टों में भी आगामी बुढ़ाना सम्मेलन का मुख्य मुद्दा यही बताया गया है।

‘सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन’ को लेकर समिति का तर्क

प्रेसवार्ता और हालिया बातचीत में यशपाल मलिक ने जाट समाज के सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े तर्क भी रखे। उनका कहना है कि आरक्षण का सवाल केवल आर्थिक स्थिति से नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से भी जुड़ा है।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति और ऐतिहासिक सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था लागू किए जाने के समय इन पहलुओं पर भी विचार किया गया था। यह समिति की ओर से प्रस्तुत किया गया तर्क है और केंद्रीय OBC सूची में शामिल किए जाने की मांग के समर्थन में इसे सामने रखा जा रहा है।

राजनीति से अलग रखने की बात भी कही

यशपाल मलिक से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर भी सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने अपने छात्र जीवन और पुराने राजनीतिक अवसरों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका वर्तमान अभियान राजनीतिक पद हासिल करने के उद्देश्य से नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े जाट नेताओं की अपनी राजनीतिक भूमिकाएं हैं, जबकि उनका संगठन आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रित है।

इस बयान के बावजूद जाट आरक्षण का मुद्दा स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस से जुड़ता है, क्योंकि केंद्रीय आरक्षण नीति और उससे संबंधित निर्णय सरकार तथा संवैधानिक संस्थाओं के स्तर पर होते हैं।

4 अक्टूबर के सम्मेलन पर टिकी नजर

अब सभी की नजर 4 अक्टूबर को बुढ़ाना के डीएवी इंटर कॉलेज मैदान में होने वाले जाट महासम्मेलन पर है। समिति इसे केंद्रीय OBC सूची में जाट समाज को शामिल किए जाने की मांग को लेकर बड़े स्तर की लामबंदी के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर से लोगों के शामिल होने की बात कही गई है। समिति के पदाधिकारी सम्मेलन से पहले लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं।

हालिया रिपोर्टों में भी सम्मेलन के लिए क्षेत्रीय स्तर पर तैयारियों और जनसंपर्क अभियान के तेज होने की पुष्टि हुई है।

प्रेसवार्ता में ये लोग रहे मौजूद

प्रेसवार्ता के दौरान रविंद्र आर्य, अनूप राठी एडवोकेट, रणधीर सिंह, धर्मवीर मलिक, सुधीर मलिक, रविंद्र मलिक सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

समिति और महासभा के पदाधिकारियों ने सम्मेलन को लेकर अपनी तैयारियों और जनसंपर्क अभियान की जानकारी साझा की।

आरक्षण की मांग अब किस दिशा में जाएगी?

4 अक्टूबर का बुढ़ाना महासम्मेलन इस अभियान के अगले चरण की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्यक्रम रहेगा। समिति की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि वह केंद्र सरकार के समक्ष जाट समाज को केंद्रीय OBC सूची में शामिल करने की मांग रखेगी।

वहीं, आरक्षण से जुड़े किसी भी अंतिम निर्णय के लिए केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की भूमिका भी इस प्रक्रिया में प्रासंगिक है।

फिलहाल जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने अपना अगला बड़ा कार्यक्रम तय कर दिया है और 4 अक्टूबर को बुढ़ाना में होने वाले महासम्मेलन के लिए क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है।

4 अक्टूबर को बुढ़ाना में होने वाला जाट महासम्मेलन केंद्र की OBC सूची में जाट समाज को शामिल करने की मांग पर केंद्रित रहेगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संयोजक यशपाल मलिक के अनुसार सम्मेलन में मुजफ्फरनगर के अलावा सहारनपुर, शामली, बागपत, गाजियाबाद और मेरठ से लोग शामिल होंगे। समिति ने गांव-गांव जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। आरक्षण को लेकर 2014 की अधिसूचना और 2015 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह मुद्दा लंबे समय से बहस और आंदोलन का विषय रहा है। अब 4 अक्टूबर के सम्मेलन में समिति आगे की रणनीति और अपनी मांग को लेकर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश करेगी।

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